रायपुर में ‘ग्रीन पालना’ पहल: बच्चे के जन्म के साथ मां को मिलेगा पौधा, पर्यावरण से जोड़ा मातृत्व

रायपुर (छ.ग.)

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जिला प्रशासन का अभिनव प्रयास, अस्पतालों में प्रसूताओं को फलदार पौधे भेंट कर दिया जा रहा हरियाली का संदेश

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। ‘ग्रीन पालना’ प्रोजेक्ट के तहत अब जिले के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के बाद प्रसूता महिलाओं को उपहार स्वरूप पौधा दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना है कि जैसे एक नवजात शिशु परिवार में नई शुरुआत का प्रतीक होता है, वैसे ही एक पौधा धरती के लिए जीवन का संकेत है।

कहां और कैसे शुरू हुई पहल

यह अभियान रायपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसे कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशन में लागू किया गया है। हाल ही में अभनपुर, बिरगांव और रायपुर के एमसीएच कालीबाड़ी अस्पताल में इस योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इन तीन स्थानों पर कुल 20 प्रसूताओं को 100 फलदार पौधे वितरित किए गए।

क्या है ‘ग्रीन पालना’ का विचार

ग्रीन पालना प्रोजेक्ट का मूल विचार मातृत्व और पर्यावरण के बीच भावनात्मक संबंध स्थापित करना है। अस्पताल प्रशासन द्वारा प्रसूताओं को पौधा सौंपते हुए यह आग्रह किया गया कि वे जैसे अपने बच्चे की देखभाल करेंगी, वैसे ही पौधे को भी पालें। यह प्रतीकात्मक पहल पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है।

कौन-कौन से पौधे दिए जा रहे

प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि वितरण में ऐसे फलदार और छायादार पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और भविष्य में पोषण व हरियाली दोनों में योगदान दे सकें। पौधों के चयन में यह भी ध्यान रखा गया है कि वे कम देखरेख में पनप सकें।

क्यों अहम है यह पहल

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हरित अभियानों को यदि भावनात्मक अवसरों से जोड़ा जाए, तो उनकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है। जन्म जैसे यादगार क्षण पर पौधा मिलने से परिवारों में उसके संरक्षण को लेकर स्वाभाविक जुड़ाव बनता है। इससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में वृक्षारोपण को स्थायी रूप मिल सकता है।

प्रशासन की आगे की योजना

जिला प्रशासन का कहना है कि ग्रीन पालना अभियान को आने वाले समय में रायपुर जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक अस्पतालों तक विस्तार दिया जाएगा। साथ ही पौधों की देखरेख को लेकर समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि यह पहल केवल प्रतीकात्मक न रह जाए।

सामाजिक संदेश और असर

अस्पतालों में मौजूद परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भी इस पहल की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज को यह भी सिखाता है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं।

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