रतलाम में आधी रात को टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापना: ग्राम सभा के फैसले पर प्रशासनिक आपत्ति, विधायक डोडियार आमने-सामने

रतलाम (म.प्र.)

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PESA कानून को लेकर सैलाना में टकराव, विधायक का आरोप—प्रशासन ने आदिवासी अधिकारों में दखल दिया

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना विधानसभा क्षेत्र में सोमवार देर रात एक विवादित घटनाक्रम सामने आया, जब राजापुरा गांव में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी टंट्या मामा भील की प्रतिमा आधी रात को स्थापित कर दी गई। इस कार्रवाई का नेतृत्व स्थानीय विधायक कमलेश्वर डोडियार ने किया। मामला ग्राम सभा के अधिकारों, प्रशासनिक अनुमति और पेसा (PESA) कानून की व्याख्या को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है।

जब बाजना अंचल के राजापुरा माताजी गांव की ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से गांव में टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। सोमवार को ग्रामीण इस प्रस्ताव और अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ सैलाना एसडीएम कार्यालय पहुंचे। विधायक और ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम ने प्रस्ताव को पेसा नियम 2022 के अनुरूप नहीं मानते हुए अमान्य कर दिया और अन्य विभागों से अनुमति लेने की बात कही।

प्रशासनिक निर्णय से नाराज़ ग्रामीणों ने विधायक कमलेश्वर डोडियार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विधायक स्वयं ग्रामीणों के साथ राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा पहुंचे और वहां से प्रतिमा लेकर लौटे। सोमवार देर रात करीब 2:30 बजे राजापुरा गांव में प्रतिमा स्थापित कर दी गई।

विधायक डोडियार ने कहा कि प्रतिमा रात में इसलिए स्थापित की गई क्योंकि ग्रामीणों में भय का माहौल था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था। डोडियार ने कहा, “अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा सर्वोच्च है। पेसा कानून हमें यह अधिकार देता है कि हम अपने नायकों को सम्मान दें। किसी भी प्रशासनिक दबाव से हम पीछे नहीं हटेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल एक मूर्ति का नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों का है। विधायक ने 25 जनवरी को प्रतिमा के औपचारिक अनावरण और जनजागरण कार्यक्रम की घोषणा की है।

दूसरी ओर, सैलाना एसडीएम तरुण जैन ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल नियमों की जानकारी दी थी। एसडीएम के अनुसार, सार्वजनिक भूमि पर प्रतिमा स्थापित करने के लिए नजूल भूमि नियमों और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है।

यह घटनाक्रम अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकारों की सीमा को लेकर बहस का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला पेसा कानून की व्याख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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