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CJP प्रदर्शन पर कंगना रनोट बोलीं- हम डर गए थे, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कवच बनकर संभाला मोर्चा
Digital Desk
संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों पर भाजपा सांसद कंगना रनोट ने कहा कि हालात कुछ समय के लिए चिंताजनक हो गए थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की।
दिल्ली में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे CJP आंदोलन के दौरान सोमवार को राजधानी के कई इलाकों में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। इसी बीच संसद परिसर में मौजूद भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कुछ समय के लिए स्थिति काफी गंभीर लग रही थी और संसद के भीतर मौजूद सांसद भी चिंतित हो गए थे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों से संसद के गेट बंद कर दिए गए थे और सांसदों की आवाजाही भी कुछ समय के लिए प्रभावित रही। कंगना ने कहा कि उस समय ऐसा लग रहा था कि भीड़ आगे बढ़ सकती है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने पूरी जिम्मेदारी के साथ हालात संभाले और किसी भी बड़े नुकसान को होने से रोक दिया।
कंगना रनोट ने कहा कि सोमवार की घटनाओं के दौरान संसद परिसर में मौजूद सभी लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। उनके मुताबिक कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बन गया था कि सभी को अपनी सुरक्षा की चिंता होने लगी थी। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कंगना ने दिल्ली पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने खुद को सुरक्षा कवच की तरह सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पुलिस पर पथराव भी हुआ और कई जवान घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने संयम बनाए रखा और आम लोगों तथा जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा बलों ने जिस तरह जिम्मेदारी निभाई, वह सराहनीय है।
सोमवार सुबह जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही संसद की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। अधिकारियों के अनुसार निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कुछ समूह आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। पुलिस का कहना है कि कई जगह बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई।
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हिंसक व्यवहार किया और पुलिसकर्मियों पर पत्थर व अन्य वस्तुएं फेंकी। पुलिस के अनुसार इस घटनाक्रम में बड़ी संख्या में जवान घायल हुए और कुछ सरकारी वाहनों तथा सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों को पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी दी गई थी और निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील की गई थी। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन होने पर आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ी।
उधर प्रदर्शन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना था। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संवाद की आवश्यकता दोहराई। मंगलवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहा, जहां छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके में तैनात रहीं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए निगरानी करती रहीं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की।
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CJP प्रदर्शन पर कंगना रनोट बोलीं- हम डर गए थे, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कवच बनकर संभाला मोर्चा
Digital Desk
दिल्ली में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे CJP आंदोलन के दौरान सोमवार को राजधानी के कई इलाकों में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। इसी बीच संसद परिसर में मौजूद भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कुछ समय के लिए स्थिति काफी गंभीर लग रही थी और संसद के भीतर मौजूद सांसद भी चिंतित हो गए थे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों से संसद के गेट बंद कर दिए गए थे और सांसदों की आवाजाही भी कुछ समय के लिए प्रभावित रही। कंगना ने कहा कि उस समय ऐसा लग रहा था कि भीड़ आगे बढ़ सकती है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने पूरी जिम्मेदारी के साथ हालात संभाले और किसी भी बड़े नुकसान को होने से रोक दिया।
कंगना रनोट ने कहा कि सोमवार की घटनाओं के दौरान संसद परिसर में मौजूद सभी लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। उनके मुताबिक कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बन गया था कि सभी को अपनी सुरक्षा की चिंता होने लगी थी। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कंगना ने दिल्ली पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने खुद को सुरक्षा कवच की तरह सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पुलिस पर पथराव भी हुआ और कई जवान घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने संयम बनाए रखा और आम लोगों तथा जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा बलों ने जिस तरह जिम्मेदारी निभाई, वह सराहनीय है।
सोमवार सुबह जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही संसद की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। अधिकारियों के अनुसार निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कुछ समूह आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। पुलिस का कहना है कि कई जगह बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई।
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हिंसक व्यवहार किया और पुलिसकर्मियों पर पत्थर व अन्य वस्तुएं फेंकी। पुलिस के अनुसार इस घटनाक्रम में बड़ी संख्या में जवान घायल हुए और कुछ सरकारी वाहनों तथा सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों को पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी दी गई थी और निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील की गई थी। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन होने पर आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ी।
उधर प्रदर्शन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना था। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संवाद की आवश्यकता दोहराई। मंगलवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहा, जहां छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके में तैनात रहीं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए निगरानी करती रहीं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की।
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