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आयरलैंड ने रचा इतिहास, भारत को 2-0 से हराकर पहली बार जीती टी-20 सीरीज
स्पोर्ट्स डेस्क
बेलफास्ट में दूसरा मुकाबला 1 रन से जीता, तीन साल बाद टी-20 सीरीज हारी टीम इंडिया, टॉप ऑर्डर और फील्डिंग बनी हार की वजह
भारत की टी-20 टीम को बेलफास्ट में बड़ा झटका लगा है। आयरलैंड ने दूसरे टी-20 मुकाबले में एक रन से रोमांचक जीत दर्ज करते हुए दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। इसके साथ ही आयरलैंड ने पहली बार मौजूदा विश्व चैंपियन भारत को किसी द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में हराकर इतिहास रच दिया। भारतीय टीम के लिए यह हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले तीन वर्षों में पहली बार उसे किसी टी-20 सीरीज में शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2023 में वेस्टइंडीज ने भारत को 3-2 से हराया था। दूसरे मुकाबले में आयरलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 154 रन बनाए। टीम की ओर से हैरी टेक्टर ने सबसे अहम पारी खेलते हुए 53 रन बनाए। उन्होंने मध्यक्रम में जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। भारत की ओर से इस मुकाबले में डेब्यू कर रहे तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने शानदार प्रदर्शन किया और तीन विकेट अपने नाम किए। उनके अलावा भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन बीच के ओवरों में कुछ अहम मौके गंवाने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। 155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत एक बार फिर बेहद खराब रही। संजू सैमसन बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए, जबकि अभिषेक शर्मा भी शून्य पर आउट हो गए। कप्तान श्रेयस अय्यर केवल 10 रन ही बना सके। शुरुआती झटकों के बाद तिलक वर्मा ने टीम को संभालने की कोशिश की और 55 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली। उन्होंने अंत तक मैच को भारत की ओर मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन दूसरे बल्लेबाजों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अंतिम ओवर तक मुकाबला बेहद रोमांचक बना रहा, लेकिन भारतीय टीम 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी और एक रन से मुकाबला हार गई।
आयरलैंड की ओर से जय मूंदड़ा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट हासिल किए। उन्होंने दबाव के समय भारत के महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को आउट कर मैच का रुख बदल दिया। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लगातार दूसरे मुकाबले में भी अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा भी रही। इस सीरीज में भारत की हार के पीछे दो बड़ी वजहें साफ दिखाई दीं। पहली वजह रही टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी। पहले मुकाबले में भी संजू सैमसन, ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर जल्दी आउट हो गए थे। दूसरे मुकाबले में भी यही कहानी दोहराई गई। शुरुआती बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और हर बार मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव आ गया। अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में लगातार शुरुआती विकेट गिरने के बाद वापसी करना आसान नहीं होता और भारत इसी कमजोरी से बाहर नहीं निकल सका।
दूसरी बड़ी वजह रही भारतीय टीम की खराब फील्डिंग। दोनों मुकाबलों में खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़ दिए। पहले मैच में मिले जीवनदान का आयरलैंड के बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया था। दूसरे मुकाबले में भी रॉस अडायर और हैरी टेक्टर के कैच छूटे, जिसके बाद दोनों बल्लेबाजों ने महत्वपूर्ण रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। एक मौका ऐसा भी आया जब बाउंड्री पर कैच छूटने के साथ गेंद छक्के के लिए चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे मौके ही मैच का परिणाम तय करते हैं और इस सीरीज में भारत ने वही मौके गंवाए। भारतीय गेंदबाजी में कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले। डेब्यू मैच खेल रहे प्रिंस यादव ने तीन विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हालांकि बल्लेबाजी और फील्डिंग में मिली निराशा के कारण उनका प्रदर्शन टीम को जीत नहीं दिला सका। दूसरी ओर आयरलैंड ने हर विभाग में अनुशासित खेल दिखाया। बल्लेबाजी में जिम्मेदारी, गेंदबाजी में सटीक लाइन-लेंथ और फील्डिंग में चुस्ती ने टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस सीरीज की जीत आयरलैंड क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विश्व चैंपियन भारत जैसी मजबूत टीम को लगातार दो मुकाबलों में हराना उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा। वहीं भारतीय टीम के लिए यह हार भविष्य की तैयारियों के लिहाज से एक बड़ा सबक है।
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आयरलैंड ने रचा इतिहास, भारत को 2-0 से हराकर पहली बार जीती टी-20 सीरीज
स्पोर्ट्स डेस्क
भारत की टी-20 टीम को बेलफास्ट में बड़ा झटका लगा है। आयरलैंड ने दूसरे टी-20 मुकाबले में एक रन से रोमांचक जीत दर्ज करते हुए दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। इसके साथ ही आयरलैंड ने पहली बार मौजूदा विश्व चैंपियन भारत को किसी द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में हराकर इतिहास रच दिया। भारतीय टीम के लिए यह हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले तीन वर्षों में पहली बार उसे किसी टी-20 सीरीज में शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2023 में वेस्टइंडीज ने भारत को 3-2 से हराया था। दूसरे मुकाबले में आयरलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 154 रन बनाए। टीम की ओर से हैरी टेक्टर ने सबसे अहम पारी खेलते हुए 53 रन बनाए। उन्होंने मध्यक्रम में जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। भारत की ओर से इस मुकाबले में डेब्यू कर रहे तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने शानदार प्रदर्शन किया और तीन विकेट अपने नाम किए। उनके अलावा भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन बीच के ओवरों में कुछ अहम मौके गंवाने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। 155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत एक बार फिर बेहद खराब रही। संजू सैमसन बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए, जबकि अभिषेक शर्मा भी शून्य पर आउट हो गए। कप्तान श्रेयस अय्यर केवल 10 रन ही बना सके। शुरुआती झटकों के बाद तिलक वर्मा ने टीम को संभालने की कोशिश की और 55 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली। उन्होंने अंत तक मैच को भारत की ओर मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन दूसरे बल्लेबाजों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अंतिम ओवर तक मुकाबला बेहद रोमांचक बना रहा, लेकिन भारतीय टीम 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी और एक रन से मुकाबला हार गई।
आयरलैंड की ओर से जय मूंदड़ा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट हासिल किए। उन्होंने दबाव के समय भारत के महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को आउट कर मैच का रुख बदल दिया। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लगातार दूसरे मुकाबले में भी अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा भी रही। इस सीरीज में भारत की हार के पीछे दो बड़ी वजहें साफ दिखाई दीं। पहली वजह रही टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी। पहले मुकाबले में भी संजू सैमसन, ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर जल्दी आउट हो गए थे। दूसरे मुकाबले में भी यही कहानी दोहराई गई। शुरुआती बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और हर बार मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव आ गया। अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में लगातार शुरुआती विकेट गिरने के बाद वापसी करना आसान नहीं होता और भारत इसी कमजोरी से बाहर नहीं निकल सका।
दूसरी बड़ी वजह रही भारतीय टीम की खराब फील्डिंग। दोनों मुकाबलों में खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़ दिए। पहले मैच में मिले जीवनदान का आयरलैंड के बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया था। दूसरे मुकाबले में भी रॉस अडायर और हैरी टेक्टर के कैच छूटे, जिसके बाद दोनों बल्लेबाजों ने महत्वपूर्ण रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। एक मौका ऐसा भी आया जब बाउंड्री पर कैच छूटने के साथ गेंद छक्के के लिए चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे मौके ही मैच का परिणाम तय करते हैं और इस सीरीज में भारत ने वही मौके गंवाए। भारतीय गेंदबाजी में कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले। डेब्यू मैच खेल रहे प्रिंस यादव ने तीन विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हालांकि बल्लेबाजी और फील्डिंग में मिली निराशा के कारण उनका प्रदर्शन टीम को जीत नहीं दिला सका। दूसरी ओर आयरलैंड ने हर विभाग में अनुशासित खेल दिखाया। बल्लेबाजी में जिम्मेदारी, गेंदबाजी में सटीक लाइन-लेंथ और फील्डिंग में चुस्ती ने टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस सीरीज की जीत आयरलैंड क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विश्व चैंपियन भारत जैसी मजबूत टीम को लगातार दो मुकाबलों में हराना उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा। वहीं भारतीय टीम के लिए यह हार भविष्य की तैयारियों के लिहाज से एक बड़ा सबक है।
