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जीवन मंत्र: मदर टेरेसा की शिक्षाओं से सीखें निस्वार्थ जीवन और सेवा का महत्व
जीवन के मंत्र
मदर टेरेसा का जीवन मंत्र यह है कि सच्चा उद्देश्य दूसरों की सेवा करना है। चाहे वह गरीबों को खाना खिलाना हो, बीमार की देखभाल हो या केवल एक मुस्कान देना हो — हर छोटा कार्य प्रेम और करुणा से किया जाए, तो यह महान बन जाता है। उनके विचार हमें यह सिखाते हैं कि जीवन का असली मूल्य दूसरों की भलाई और सेवा में निहित है।
मदर टेरेसा ने अपने पूरे जीवन में हमें यह सिखाया कि सच्ची महानता बड़े शब्दों या भव्य कार्यों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कार्यों में प्रेम और करुणा के साथ सेवा करने में निहित है। उनके विचार आज भी हमारे जीवन का मार्गदर्शन कर सकते हैं। उनके जीवन और शिक्षाओं से कुछ महत्वपूर्ण जीवन मंत्र हम सभी अपनाकर अपने जीवन को अर्थपूर्ण बना सकते हैं।
1. प्यार और करुणा का कार्य
मदर टेरेसा का मानना था कि प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है। उनका कथन, “प्यार की भूख रोटी की भूख से कहीं बड़ी है”, हमें याद दिलाता है कि किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी आवश्यकता केवल भौतिक वस्तुएँ नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान और स्नेह है। मुस्कान, सहयोग और सहानुभूति जैसे छोटे-छोटे कार्य भी किसी की दुनिया बदल सकते हैं। उनका विचार था कि “शांति की शुरुआत मुस्कुराहट से होती है” और हर व्यक्ति प्यार का हकदार है।
2. निस्वार्थ सेवा
मदर टेरेसा ने निस्वार्थ सेवा को जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बताया। उनका संदेश सरल है: “छोटे कार्यों को प्यार से करो। अगर आप सौ लोगों को नहीं खिला सकते तो कम से कम एक को खिलाएं।” इसका मतलब है कि सेवा का स्तर महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हमारे कार्यों में प्रेम और समर्पण होना जरूरी है। हर छोटा प्रयास समाज में बदलाव ला सकता है।
3. ईश्वर के हाथ में कलम
मदर टेरेसा ने अपने जीवन को एक धर्म और आत्मिक मिशन के रूप में देखा। उनका उदाहरण, “मैं ईश्वर के हाथों में एक छोटी सी पेंसिल हूँ, जो दुनिया को एक प्रेम पत्र लिख रही है”, हमें सिखाता है कि हम सभी ईश्वर के माध्यम से अपने छोटे कार्यों के ज़रिये दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। जीवन का अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए किए गए प्रेमपूर्ण कार्यों में है।
4. गरीबी का सामना
मदर टेरेसा ने गरीबी और दुख को केवल नकारात्मक घटना के रूप में नहीं देखा। उन्होंने सिखाया कि दुख में भी इंसानियत और करुणा की शक्ति खोजी जा सकती है। उनका कथन, “अवांछित, दुखी, अप्राप्य, सभी द्वारा भुला दिया गया…”, यह याद दिलाता है कि किसी के कष्ट को हल्का न आंकें; छोटे सहयोग और सहानुभूति से किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है।
5. व्यक्तिगत कार्रवाई
मदर टेरेसा ने हमें बताया कि बदलाव का इंतजार मत करें, उसे स्वयं शुरू करें। उनका जीवन संदेश था, “नेताओं का इंतजार न करें; इसे अकेले करें, व्यक्ति से व्यक्ति।” हर व्यक्ति अपने छोटे प्रयास से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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