- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- इंटरनेशनल टाइगर डे पर वनरक्षक संदीप तौहेल सम्मानित, CM मोहन यादव ने दिया प्रशस्ति पत्र
इंटरनेशनल टाइगर डे पर वनरक्षक संदीप तौहेल सम्मानित, CM मोहन यादव ने दिया प्रशस्ति पत्र
मध्य प्रदेश
वन्यजीव अपराधों की जांच और संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला राज्य स्तरीय सम्मान, STSF जबलपुर इकाई में हैं तैनात
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले वनकर्मियों को सम्मानित किया गया। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) की जबलपुर इकाई में पदस्थ वनरक्षक संदीप कुमार तौहेल को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। उन्हें वन्यजीवों से जुड़े अपराधों की जांच और संरक्षण गतिविधियों में बेहतर कार्य के लिए यह सम्मान मिला है।
वन्यजीव अपराधों की जांच में योगदान
संदीप कुमार तौहेल STSF जबलपुर इकाई के साथ वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और उनकी जांच से जुड़े कार्य कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के दौरान जांच कार्यों में बेहतर प्रदर्शन और समर्पण दिखाया। इसी आधार पर अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान के लिए चुना गया।
पूरे मध्यप्रदेश में कार्रवाई करती है STSF
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स प्रदेश में वन्यजीवों के शिकार, अवैध व्यापार और तस्करी जैसे मामलों से निपटने वाली विशेष इकाई है। यह कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश के अंतर्गत काम करती है।
STSF की जिम्मेदारी केवल टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क या अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसकी टीमें प्रदेश के किसी भी हिस्से में वन्यजीव अपराध से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई कर सकती हैं। इसकी कार्यप्रणाली को पुलिस विभाग की STF, ATS और CID जैसी विशेष जांच इकाइयों की तर्ज पर विकसित किया गया है।
2008 में एंटी पोचिंग स्क्वाड से हुई शुरुआत
मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ विशेष व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2008 में 'एंटी पोचिंग स्क्वाड' के रूप में की गई थी। बाद में इसका पुनर्गठन कर इसे स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स का स्वरूप दिया गया। समय के साथ इसका नेटवर्क और कार्यक्षेत्र बढ़ाया गया।
वर्तमान में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और शिवपुरी में इसकी चार क्षेत्रीय इकाइयां काम कर रही हैं। ये टीमें वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करती हैं।
तस्करी और शिकार के नेटवर्क पर नजर
STSF की प्रमुख जिम्मेदारियों में वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकना, तस्करी से जुड़े नेटवर्क की पहचान करना और ऐसे मामलों की जांच शामिल है। बाघ सहित संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े अपराधों में भी इस विशेष इकाई की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वन्यजीव अपराधों के खिलाफ मध्यप्रदेश STSF की कार्रवाई को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। विभाग के मुताबिक, इसके काम को अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल की ओर से चार बार सम्मान मिल चुका है।
जबलपुर इकाई के वनरक्षक को राज्य स्तर पर पहचान
इसी व्यवस्था के तहत काम कर रहे वनरक्षक संदीप कुमार तौहेल को उनके जांच कौशल और वन्यजीव संरक्षण के प्रति कार्य के लिए चुना गया। बुधवार को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
इंटरनेशनल टाइगर डे पर वनरक्षक संदीप तौहेल सम्मानित, CM मोहन यादव ने दिया प्रशस्ति पत्र
मध्य प्रदेश
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले वनकर्मियों को सम्मानित किया गया। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) की जबलपुर इकाई में पदस्थ वनरक्षक संदीप कुमार तौहेल को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। उन्हें वन्यजीवों से जुड़े अपराधों की जांच और संरक्षण गतिविधियों में बेहतर कार्य के लिए यह सम्मान मिला है।
वन्यजीव अपराधों की जांच में योगदान
संदीप कुमार तौहेल STSF जबलपुर इकाई के साथ वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और उनकी जांच से जुड़े कार्य कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के दौरान जांच कार्यों में बेहतर प्रदर्शन और समर्पण दिखाया। इसी आधार पर अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान के लिए चुना गया।
पूरे मध्यप्रदेश में कार्रवाई करती है STSF
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स प्रदेश में वन्यजीवों के शिकार, अवैध व्यापार और तस्करी जैसे मामलों से निपटने वाली विशेष इकाई है। यह कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश के अंतर्गत काम करती है।
STSF की जिम्मेदारी केवल टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क या अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसकी टीमें प्रदेश के किसी भी हिस्से में वन्यजीव अपराध से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई कर सकती हैं। इसकी कार्यप्रणाली को पुलिस विभाग की STF, ATS और CID जैसी विशेष जांच इकाइयों की तर्ज पर विकसित किया गया है।
2008 में एंटी पोचिंग स्क्वाड से हुई शुरुआत
मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ विशेष व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2008 में 'एंटी पोचिंग स्क्वाड' के रूप में की गई थी। बाद में इसका पुनर्गठन कर इसे स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स का स्वरूप दिया गया। समय के साथ इसका नेटवर्क और कार्यक्षेत्र बढ़ाया गया।
वर्तमान में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और शिवपुरी में इसकी चार क्षेत्रीय इकाइयां काम कर रही हैं। ये टीमें वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करती हैं।
तस्करी और शिकार के नेटवर्क पर नजर
STSF की प्रमुख जिम्मेदारियों में वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकना, तस्करी से जुड़े नेटवर्क की पहचान करना और ऐसे मामलों की जांच शामिल है। बाघ सहित संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े अपराधों में भी इस विशेष इकाई की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वन्यजीव अपराधों के खिलाफ मध्यप्रदेश STSF की कार्रवाई को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। विभाग के मुताबिक, इसके काम को अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल की ओर से चार बार सम्मान मिल चुका है।
जबलपुर इकाई के वनरक्षक को राज्य स्तर पर पहचान
इसी व्यवस्था के तहत काम कर रहे वनरक्षक संदीप कुमार तौहेल को उनके जांच कौशल और वन्यजीव संरक्षण के प्रति कार्य के लिए चुना गया। बुधवार को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
