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रायपुर में सफाई ठप होने पर निगम सख्त: रामकी कंपनी पर ₹5 लाख जुर्माना, ₹18 लाख भुगतान रोका
रायपुर (छ.ग.)
कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था, दोबारा लापरवाही पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की चेतावनी
राजधानी रायपुर में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के मामले में नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में एक दिन तक कचरा उठान ठप रहने पर नगर निगम रायपुर ने रामकी कंपनी पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है, वहीं 18 लाख रुपए की भुगतान कटौती करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराई गई तो कंपनी के साथ किया गया अनुबंध समाप्त किया जा सकता है।
कब और क्यों हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई 13 जनवरी को हुई कर्मचारियों की हड़ताल के बाद की गई है। नगर निगम की समीक्षा बैठक में सामने आया कि हड़ताल के चलते शहर के कई वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण नहीं हो सका, जिससे सार्वजनिक स्वच्छता प्रभावित हुई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए महापौर मीनल चौबे ने अधिकारियों को तत्काल दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
नगर निगम की बैठक में क्या तय हुआ
नगर निगम कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हड़ताल के कारण हुए नुकसान की भरपाई रामकी कंपनी से की जाएगी। इसके तहत एक दिन के कार्य न होने के एवज में करीब 18 लाख रुपए की कटौती कंपनी के बिल से की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। महापौर ने अपर आयुक्त को यह भी निर्देश दिए कि जब तक कार्य की गुणवत्ता से संतुष्टि न हो, तब तक भुगतान प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
दोबारा हड़ताल पर अनुबंध पर संकट
बैठक में यह भी साफ कर दिया गया कि सफाई जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महापौर ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में फिर से कर्मचारियों की हड़ताल या कार्य में लापरवाही सामने आती है, तो रामकी कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट पर पुनर्विचार किया जाएगा, यहां तक कि उसे समाप्त भी किया जा सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम प्रबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चार महीनों में दूसरी बार सफाई कर्मचारियों की हड़ताल यह दर्शाती है कि निगम की निगरानी व्यवस्था कमजोर है। तिवारी के मुताबिक, एक दिन कचरा नहीं उठने से शहर के लगभग सभी वार्डों में गंदगी फैल गई, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
पहले भी उठ चुका है वेतन का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी याद दिलाया कि दिवाली के दौरान हुई पिछली हड़ताल में कर्मचारियों ने वेतन असमानता का मुद्दा उठाया था। ड्राइवरों का वेतन बढ़ा, लेकिन हेल्परों को इसका लाभ नहीं मिला, जिससे असंतोष बना रहा। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं किया गया, जिसका असर अब दोबारा देखने को मिला।
आगे क्या
नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि अब सफाई एजेंसी की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी कंपनी को जवाबदेह बनाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि शहर की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नागरिकों के हित में कठोर फैसले लिए जाते रहेंगे।
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