शिवसेना (UBT) में बगावत की आहट, दिल्ली में सांसदों की आपात बैठक

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9 में से 6 सांसदों के पाला बदलने की अटकलों के बीच उद्धव गुट अलर्ट, संजय राउत ने लगाए ₹50-₹50 करोड़ ऑफर के गंभीर आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े सियासी तनाव के दौर में पहुंच गई है। शिवसेना (UBT) के भीतर कथित टूट और बगावत की अटकलों ने माहौल गरमा दिया है। स्थिति उस वक्त और गंभीर हो गई जब पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों की दिल्ली में आपात बैठक बुला ली और स्पष्ट निर्देश जारी किया कि सभी को हर हाल में शामिल होना होगा। पार्टी की ओर से व्हिप जारी करते हुए चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई भी की जा सकती है। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि 9 में से 6 से 7 सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं। मामला सिर्फ अटकलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हालात ने संगठन के भीतर असहजता भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (UBT) के कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और उनके संसद में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश में जुटा है, लेकिन कई स्तरों पर संवाद टूटता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde भी दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह नाम अविभाजित शिवसेना के प्रतीक बाघ से जुड़ा है, जो कभी पार्टी की ताकत का प्रतीक माना जाता था। अब इसी प्रतीक को लेकर सियासी तकरार नई दिशा लेती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल ने एक बार फिर 2022 की यादें ताजा कर दी हैं, जब बड़े पैमाने पर विधायकों ने बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र की सत्ता बदल गई थी।

इसी बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने एक बड़ा और विवादित दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने और प्रभावित करने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की जा रही है। राउत ने सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक कहा कि “एक सांसद की कीमत ₹50-₹50 करोड़ तक लगाई जा रही है और ₹15 करोड़ एडवांस दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।” हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। राउत ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति बताया और तीखी प्रतिक्रिया दी।

वहीं विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर तंज कसे जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने परोक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त की बातें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इस पूरे विवाद ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक बहस को और तेज कर दिया है। दूसरी तरफ, पार्टी के भीतर कुछ सांसदों ने इन सभी अटकलों को खारिज भी किया है और कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही बने हुए हैं।

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी अलग हो रहे गुट को पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधि न माना जाए। उनका कहना है कि पार्टी का व्हिप और संसदीय अधिकार संगठन से जुड़े होते हैं, इसलिए टूटने वाले समूह को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। यह कदम पार्टी की ओर से संस्थागत नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच कुछ सांसदों की दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और अलग-अलग गतिविधियों ने भी अटकलों को हवा दी है। हालांकि एक सांसद संजय दीना पाटिल ने साफ कहा है कि वे किसी भी बागी सूची का हिस्सा नहीं हैं और पूरी तरह पार्टी के साथ हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुई है और हर बयान नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

उन्होंने इस मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। 2022 में हुए बड़े विभाजन और सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि अभी भी ताजा है, और इसी कारण मौजूदा घटनाओं को उसी नजर से देखा जा रहा है। उस समय बड़े पैमाने पर विधायकों के एक गुट के अलग होने के बाद राज्य की सत्ता पूरी तरह बदल गई थी और राजनीतिक समीकरण नए सिरे से तय हुए थे। स्थिति यही है कि शिवसेना (UBT) नेतृत्व पूरी तरह सतर्क है और अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है। वहीं दूसरी ओर सियासी अटकलें और आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 

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17 Jun 2026 By Vaishnavi.J

शिवसेना (UBT) में बगावत की आहट, दिल्ली में सांसदों की आपात बैठक

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महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े सियासी तनाव के दौर में पहुंच गई है। शिवसेना (UBT) के भीतर कथित टूट और बगावत की अटकलों ने माहौल गरमा दिया है। स्थिति उस वक्त और गंभीर हो गई जब पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों की दिल्ली में आपात बैठक बुला ली और स्पष्ट निर्देश जारी किया कि सभी को हर हाल में शामिल होना होगा। पार्टी की ओर से व्हिप जारी करते हुए चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई भी की जा सकती है। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि 9 में से 6 से 7 सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं। मामला सिर्फ अटकलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हालात ने संगठन के भीतर असहजता भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (UBT) के कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और उनके संसद में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश में जुटा है, लेकिन कई स्तरों पर संवाद टूटता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde भी दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह नाम अविभाजित शिवसेना के प्रतीक बाघ से जुड़ा है, जो कभी पार्टी की ताकत का प्रतीक माना जाता था। अब इसी प्रतीक को लेकर सियासी तकरार नई दिशा लेती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल ने एक बार फिर 2022 की यादें ताजा कर दी हैं, जब बड़े पैमाने पर विधायकों ने बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र की सत्ता बदल गई थी।

इसी बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने एक बड़ा और विवादित दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने और प्रभावित करने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की जा रही है। राउत ने सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक कहा कि “एक सांसद की कीमत ₹50-₹50 करोड़ तक लगाई जा रही है और ₹15 करोड़ एडवांस दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।” हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। राउत ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति बताया और तीखी प्रतिक्रिया दी।

वहीं विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर तंज कसे जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने परोक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त की बातें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इस पूरे विवाद ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक बहस को और तेज कर दिया है। दूसरी तरफ, पार्टी के भीतर कुछ सांसदों ने इन सभी अटकलों को खारिज भी किया है और कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही बने हुए हैं।

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी अलग हो रहे गुट को पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधि न माना जाए। उनका कहना है कि पार्टी का व्हिप और संसदीय अधिकार संगठन से जुड़े होते हैं, इसलिए टूटने वाले समूह को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। यह कदम पार्टी की ओर से संस्थागत नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच कुछ सांसदों की दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और अलग-अलग गतिविधियों ने भी अटकलों को हवा दी है। हालांकि एक सांसद संजय दीना पाटिल ने साफ कहा है कि वे किसी भी बागी सूची का हिस्सा नहीं हैं और पूरी तरह पार्टी के साथ हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुई है और हर बयान नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

उन्होंने इस मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। 2022 में हुए बड़े विभाजन और सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि अभी भी ताजा है, और इसी कारण मौजूदा घटनाओं को उसी नजर से देखा जा रहा है। उस समय बड़े पैमाने पर विधायकों के एक गुट के अलग होने के बाद राज्य की सत्ता पूरी तरह बदल गई थी और राजनीतिक समीकरण नए सिरे से तय हुए थे। स्थिति यही है कि शिवसेना (UBT) नेतृत्व पूरी तरह सतर्क है और अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है। वहीं दूसरी ओर सियासी अटकलें और आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sound-of-rebellion-in-shiv-sena-ubt-emergency-meeting-of/article-56156

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