भारत के शहरी इलाकों में फूड डिलीवरी कल्चर अब केवल सुविधा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। मोबाइल ऐप के जरिए मिनटों में खाना मंगाने की आदत ने खान-पान के तौर-तरीकों, पारिवारिक समय और स्वास्थ्य से जुड़ी आदतों को तेजी से बदला है।
खासकर युवा प्रोफेशनल्स, छात्र और कामकाजी परिवार नियमित रूप से फूड डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुबह के नाश्ते से लेकर देर रात के खाने तक ऑनलाइन ऑर्डर अब सामान्य बात हो गई है। बड़े शहरों में सप्ताह में तीन से चार बार बाहर का खाना मंगाना आम चलन बन चुका है।
पिछले पांच से सात वर्षों में, और खासतौर पर कोविड महामारी के बाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे महानगरों में फूड डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा। घर से काम और सीमित समय ने इस आदत को और मजबूत किया।
व्यस्त दिनचर्या, लंबा ट्रैफिक, काम का दबाव और आसानी से उपलब्ध विकल्प लोगों को ऑनलाइन ऑर्डर की ओर ले जा रहे हैं। कम समय में विविध व्यंजन मिलने की सुविधा ने घर पर खाना बनाने की प्राथमिकता को पीछे छोड़ दिया है।
मोबाइल ऐप्स पर डिस्काउंट, कैशबैक और तेज डिलीवरी लोगों को बार-बार ऑर्डर करने के लिए प्रेरित कर रही है। कुछ क्लिक में खाना दरवाजे तक पहुंच जाना अब शहरी जीवनशैली का हिस्सा बन गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फूड डिलीवरी के बढ़ते चलन से तैलीय, अधिक नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है। इससे मोटापा, पाचन संबंधी समस्याएं और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। सरकारी अपडेट और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में भी खान-पान से जुड़ी जीवनशैली बीमारियों पर चिंता जताई गई है।
पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि फूड डिलीवरी पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन संतुलन जरूरी है। वहीं, कई परिवारों का कहना है कि इससे पारिवारिक भोजन और आपसी संवाद कम हुआ है। युवा वर्ग इसे समय बचाने वाला विकल्प मानता है, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता की जरूरत भी स्वीकार करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लोग हेल्दी फूड डिलीवरी विकल्पों की ओर ज्यादा ध्यान देंगे। कुछ ऐप्स पहले ही कैलोरी काउंट और हेल्दी मेनू पर जोर देने लगे हैं।
फूड डिलीवरी कल्चर ने शहरी भारत की लाइफस्टाइल को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुविधा और सेहत के बीच संतुलन बनाना अब आधुनिक जीवनशैली की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है।
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