आयरन की ज्यादा मात्रा बन सकती है जानलेवा, लिवर-दिल तक को पहुंचता है नुकसान

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बिना जांच के आयरन सप्लीमेंट लेना पड़ सकता है भारी, जानिए ओवरलोड के लक्षण और बचाव के तरीके

शरीर के सही तरीके से काम करने के लिए आयरन एक बेहद जरूरी मिनरल है। यह हीमोग्लोबिन बनाने, पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर आयरन की कमी को लेकर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि शरीर में आयरन की अधिकता भी उतनी ही खतरनाक हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में जरूरत से ज्यादा आयरन जमा हो जाए तो यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। आयरन ओवरलोड की स्थिति पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी शुरुआती समस्याओं से लेकर लिवर डैमेज और अन्य अंगों की खराबी तक का कारण बन सकती है।

आयरन ओवरलोड आमतौर पर तब होता है, जब कोई व्यक्ति बिना जांच के लंबे समय तक आयरन सप्लीमेंट लेता है या बार-बार आयरन के इंजेक्शन लगवाता है। इसके अलावा, हेमोक्रोमैटोसिस जैसी आनुवंशिक बीमारी में भी शरीर जरूरत से ज्यादा आयरन को अवशोषित करने लगता है। थैलेसीमिया के मरीजों में बार-बार खून चढ़ाने से भी आयरन शरीर में जमा होने लगता है, जो आगे चलकर कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयरन की अधिकता का असर त्वचा और हार्मोन सिस्टम पर भी पड़ता है। इस स्थिति में त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ सकता है, जिससे त्वचा का रंग भूरा या गहरा दिखाई देने लगता है। साथ ही, थायरॉयड, पिट्यूटरी और एड्रिनल जैसी हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

लिवर पर आयरन ओवरलोड का प्रभाव सबसे गंभीर माना जाता है। लिवर शरीर में आयरन को स्टोर करता है, लेकिन जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो इससे सूजन, फैटी लिवर, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर तक की स्थिति बन सकती है। लंबे समय तक आयरन नियंत्रित न रहने पर लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

पैंक्रियास में ज्यादा आयरन जमा होने से इंसुलिन बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। आयरन ओवरलोड से होने वाली इस स्थिति को ब्रॉन्ज डायबिटीज कहा जाता है। इसके अलावा, दिल की मांसपेशियों में आयरन जमा होने से कार्डियोमायोपैथी, अनियमित हार्टबीट और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयरन की कमी और आयरन की अधिकता—दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं। यदि खून में सीरम फेरिटिन और आयरन का स्तर सामान्य है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के आयरन सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह हो सकता है।

आयरन ओवरलोड से बचाव के लिए जरूरी है कि आयरन सप्लीमेंट केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही लिया जाए। समय-समय पर सीरम फेरिटिन और ट्रांसफरिन सैचुरेशन जैसे टेस्ट कराते रहें। जिन लोगों को हेमोक्रोमैटोसिस या थैलेसीमिया जैसी बीमारियां हैं, उन्हें नियमित जांच और सही इलाज की जरूरत होती है। कई मामलों में शरीर से अतिरिक्त आयरन निकालने के लिए चेलेशन थेरेपी भी दी जाती है।

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17 Dec 2025 By Nitin Trivedi

आयरन की ज्यादा मात्रा बन सकती है जानलेवा, लिवर-दिल तक को पहुंचता है नुकसान

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शरीर के सही तरीके से काम करने के लिए आयरन एक बेहद जरूरी मिनरल है। यह हीमोग्लोबिन बनाने, पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर आयरन की कमी को लेकर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि शरीर में आयरन की अधिकता भी उतनी ही खतरनाक हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में जरूरत से ज्यादा आयरन जमा हो जाए तो यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। आयरन ओवरलोड की स्थिति पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी शुरुआती समस्याओं से लेकर लिवर डैमेज और अन्य अंगों की खराबी तक का कारण बन सकती है।

आयरन ओवरलोड आमतौर पर तब होता है, जब कोई व्यक्ति बिना जांच के लंबे समय तक आयरन सप्लीमेंट लेता है या बार-बार आयरन के इंजेक्शन लगवाता है। इसके अलावा, हेमोक्रोमैटोसिस जैसी आनुवंशिक बीमारी में भी शरीर जरूरत से ज्यादा आयरन को अवशोषित करने लगता है। थैलेसीमिया के मरीजों में बार-बार खून चढ़ाने से भी आयरन शरीर में जमा होने लगता है, जो आगे चलकर कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयरन की अधिकता का असर त्वचा और हार्मोन सिस्टम पर भी पड़ता है। इस स्थिति में त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ सकता है, जिससे त्वचा का रंग भूरा या गहरा दिखाई देने लगता है। साथ ही, थायरॉयड, पिट्यूटरी और एड्रिनल जैसी हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

लिवर पर आयरन ओवरलोड का प्रभाव सबसे गंभीर माना जाता है। लिवर शरीर में आयरन को स्टोर करता है, लेकिन जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो इससे सूजन, फैटी लिवर, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर तक की स्थिति बन सकती है। लंबे समय तक आयरन नियंत्रित न रहने पर लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

पैंक्रियास में ज्यादा आयरन जमा होने से इंसुलिन बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। आयरन ओवरलोड से होने वाली इस स्थिति को ब्रॉन्ज डायबिटीज कहा जाता है। इसके अलावा, दिल की मांसपेशियों में आयरन जमा होने से कार्डियोमायोपैथी, अनियमित हार्टबीट और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयरन की कमी और आयरन की अधिकता—दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं। यदि खून में सीरम फेरिटिन और आयरन का स्तर सामान्य है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के आयरन सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह हो सकता है।

आयरन ओवरलोड से बचाव के लिए जरूरी है कि आयरन सप्लीमेंट केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही लिया जाए। समय-समय पर सीरम फेरिटिन और ट्रांसफरिन सैचुरेशन जैसे टेस्ट कराते रहें। जिन लोगों को हेमोक्रोमैटोसिस या थैलेसीमिया जैसी बीमारियां हैं, उन्हें नियमित जांच और सही इलाज की जरूरत होती है। कई मामलों में शरीर से अतिरिक्त आयरन निकालने के लिए चेलेशन थेरेपी भी दी जाती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/excessive-amount-of-iron-can-be-fatal-and-can-cause/article-40208

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