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डबल इंजन सरकार से तेज हुआ मध्यप्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: 97% केंद्रीय परियोजनाएं पटरी पर
भोपाल, (म.प्र.)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले— पीएमजी और ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म से अटकी योजनाओं को मिली रफ्तार, 7.8 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी
मध्यप्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू किए गए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (PMG) और ‘प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन’ यानी प्रगति प्लेटफॉर्म ने वर्षों से अटकी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में निर्णायक भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को भोपाल में मीडिया को प्रदेश में चल रही केंद्रीय परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के माध्यम से मध्यप्रदेश को कुल 209 बड़ी विकास परियोजनाएं मिली हैं। इनमें से 2 लाख 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की 108 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 5 लाख 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 101 परियोजनाएं वर्तमान में क्रियान्वयन के चरण में हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश ने 97 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन है।
कौन-कौन से सेक्टर में हुआ बड़ा काम
डॉ. यादव के अनुसार, इन परियोजनाओं में रेलवे, सड़क परिवहन, ऊर्जा, विद्युत और नवकरणीय ऊर्जा से जुड़ी योजनाएं प्रमुख हैं। रेलवे मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन मंत्रालय की 13 और ऊर्जा क्षेत्र की कई अहम परियोजनाएं समय पर पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वन्यजीव पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दे रही हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्वास और धार जिले में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क इसके उदाहरण हैं।
प्रगति प्लेटफॉर्म से बदली कार्यसंस्कृति
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बड़ी परियोजनाएं प्रक्रियागत अड़चनों और विभागीय तालमेल की कमी के कारण वर्षों तक लंबित रहती थीं। पीएमजी और प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिए अब समस्याओं की पहचान, समीक्षा और समाधान एक ही मंच पर संभव हो पाया है। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज हुई और जवाबदेही तय हुई। उन्होंने इसे सुशासन की दिशा में बड़ा बदलाव बताया।
रेल और कनेक्टिविटी को मिली मजबूती
मुख्यमंत्री ने जबलपुर-गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 285 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संपर्क मजबूत हुआ है। इससे जबलपुर, मंडला, बालाघाट और सिवनी जैसे जिलों को नागपुर, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी मिली है। इसके अलावा 18.5 हजार करोड़ रुपये की इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना से उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ होगा।
97% समस्याओं का समाधान
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि पीएमजी पोर्टल के तहत प्रदेश में 209 परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। इनसे जुड़े 322 मुद्दों में से 312 का समाधान किया जा चुका है। वहीं प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से समीक्षा की गई 39 परियोजनाओं में सामने आए 124 मुद्दों में से 120 का निपटारा हो चुका है। भूमि अधिग्रहण और परियोजना स्वीकृति के मामलों में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर तेज और प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण पेश किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही विकास की गति दोगुनी होती है और यही मॉडल मध्यप्रदेश में दिख रहा है।
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