भारत में कहां सबसे बेहतर ड्राइविंग? एथर एनर्जी की रिपोर्ट में शहरों का व्यवहार सामने आया

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5 लाख इलेक्ट्रिक स्कूटर के डेटा से खुलासा, मेट्रो शहरों में ड्राइविंग पैटर्न ज्यादा आक्रामक

देश के अलग-अलग शहरों में वाहन चलाने का तरीका एक जैसा नहीं है। यह बात इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता एथर एनर्जी की नई ‘राइडिंग इनसाइट्स 2025’ रिपोर्ट में सामने आई है। कंपनी ने भारत के 5 लाख से अधिक कनेक्टेड इलेक्ट्रिक स्कूटर से मिले आंकड़ों के आधार पर यह विश्लेषण किया है कि किस शहर में लोग ज्यादा संयमित तरीके से गाड़ी चलाते हैं और कहां ड्राइविंग व्यवहार अधिक अव्यवस्थित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महानगरों में ट्रैफिक दबाव का सीधा असर ड्राइविंग शैली पर दिखता है। कोलकाता में ई-स्कूटर चालक सबसे ज्यादा हॉर्न का इस्तेमाल करते पाए गए। औसतन यहां प्रति घंटे 130 से अधिक बार हॉर्न बजाया जाता है, जो शहर के घने यातायात और सड़क पर बढ़ते तनाव को दर्शाता है। वहीं बेंगलुरु में अचानक ब्रेक लगाने की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की गईं, जिससे यह संकेत मिलता है कि ट्रैफिक फ्लो वहां अपेक्षाकृत अस्थिर है।

इसके उलट, रिपोर्ट में पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों को अपेक्षाकृत शांत श्रेणी में रखा गया है। यहां ड्राइवर कम हॉर्न बजाते हैं और गति नियंत्रण में ज्यादा अनुशासन दिखाई देता है। दक्षिण भारत के कई मझोले शहरों और छोटे कस्बों में भी ड्राइविंग व्यवहार संतुलित पाया गया, जहां न तो अचानक ब्रेकिंग आम है और न ही अनावश्यक हॉर्निंग।

एथर एनर्जी का कहना है कि यह अध्ययन केवल आदतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि तकनीक किस तरह शहरी परिवहन को प्रभावित कर रही है। कंपनी के अनुसार, आज के ई-स्कूटर चालक रोजमर्रा की यात्रा में मोबाइल नेटवर्क और सॉफ्टवेयर फीचर्स पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। इससे न केवल राइडिंग अनुभव बदल रहा है, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी आदतें भी प्रभावित हो रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सुरक्षा आधारित फीचर्स का उपयोग शहरों के हिसाब से अलग-अलग है। एथर की ‘फॉलसेफ’ तकनीक, जो स्कूटर के गिरने पर मोटर को अपने आप बंद कर देती है, उसका इस्तेमाल दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों में अपेक्षाकृत अधिक देखा गया। यह संकेत करता है कि यहां सड़क की स्थिति और ट्रैफिक जोखिम ज्यादा हैं। इसके विपरीत मुंबई और बेंगलुरु में इस फीचर की जरूरत कम पड़ी, जहां औसतन दो साल में एक बार या उससे भी कम इसका उपयोग हुआ।

कनेक्टेड फीचर्स की बात करें तो ‘लाइव लोकेशन शेयरिंग’ का चलन बड़े शहरों में ज्यादा है। दिल्ली, आगरा और कोटा जैसे शहरों में चालक छोटे और शांत कस्बों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक बार अपनी लोकेशन साझा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले शहरों में यह फीचर सुरक्षा और समन्वय दोनों के लिए जरूरी बनता जा रहा है।

एथर एनर्जी के अधिकारियों के अनुसार, यह डेटा भविष्य में बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग, सड़क सुरक्षा सुधार और स्मार्ट मोबिलिटी नीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि जैसे-जैसे शहर बड़े होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ड्राइविंग व्यवहार में तकनीक की भूमिका और भी अहम होती जा रही है।

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