रिश्तों में स्पेस क्यों जरूरी होता है: समझ, भरोसा और संतुलन से मजबूत होते हैं रिश्ते

लाइफस्टाइल डेस्क

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तेज़ रफ्तार ज़िंदगी और बढ़ती अपेक्षाओं के बीच रिश्तों में ‘स्पेस’ की कमी बन रही है तनाव की बड़ी वजह, जानिए क्यों ज़रूरी है एक-दूसरे को थोड़ा वक्त और आज़ादी देना

आज की ताज़ा लाइफस्टाइल ख़बरों में रिश्तों से जुड़ा एक अहम सवाल लगातार चर्चा में है—क्या रिश्तों में हर वक्त साथ रहना ज़रूरी है, या फिर थोड़ी दूरी ही रिश्ते को मजबूत बनाती है? बदलती सामाजिक संरचना, वर्क-लाइफ प्रेशर और डिजिटल निर्भरता के दौर में विशेषज्ञ मानते हैं कि रिश्तों में “स्पेस” अब विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुका है।

रिलेशनशिप काउंसलर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कपल्स और पारिवारिक रिश्तों में स्पेस का मतलब दूरी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्मसम्मान है। जब एक व्यक्ति को अपने विचार, दोस्त, रुचियां और समय मिलता है, तो वह रिश्ते में बेहतर योगदान दे पाता है।

यह ट्रेंड खासतौर पर शहरी भारत में तेज़ी से उभर रहा है, जहां युवा कपल्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स रिश्तों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालिया लाइफस्टाइल सर्वे बताते हैं कि रिश्तों में तनाव और ब्रेकअप की बड़ी वजह ‘ओवर-डिपेंडेंसी’ बनती जा रही है।

क्यों जरूरी है स्पेस
विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की एक अलग पहचान होती है। जब रिश्तों में लगातार निगरानी, शक या भावनात्मक दबाव बढ़ता है, तो वह रिश्ता बोझ बन सकता है। स्पेस मिलने से व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और आपसी भरोसा मजबूत होता है। यही भरोसा रिश्ते की असली नींव होता है।

कैसे असर डालता है रिश्तों पर
स्पेस का मतलब यह नहीं कि बातचीत कम हो जाए, बल्कि संवाद और समझ बेहतर हो। जब पार्टनर या परिवार का सदस्य बिना डर अपनी बात कह पाता है, तो टकराव कम होते हैं। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि जो रिश्ते स्पेस का सम्मान करते हैं, उनमें झगड़े कम और समाधान जल्दी निकलते हैं।

डिजिटल दौर की चुनौती
सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ने रिश्तों को जोड़ा जरूर है, लेकिन हर पल जुड़े रहने की अपेक्षा भी बढ़ा दी है। ‘ऑनलाइन कंट्रोल’ और तुरंत जवाब न मिलने पर नाराज़गी रिश्तों में दरार डाल रही है। ऐसे में डिजिटल स्पेस भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।

लाइफस्टाइल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में रिश्तों की परिभाषा और बदलेगी। साथ रहना जरूरी होगा, लेकिन एक-दूसरे को खुद के लिए वक्त देना भी उतना ही अहम रहेगा। संतुलन, भरोसा और सम्मान ही रिश्तों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाएंगे।

रिश्तों में स्पेस देना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है। यही स्पेस रिश्ते को सांस लेने की जगह देता है और उसे और मजबूत बनाता है।

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