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पाकिस्तान का अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक दावा, 29 आतंकी ढेर
Digital Desk
कराची हमले के बाद पाकिस्तान का जवाबी ऑपरेशन, TTP और जमात-उल-अहरार के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के भीतर तीन अलग-अलग ठिकानों पर एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई की है, जिसमें कुल 29 आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें चार जवानों की मौत हो गई थी और जवाबी कार्रवाई में छह हमलावरों को मार गिराया गया था। सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया है। शुरुआती कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में की गई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर एक जमीनी ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का एक कमांडर खान फरोश भी शामिल था। बताया गया कि इस इलाके में आतंकियों की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे और हालात अचानक बिगड़ते जा रहे थे। इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के भीतर पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन अलग-अलग आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में 25 और आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। इस तरह कुल मिलाकर 29 आतंकियों के ढेर होने का दावा किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन ठिकानों पर मौजूद हथियारों और गोला-बारूद के बड़े जखीरे को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कराची में इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार रात करीब 8.30 बजे सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था। हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने अचानक परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में चार रेंजर्स जवान शहीद हो गए थे। वहीं सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह हमलावर भी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा एक गुट माना जाता है। इस घटना ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को एक बार फिर गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है।
कराची हमले के बाद ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई थी। खुफिया रिपोर्टों में यह संकेत मिला था कि अफगानिस्तान सीमा के अंदर कई ऐसे ठिकाने सक्रिय हैं, जहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाई जाती है। इसी आधार पर यह संयुक्त जमीनी और हवाई कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कई स्थानों पर भारी विस्फोट हुए और इलाके में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश में हाल के महीनों में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है और इसके पीछे सीमा पार से संचालित नेटवर्क जिम्मेदार हैं। सूचना मंत्री तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नागरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कोशिश करता रहा है, लेकिन हालात उसे मजबूर कर रहे हैं कि वह कठोर कदम उठाए। पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बीच संघर्ष कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें 2001 के बाद शुरू हुए अफगानिस्तान युद्ध और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीतियों से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं और उसका नेटवर्क खासकर खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा के पास सक्रिय माना जाता है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता है, जबकि अफगानिस्तान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है। इसी विवाद के चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहता है।
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पाकिस्तान का अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक दावा, 29 आतंकी ढेर
Digital Desk
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के भीतर तीन अलग-अलग ठिकानों पर एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई की है, जिसमें कुल 29 आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें चार जवानों की मौत हो गई थी और जवाबी कार्रवाई में छह हमलावरों को मार गिराया गया था। सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया है। शुरुआती कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में की गई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर एक जमीनी ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का एक कमांडर खान फरोश भी शामिल था। बताया गया कि इस इलाके में आतंकियों की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे और हालात अचानक बिगड़ते जा रहे थे। इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के भीतर पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन अलग-अलग आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में 25 और आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। इस तरह कुल मिलाकर 29 आतंकियों के ढेर होने का दावा किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन ठिकानों पर मौजूद हथियारों और गोला-बारूद के बड़े जखीरे को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कराची में इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार रात करीब 8.30 बजे सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था। हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने अचानक परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में चार रेंजर्स जवान शहीद हो गए थे। वहीं सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह हमलावर भी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा एक गुट माना जाता है। इस घटना ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को एक बार फिर गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है।
कराची हमले के बाद ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई थी। खुफिया रिपोर्टों में यह संकेत मिला था कि अफगानिस्तान सीमा के अंदर कई ऐसे ठिकाने सक्रिय हैं, जहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाई जाती है। इसी आधार पर यह संयुक्त जमीनी और हवाई कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कई स्थानों पर भारी विस्फोट हुए और इलाके में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश में हाल के महीनों में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है और इसके पीछे सीमा पार से संचालित नेटवर्क जिम्मेदार हैं। सूचना मंत्री तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नागरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कोशिश करता रहा है, लेकिन हालात उसे मजबूर कर रहे हैं कि वह कठोर कदम उठाए। पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बीच संघर्ष कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें 2001 के बाद शुरू हुए अफगानिस्तान युद्ध और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीतियों से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं और उसका नेटवर्क खासकर खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा के पास सक्रिय माना जाता है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता है, जबकि अफगानिस्तान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है। इसी विवाद के चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहता है।
