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Persistent Systems के शेयर 8% गिरे, Nagarro डील से मचा बाजार में हड़कंप
बिजनेस डेस्क
जर्मन कंपनी Nagarro SE के 1.4 अरब यूरो अधिग्रहण के ऐलान के बाद ब्रोकरेज हुए बंटे, मिडकैप इंडेक्स में सबसे बड़ा नुकसान
Persistent Systems के शेयरों में सोमवार, 29 जून को अचानक तेज गिरावट देखने को मिली जब कंपनी के जर्मनी स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के अधिग्रहण की घोषणा ने बाजार में हलचल मचा दी। शुरुआती कारोबार में ही स्टॉक करीब 8.2 प्रतिशत तक टूट गया और यह BSE मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर बन गया। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 4,445 रुपये तक फिसल गया, जिससे निवेशकों में अचानक घबराहट का माहौल बन गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने 1.4 अरब यूरो की बड़ी डील के तहत Nagarro SE के अधिग्रहण की योजना का ऐलान किया। यह डील Persistent Systems की सहायक कंपनी Galaxy Germany Holding के जरिए की जा रही है, जिसमें Nagarro के सभी बचे हुए शेयरों को 81 यूरो प्रति शेयर नकद में खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि यह ऑफर कंपनी के 25 जून के अनडिस्टर्ब्ड क्लोजिंग प्राइस पर लगभग 140 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही।
कुछ ब्रोकरेज इसे Persistent के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जिससे कंपनी की ग्लोबल डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ कुछ विश्लेषक इस डील को महंगा और जोखिम भरा बता रहे हैं, खासकर तब जब कंपनी पर पहले से ही ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर बना हुआ है। शुरुआती प्रतिक्रिया में निवेशकों ने इस सौदे को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी विदेशी अधिग्रहण डील के चलते कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर निकट भविष्य में शेयर प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है। कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि यह डील भले ही रणनीतिक रूप से सही दिशा में हो, लेकिन इसकी कीमत और इंटीग्रेशन रिस्क निवेशकों को परेशान कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में भी Persistent Systems का प्रदर्शन कमजोर रहा है। स्टॉक पहले ही करीब 26.3 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में ताजा गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी अधिग्रहणों में अक्सर इंटीग्रेशन, कल्चर और ऑपरेशनल चुनौतियां सामने आती हैं, और यही वजह है कि कई निवेशक इस डील को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक यह स्पष्ट किया गया है कि यह अधिग्रहण उनके ग्लोबल विस्तार और क्लाइंट बेस बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
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Persistent Systems के शेयर 8% गिरे, Nagarro डील से मचा बाजार में हड़कंप
बिजनेस डेस्क
Persistent Systems के शेयरों में सोमवार, 29 जून को अचानक तेज गिरावट देखने को मिली जब कंपनी के जर्मनी स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के अधिग्रहण की घोषणा ने बाजार में हलचल मचा दी। शुरुआती कारोबार में ही स्टॉक करीब 8.2 प्रतिशत तक टूट गया और यह BSE मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर बन गया। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 4,445 रुपये तक फिसल गया, जिससे निवेशकों में अचानक घबराहट का माहौल बन गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने 1.4 अरब यूरो की बड़ी डील के तहत Nagarro SE के अधिग्रहण की योजना का ऐलान किया। यह डील Persistent Systems की सहायक कंपनी Galaxy Germany Holding के जरिए की जा रही है, जिसमें Nagarro के सभी बचे हुए शेयरों को 81 यूरो प्रति शेयर नकद में खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि यह ऑफर कंपनी के 25 जून के अनडिस्टर्ब्ड क्लोजिंग प्राइस पर लगभग 140 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही।
कुछ ब्रोकरेज इसे Persistent के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जिससे कंपनी की ग्लोबल डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ कुछ विश्लेषक इस डील को महंगा और जोखिम भरा बता रहे हैं, खासकर तब जब कंपनी पर पहले से ही ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर बना हुआ है। शुरुआती प्रतिक्रिया में निवेशकों ने इस सौदे को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी विदेशी अधिग्रहण डील के चलते कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर निकट भविष्य में शेयर प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है। कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि यह डील भले ही रणनीतिक रूप से सही दिशा में हो, लेकिन इसकी कीमत और इंटीग्रेशन रिस्क निवेशकों को परेशान कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में भी Persistent Systems का प्रदर्शन कमजोर रहा है। स्टॉक पहले ही करीब 26.3 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में ताजा गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी अधिग्रहणों में अक्सर इंटीग्रेशन, कल्चर और ऑपरेशनल चुनौतियां सामने आती हैं, और यही वजह है कि कई निवेशक इस डील को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक यह स्पष्ट किया गया है कि यह अधिग्रहण उनके ग्लोबल विस्तार और क्लाइंट बेस बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
