जिले में धान खरीदी व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। किसानों से अवैध वसूली और तय मानक से अधिक धान लेने की पुष्टि होने पर घुटकू और गतौरा धान खरीदी केंद्रों के दो फड़ प्रभारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही दोनों समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर की गई है।
मामला तब सामने आया, जब किसानों ने शिकायत की कि धान तौल के दौरान उनसे निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है। शासन द्वारा प्रति बोरी 40 किलो 700 ग्राम धान लेने का स्पष्ट नियम तय है, लेकिन इन केंद्रों पर प्रति बोरी 2 से 3 किलो अतिरिक्त धान लिया जा रहा था। इसके अलावा तौल प्रक्रिया में लगे हमालों के जरिए प्रति बोरी 5 से 6 रुपए की अतिरिक्त वसूली भी की जा रही थी।
प्रशासनिक जांच में शिकायतें सही पाई गईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मस्तूरी विकासखंड की गतौरा समिति में फड़ प्रभारी लव कुमार यादव, बारदाना प्रभारी शैलेश राठौर और कंप्यूटर ऑपरेटर हुलेश्वर धीरही की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके साथ ही समिति के प्राधिकृत अधिकारी राजेंद्र राठौर को भी पद से हटा दिया गया है।
वहीं, घुटकू धान खरीदी केंद्र में फड़ एवं बारदाना प्रभारी मुकेश कुमार लोनिया और प्राधिकृत अधिकारी दुर्गेश रजक द्वारा आपसी साठगांठ कर किसानों के शेष बचे रकबे में अवैध रूप से धान खपाने का मामला उजागर हुआ। इस पर मुकेश कुमार लोनिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि दुर्गेश रजक को प्राधिकृत अधिकारी के पद से हटा दिया गया है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी केंद्रों में किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता या शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी केंद्रों पर तौल और भुगतान की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए और किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
गौरतलब है कि यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी एरमशाही धान खरीदी केंद्र में अनियमितता पाए जाने पर संस्था प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। वहीं गुमा, चपोरा, पिपरतराई, देवरी और पौड़ी (करनकापा) जैसे केंद्रों पर कर्मचारियों को निलंबित किया गया था।
लगातार हो रही प्रशासनिक सख्ती के बावजूद कुछ केंद्रों पर गड़बड़ियां सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि आगे भी शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। किसानों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या अनियमितता की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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