मुंबई। डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में घाटे से उबरते हुए 225 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को 208 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। यह बदलाव कंपनी के लिए एक अहम वित्तीय मोड़ माना जा रहा है।
कंपनी का रेवेन्यू भी मजबूत रहा। सालाना आधार पर इसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 2,194 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 1,828 करोड़ रुपए था। पेटीएम ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि पेमेंट बिजनेस और फाइनेंशियल सर्विसेज के विस्तार से ऑपरेशनल इनकम में यह सुधार देखने को मिला।
हालांकि, इतने मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में पेटीएम के शेयरों पर दबाव दिखा। कल कंपनी का शेयर 3.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,130 रुपए पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत में ही शेयर लाल निशान पर खुला और एक समय यह करीब 5 प्रतिशत तक नीचे चला गया।
बीते पांच कारोबारी सत्रों में पेटीएम का शेयर 13.30 प्रतिशत गिर चुका है। साल 2026 में अब तक इसमें करीब 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं पिछले एक महीने में शेयर 13 प्रतिशत टूटा है। इसके उलट, छह महीने में इसने 6 प्रतिशत और एक साल में 46 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप करीब 72.53 हजार करोड़ रुपए है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर में गिरावट की मुख्य वजह मुनाफा वसूली रही। हाल के दिनों में शेयर में आई तेजी के बाद निवेशकों ने लाभ बुक करना बेहतर समझा। इसके अलावा, बाजार को उम्मीद थी कि कंपनी इस तिमाही में ब्रेक-ईवन के और करीब पहुंचेगी, लेकिन कुछ सेगमेंट में दबाव बने रहने से निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
कंपनी के प्लेटफॉर्म यूसेज में लगातार बढ़ोतरी राहत की बड़ी वजह रही है। पेटीएम के जरिए होने वाले कुल ट्रांजैक्शन की वैल्यू यानी ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है। मर्चेंट सब्सक्रिप्शन की संख्या भी 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। कंपनी का फोकस साउंडबॉक्स और कार्ड मशीन जैसे डिवाइसेज से रेवेन्यू बढ़ाने पर है।
हालांकि, RBI की सख्ती के बाद लोन डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी अब क्वालिटी लोन, खासकर पर्सनल और मर्चेंट लोन पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
एनालिस्ट्स की राय को देखें तो पेटीएम को लेकर तस्वीर मिश्रित है। कुछ ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने रेवेन्यू ग्रोथ की सराहना की है, जबकि रेगुलेटरी जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनी आने वाली तिमाहियों में घाटा और घटाने में सफल रहती है, तो शेयर में फिर मजबूती लौट सकती है।
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