- Hindi News
- धर्म
- सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका क्या है? जानें मंत्र, नियम और लाभ
सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका क्या है? जानें मंत्र, नियम और लाभ
धर्म डेस्क
सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय, सही तरीका, मंत्र और लाभ जानें। ज्योतिष अनुसार सूर्य को अर्घ्य देने से यश, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है।
Surya Ko Jal Arpit karne Ke Niyam: हिंदू धर्म में सूर्य को अर्घ्य देने का बड़ा महत्व बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को यश, तेज, प्रसिद्धि, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। अब अगर आप नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाते हैं तो जीवन में सूर्य की कृपा बनी रहती है। इससे जातक की समृद्धि और प्रसिद्धि में बढ़ौतरी होती है। हालांकि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ मंत्रो का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप गलत तरीके से जल चढ़ाते हैं तो पूजा का फल नहीं मिलता है। आइए आपको इस बारे पूरी जानकारी देते हैं।
सूर्य देवे को जल चढ़ाने का सही समय क्या है?
ज्योतिषचार्य के अनुसार, सूर्य को सही समय पर अर्घ्य देना जरूरी होता है। वरना इसका कम फल मिलता है। माना जाता है कि सूर्य देव को जल अर्पित करने का सबसे सही समय सुबह 5 से 8 बजे के बीच होता है। इस दौरान सूर्य पूर्व दिशा में होते हैं और 8 बजे के बाद दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर चले जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि जब सूर्य खुद की दिशा में हो तभी सूर्य को अर्घ्य देने से ज्यादा महत्व मिलता है।
क्या है सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका
मान्यता के अनुसार सबसे पहले सुबह सूरज उगने के पहले उठना अच्छा माना जाता है। इसलिए सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद साफ कपडे पहनने चहिए। इसके बड़ा एक तांबे के लोटे में जल लेकर दोनों से हाथों से पकड़कर अपने सर के ऊपर से नीचे जल डालें। सूर्य को जल अर्पित करते समय हाथ हमेशा सर के ऊपर होने चाहिए। इस तरीके से सूर्य को जल अर्पित करना सही और शुभ माना जाता है।
सूर्य को जल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखें
सूर्य को जल करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है। जैसे कि जब जल की धारा नीचे गिरे तो एक धार में गिरनी चाहिए। यानी जल की धारा कभी भी बीच से नहीं टूटनी चाहिए। मान्यता है कि जल की एक धारा गिरने से उसकी ऊर्जा इंसान के अंदर समाहित होती है। इसके साथ हमेशा साफ स्थान पर ही सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। जल को किसी गंदे नाले या किसी गंदे स्थान पर नहीं देना चाहिए। जल को किसी पौधे, नदी या किसी ऐसे स्थान पर देना चाहिए, जहां पर पानी को धरती सोख लें।
सूर्य को जल अर्पित करते समयँम इन मंत्रों का जाप करें
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को जल अर्पित करते समय कुछ जाप करने से बहुत शुभ माना जाता है। जा सूर्य को जल अर्पित करें तो उसी स्थान पर खड़े रहकर 'ओम घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके आलावा आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप करना भी काफी शुभ माना जाता है। सूर्य को जल अर्पति करते समय इन मंत्रों का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सूर्य देव को जल अर्पित करने से लाभ
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को विधि-विधान से जल देने से काफी शुभ फल की प्राप्ति होती है। इससे सेहत अच्छी रहती है। सूर्य को प्रसिद्धि को प्रतीक माना जाता है, इसलिए जातक की प्रसिद्धि और समृद्धि बढ़ती है। सूर्य को नियम से जल अर्पित करने से कई तरह की बिमारियों का नाश होता है। इसका वैज्ञानिक कारण भी माना गया है। वैज्ञानिक कारणों के अनुसार, सुबह 5 से 8 क बीच सूर्य से निकलने वाली किरणों और ऊर्जा को काफी अच्छा माना जाता है। सूर्य की किरणों से विटामिन डी की भी कमी पूरी होती है। इसके साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी खत्म होती हैं।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका क्या है? जानें मंत्र, नियम और लाभ
धर्म डेस्क
Surya Ko Jal Arpit karne Ke Niyam: हिंदू धर्म में सूर्य को अर्घ्य देने का बड़ा महत्व बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को यश, तेज, प्रसिद्धि, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। अब अगर आप नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाते हैं तो जीवन में सूर्य की कृपा बनी रहती है। इससे जातक की समृद्धि और प्रसिद्धि में बढ़ौतरी होती है। हालांकि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ मंत्रो का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप गलत तरीके से जल चढ़ाते हैं तो पूजा का फल नहीं मिलता है। आइए आपको इस बारे पूरी जानकारी देते हैं।
सूर्य देवे को जल चढ़ाने का सही समय क्या है?
ज्योतिषचार्य के अनुसार, सूर्य को सही समय पर अर्घ्य देना जरूरी होता है। वरना इसका कम फल मिलता है। माना जाता है कि सूर्य देव को जल अर्पित करने का सबसे सही समय सुबह 5 से 8 बजे के बीच होता है। इस दौरान सूर्य पूर्व दिशा में होते हैं और 8 बजे के बाद दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर चले जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि जब सूर्य खुद की दिशा में हो तभी सूर्य को अर्घ्य देने से ज्यादा महत्व मिलता है।
क्या है सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका
मान्यता के अनुसार सबसे पहले सुबह सूरज उगने के पहले उठना अच्छा माना जाता है। इसलिए सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद साफ कपडे पहनने चहिए। इसके बड़ा एक तांबे के लोटे में जल लेकर दोनों से हाथों से पकड़कर अपने सर के ऊपर से नीचे जल डालें। सूर्य को जल अर्पित करते समय हाथ हमेशा सर के ऊपर होने चाहिए। इस तरीके से सूर्य को जल अर्पित करना सही और शुभ माना जाता है।
सूर्य को जल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखें
सूर्य को जल करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है। जैसे कि जब जल की धारा नीचे गिरे तो एक धार में गिरनी चाहिए। यानी जल की धारा कभी भी बीच से नहीं टूटनी चाहिए। मान्यता है कि जल की एक धारा गिरने से उसकी ऊर्जा इंसान के अंदर समाहित होती है। इसके साथ हमेशा साफ स्थान पर ही सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। जल को किसी गंदे नाले या किसी गंदे स्थान पर नहीं देना चाहिए। जल को किसी पौधे, नदी या किसी ऐसे स्थान पर देना चाहिए, जहां पर पानी को धरती सोख लें।
सूर्य को जल अर्पित करते समयँम इन मंत्रों का जाप करें
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को जल अर्पित करते समय कुछ जाप करने से बहुत शुभ माना जाता है। जा सूर्य को जल अर्पित करें तो उसी स्थान पर खड़े रहकर 'ओम घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके आलावा आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप करना भी काफी शुभ माना जाता है। सूर्य को जल अर्पति करते समय इन मंत्रों का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सूर्य देव को जल अर्पित करने से लाभ
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को विधि-विधान से जल देने से काफी शुभ फल की प्राप्ति होती है। इससे सेहत अच्छी रहती है। सूर्य को प्रसिद्धि को प्रतीक माना जाता है, इसलिए जातक की प्रसिद्धि और समृद्धि बढ़ती है। सूर्य को नियम से जल अर्पित करने से कई तरह की बिमारियों का नाश होता है। इसका वैज्ञानिक कारण भी माना गया है। वैज्ञानिक कारणों के अनुसार, सुबह 5 से 8 क बीच सूर्य से निकलने वाली किरणों और ऊर्जा को काफी अच्छा माना जाता है। सूर्य की किरणों से विटामिन डी की भी कमी पूरी होती है। इसके साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी खत्म होती हैं।
