युवाओं में मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल का बढ़ता चलन: कम सामान, सादा जीवन और खर्च में कटौती की नई सोच

लाइफस्टाइल डेस्क

On

महंगाई, मानसिक तनाव और उपभोक्तावाद से दूरी बनाकर युवा अपना रहे हैं संतुलित और जरूरत आधारित जीवनशैली

महंगे ब्रांड, दिखावटी जीवनशैली और लगातार बढ़ते खर्च के दौर में अब भारत के युवाओं के बीच मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम सामान, जरूरत के अनुसार खर्च और सादा जीवन जीने की यह सोच शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में नई पीढ़ी की पहचान बनती जा रही है। 

कॉलेज छात्र, शुरुआती करियर में काम कर रहे युवा और फ्रीलांस प्रोफेशनल्स इस ट्रेंड को सबसे ज्यादा अपना रहे हैं। ये युवा महंगे कपड़े, गैजेट्स और गैर-जरूरी सामान से दूरी बनाकर केवल आवश्यक चीजों तक खुद को सीमित रख रहे हैं।

पिछले तीन–चार वर्षों में, खासकर कोविड महामारी के बाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और जयपुर जैसे शहरों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी मिनिमलिस्ट जीवनशैली से जुड़े कंटेंट की संख्या बढ़ी है।

बढ़ती महंगाई, नौकरी की अनिश्चितता और मानसिक दबाव ने युवाओं को अपने खर्च और जीवनशैली पर दोबारा सोचने को मजबूर किया है। कई युवाओं का मानना है कि ज्यादा सामान न केवल जेब पर बोझ डालता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ाता है। इसलिए कम में संतुष्ट रहना उन्हें ज्यादा सुकून देता है।

मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अपनाने वाले युवा खरीदारी से पहले जरूरत का आकलन करते हैं, अनावश्यक सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन शॉपिंग से बचते हैं और छोटे घर या साझा आवास को प्राथमिकता देते हैं। सेकेंड हैंड सामान, लोकल उत्पाद और डिजिटल सेवाओं का सीमित उपयोग इस जीवनशैली का हिस्सा बन रहा है।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में भी उपभोक्तावाद के दुष्प्रभावों पर चर्चा बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक उपभोग पर्यावरण और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर डालता है। इसी पृष्ठभूमि में मिनिमलिस्ट सोच को टिकाऊ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि खर्च में कटौती और बचत की आदत युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती है। वहीं, समाजशास्त्रियों के अनुसार यह ट्रेंड दिखावे की संस्कृति के खिलाफ एक शांत प्रतिक्रिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल केवल व्यक्तिगत विकल्प नहीं, बल्कि शहरी जीवन की जरूरत बन सकती है। किफायती जीवन, मानसिक संतुलन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी इस सोच को और मजबूती दे सकती है।

युवाओं में बढ़ता मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल यह संकेत देता है कि नई पीढ़ी अब अधिक पाने से ज्यादा, संतुलित और अर्थपूर्ण जीवन को महत्व देने लगी है।

-----------------------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

खबरें और भी हैं

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर लाइफस्टाइल पर बहस तेज: ग्लैमर और हकीकत के बीच बढ़ता फासला

टाप न्यूज

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर लाइफस्टाइल पर बहस तेज: ग्लैमर और हकीकत के बीच बढ़ता फासला

चमकदार रील्स और परफेक्ट तस्वीरों के पीछे की वास्तविक जिंदगी को लेकर युवाओं, विशेषज्ञों और समाज में सवाल
लाइफ स्टाइल 
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर लाइफस्टाइल पर बहस तेज: ग्लैमर और हकीकत के बीच बढ़ता फासला

युवाओं में मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल का बढ़ता चलन: कम सामान, सादा जीवन और खर्च में कटौती की नई सोच

महंगाई, मानसिक तनाव और उपभोक्तावाद से दूरी बनाकर युवा अपना रहे हैं संतुलित और जरूरत आधारित जीवनशैली
लाइफ स्टाइल 
युवाओं में मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल का बढ़ता चलन: कम सामान, सादा जीवन और खर्च में कटौती की नई सोच

देसी परंपराओं की वापसी: आधुनिक लाइफस्टाइल में भारतीय मूल्यों की नई पहचान

योग, आयुर्वेद, पारंपरिक भोजन और सादगी की ओर लौटता शहरी भारत, बदलती जीवनशैली का नया संकेत
लाइफ स्टाइल 
देसी परंपराओं की वापसी: आधुनिक लाइफस्टाइल में भारतीय मूल्यों की नई पहचान

जबलपुर में अवैध चाइनीज चाकुओं का भंडाफोड़: जनरल स्टोर से 50 से ज्यादा बटनदार चाकू बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार

लगातार चाकूबाजी की घटनाओं के बीच पुलिस की सख्ती, 500 से 1000 रुपये में खुलेआम बिक रहे थे प्रतिबंधित हथियार;...
मध्य प्रदेश 
जबलपुर में अवैध चाइनीज चाकुओं का भंडाफोड़: जनरल स्टोर से 50 से ज्यादा बटनदार चाकू बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार

बिजनेस

गणतंत्र दिवस पर आज शेयर बाजार बंद: BSE-NSE में ट्रेडिंग नहीं, कमोडिटी और करेंसी मार्केट में भी अवकाश गणतंत्र दिवस पर आज शेयर बाजार बंद: BSE-NSE में ट्रेडिंग नहीं, कमोडिटी और करेंसी मार्केट में भी अवकाश
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर इक्विटी, डेरिवेटिव, MCX, करेंसी और डेट सेगमेंट में नहीं होगा कोई कारोबार, बाजार अब...
सस्ती हो सकती हैं मर्सिडीज और BMW की कारें, लेकिन टेस्ला को नहीं मिलेगा फायदा; जानिए भारत-EU डील की पूरी तस्वीर
अनिल अंबानी पर 1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश
Budget 2026: आम आदमी की जेब और जरूरतें कसौटी पर, रेलवे से यात्रियों की बड़ी उम्मीदें
USD vs INR: 92 के करीब पहुंचा रुपया, लगातार दबाव ने बढ़ाई चिंता
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.