फ्रांस में भीषण हीटवेव से 1000 लोगों की मौत, यूरोप झुलसा

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16 देशों में रिकॉर्डतोड़ तापमान, सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की लहर से जूझ रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फ्रांस में हाल ही में आई हीटवेव के दौरान करीब 1,000 अतिरिक्त मौतों की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ गई है। फ्रांस की हेल्थ एजेंसी के अनुसार ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह “अतिरिक्त मौतें” हैं, यानी सामान्य औसत से करीब 1,000 अधिक लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग लोग रहे हैं और करीब 85 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र अधिक पाई गई है। अधिकतर मौतें घरों के भीतर ही हुई हैं, जहां गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। पेरिस और आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और कई घरों में कूलिंग सिस्टम न होने के कारण लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। लोग पंखे और एयर कंडीशनर खरीदने के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े, जिससे कई जगह स्टॉक खत्म हो गया। प्रशासन ने लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलने की सलाह दी है और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है।

फ्रांस के अलावा पूरे यूरोप में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और चेक रिपब्लिक समेत कुल 16 देशों में तापमान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कहीं सड़कें पिघलने लगी हैं तो कहीं रेल पटरियां गर्म होकर मुड़ने के कारण ट्रेनों की रफ्तार सीमित करनी पड़ी है। कई देशों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग तटीय इलाकों और ठंडे क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। ब्रिटेन में स्थिति बेहद असामान्य मानी जा रही है, जहां लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36 डिग्री से अधिक पहुंच गया है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीज तेजी से बढ़े हैं। कई शहरों में 1000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है क्योंकि कक्षाओं का तापमान असहनीय हो गया है। वहीं जर्मनी में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। स्पेन में स्थिति और भी गंभीर है, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। यहां भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है। दमकल विभाग लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है। इटली में 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है और सरकार ने लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है। पो नदी का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है, जिससे खेती और पेयजल पर संकट गहराने लगा है।

डेनमार्क जैसे ठंडे देश में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो वहां के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। चेक रिपब्लिक में भी तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा बढ़ गया है। यूरोप की यह हीटवेव केवल असामान्य मौसम नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप का तापमान वैश्विक औसत से तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक बार देखने को मिल सकती हैं। गर्मी की यह लहर न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कृषि पर भी गंभीर असर डाल रही है।पूरे यूरोप में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकारें लगातार नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रही हैं। 

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29 Jun 2026 By Vaishnavi.J

फ्रांस में भीषण हीटवेव से 1000 लोगों की मौत, यूरोप झुलसा

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यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की लहर से जूझ रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फ्रांस में हाल ही में आई हीटवेव के दौरान करीब 1,000 अतिरिक्त मौतों की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ गई है। फ्रांस की हेल्थ एजेंसी के अनुसार ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह “अतिरिक्त मौतें” हैं, यानी सामान्य औसत से करीब 1,000 अधिक लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग लोग रहे हैं और करीब 85 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र अधिक पाई गई है। अधिकतर मौतें घरों के भीतर ही हुई हैं, जहां गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। पेरिस और आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और कई घरों में कूलिंग सिस्टम न होने के कारण लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। लोग पंखे और एयर कंडीशनर खरीदने के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े, जिससे कई जगह स्टॉक खत्म हो गया। प्रशासन ने लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलने की सलाह दी है और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है।

फ्रांस के अलावा पूरे यूरोप में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और चेक रिपब्लिक समेत कुल 16 देशों में तापमान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कहीं सड़कें पिघलने लगी हैं तो कहीं रेल पटरियां गर्म होकर मुड़ने के कारण ट्रेनों की रफ्तार सीमित करनी पड़ी है। कई देशों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग तटीय इलाकों और ठंडे क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। ब्रिटेन में स्थिति बेहद असामान्य मानी जा रही है, जहां लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36 डिग्री से अधिक पहुंच गया है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीज तेजी से बढ़े हैं। कई शहरों में 1000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है क्योंकि कक्षाओं का तापमान असहनीय हो गया है। वहीं जर्मनी में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। स्पेन में स्थिति और भी गंभीर है, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। यहां भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है। दमकल विभाग लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है। इटली में 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है और सरकार ने लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है। पो नदी का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है, जिससे खेती और पेयजल पर संकट गहराने लगा है।

डेनमार्क जैसे ठंडे देश में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो वहां के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। चेक रिपब्लिक में भी तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा बढ़ गया है। यूरोप की यह हीटवेव केवल असामान्य मौसम नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप का तापमान वैश्विक औसत से तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक बार देखने को मिल सकती हैं। गर्मी की यह लहर न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कृषि पर भी गंभीर असर डाल रही है।पूरे यूरोप में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकारें लगातार नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रही हैं। 

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