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उत्तर भारत में गर्मी का सितम, पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अलर्ट
Digital Desk
पूर्वोत्तर में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, उत्तर-पश्चिम भारत को प्री-मानसून बौछारों का इंतज़ार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए ताजा अखिल भारतीय मौसम पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के दो बेहद अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य इस समय भीषण गर्मी और उमस की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में मानसून के सक्रिय होने से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। अगले 2 से 3 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति में तेजी दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अब पूरी तरह से अनुकूल होती जा रही हैं। अगले 48 से 72 घंटों के दौरान मानसून के उत्तरी अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के शेष भागों, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कुछ इलाकों में प्रवेश करने की प्रबल संभावना है। इसके बाद के दो-तीन दिनों में मानसून के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अतिरिक्त क्षेत्रों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ने की उम्मीद है। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों (NCR) में मानसून के आगमन में लगभग एक सप्ताह की देरी दर्ज की जा रही है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून जून के अंत तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके जुलाई के शुरुआती दिनों में दस्तक देने की संभावना जताई गई है। इस देरी का मुख्य कारण पाकिस्तान की ओर से आने वाली सूखी पछुआ हवाएं हैं, जो क्षेत्र में तापमान को बनाए हुए हैं, जबकि अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं नमी बढ़ा रही हैं, जिससे उमस भरी गर्मी का अहसास ज्यादा हो रहा है। मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बुलेटिन के मुताबिक, इन क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश (7 से 20 सेमी) होने की आशंका है। विशेष रूप से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कुछ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और मुस्तैद रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। बिहार और झारखंड में कुछ स्थानों पर वज्रपात (बिजली गिरने) की घटनाओं को लेकर भी लोगों को सचेत किया गया है।
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आज और कल (29 जून तक) भीषण लू (Heat Wave) की स्थिति बनी रहेगी। कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जिसके कारण रातें भी बेहद गर्म हो रही हैं। दिल्ली में भी न्यूनतम तापमान लगभग 31.1 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 3 डिग्री से भी ज्यादा है। मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए कहा है कि 30 जून से उत्तर-पश्चिम भारत के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट देखी जाएगी। जुलाई की शुरुआत के साथ ही ठंडी हवाएं और प्री-मानसून बौछारें उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को सराबोर करेंगी, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी और लोगों को इस साल की भीषणतम गर्मी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है। कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक, केरल और कोंकण-गोवा क्षेत्र में मानसून पहले से ही सक्रिय है और वहां आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों के मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए उन्हें समुद्र में न उतरने की सलाह दी है क्योंकि तेज हवाओं के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारियों और 'दामिनी' जैसी ऐप्स के माध्यम से आकाशीय बिजली की चेतावनियों पर नजर रखें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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उत्तर भारत में गर्मी का सितम, पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अलर्ट
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए ताजा अखिल भारतीय मौसम पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के दो बेहद अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य इस समय भीषण गर्मी और उमस की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में मानसून के सक्रिय होने से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। अगले 2 से 3 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति में तेजी दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अब पूरी तरह से अनुकूल होती जा रही हैं। अगले 48 से 72 घंटों के दौरान मानसून के उत्तरी अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के शेष भागों, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कुछ इलाकों में प्रवेश करने की प्रबल संभावना है। इसके बाद के दो-तीन दिनों में मानसून के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अतिरिक्त क्षेत्रों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ने की उम्मीद है। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों (NCR) में मानसून के आगमन में लगभग एक सप्ताह की देरी दर्ज की जा रही है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून जून के अंत तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके जुलाई के शुरुआती दिनों में दस्तक देने की संभावना जताई गई है। इस देरी का मुख्य कारण पाकिस्तान की ओर से आने वाली सूखी पछुआ हवाएं हैं, जो क्षेत्र में तापमान को बनाए हुए हैं, जबकि अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं नमी बढ़ा रही हैं, जिससे उमस भरी गर्मी का अहसास ज्यादा हो रहा है। मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बुलेटिन के मुताबिक, इन क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश (7 से 20 सेमी) होने की आशंका है। विशेष रूप से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कुछ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और मुस्तैद रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। बिहार और झारखंड में कुछ स्थानों पर वज्रपात (बिजली गिरने) की घटनाओं को लेकर भी लोगों को सचेत किया गया है।
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आज और कल (29 जून तक) भीषण लू (Heat Wave) की स्थिति बनी रहेगी। कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जिसके कारण रातें भी बेहद गर्म हो रही हैं। दिल्ली में भी न्यूनतम तापमान लगभग 31.1 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 3 डिग्री से भी ज्यादा है। मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए कहा है कि 30 जून से उत्तर-पश्चिम भारत के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट देखी जाएगी। जुलाई की शुरुआत के साथ ही ठंडी हवाएं और प्री-मानसून बौछारें उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को सराबोर करेंगी, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी और लोगों को इस साल की भीषणतम गर्मी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है। कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक, केरल और कोंकण-गोवा क्षेत्र में मानसून पहले से ही सक्रिय है और वहां आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों के मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए उन्हें समुद्र में न उतरने की सलाह दी है क्योंकि तेज हवाओं के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारियों और 'दामिनी' जैसी ऐप्स के माध्यम से आकाशीय बिजली की चेतावनियों पर नजर रखें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
