डॉ. होमी भाभा की पुण्यतिथि पर ‘शोधकर्ता दिवस’ घोषित करने की मांग तेज

डिजिटल डेस्क

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वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के सम्मान के लिए राष्ट्रीय दिवस की जरूरत; रघुनाथ येमूळ गुरुजी ने सरकार से की अपील

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के शिल्पकार और विश्वविख्यात वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की पुण्यतिथि के अवसर पर देश में ‘शोधकर्ता दिवस’ अथवा ‘वैज्ञानिक दिवस’ घोषित करने की मांग एक बार फिर सामने आई है। शोध और नवाचार से जुड़े संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के लिए एक समर्पित दिवस घोषित किया जाए।

रिसर्चर्स एंड नेचुरली क्लेवर ह्यूमन ऑर्गनाइजेशन (RANCHO) और दिव्यांग इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के संस्थापक एवं चेयरमैन रघुनाथ येमूळ गुरुजी ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति के पीछे दशकों की तपस्या, अनुसंधान और समर्पण छिपा है, लेकिन समाज में शोधकर्ताओं को वह सार्वजनिक पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने डॉ. भाभा की पुण्यतिथि को इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त बताया।

वैज्ञानिक योगदान को मिले राष्ट्रीय पहचान

रघुनाथ येमूळ गुरुजी ने कहा कि भारत को डॉ. होमी भाभा, डॉ. सी. वी. रमण जैसे वैज्ञानिक मिले, जिनकी वजह से देश विज्ञान और तकनीक के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित हुआ। डॉ. भाभा ने भारत में परमाणु अनुसंधान की नींव रखी और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग की दिशा तय की। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और परमाणु ऊर्जा आयोग जैसे संस्थानों की स्थापना में उनकी भूमिका निर्णायक रही।

उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल वैज्ञानिक आधारभूत ढांचे को मजबूत किया, बल्कि आत्मनिर्भर वैज्ञानिक राष्ट्र बनने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए। संगठनों का कहना है कि ऐसे योगदान को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

शोध: अदृश्य लेकिन आधारभूत योगदान

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में मौजूद हर तकनीक, सुविधा और नवाचार के पीछे वर्षों की शोध प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया धैर्य, त्याग और निरंतर प्रयास की मांग करती है। बच्चों का दिवस, शिक्षक दिवस, डॉक्टर दिवस जैसे अनेक दिवस मनाए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अब तक कोई राष्ट्रीय दिवस तय नहीं किया गया है।

2013 से हो रही पहल

रघुनाथ येमूळ गुरुजी के अनुसार, उनकी संस्थाएं वर्ष 2013 से निरंतर ‘शोधकर्ता दिवस’ या ‘शास्त्रज्ञ दिवस’ मनाती आ रही हैं। इसका उद्देश्य शोध संस्कृति को बढ़ावा देना, युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करना और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।

RANCHO का ‘रिसर्च इंडिया रिसर्च’ अभियान छात्रों में प्रयोगधर्मिता और नवाचार की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है, जबकि DICCAI आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत शोध आधारित उद्यमिता और नवाचार को समर्थन दे रही है।

सरकार से औपचारिक घोषणा की मांग

संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि डॉ. होमी भाभा की पुण्यतिथि को आधिकारिक रूप से ‘शोधकर्ता दिवस’ या ‘वैज्ञानिक दिवस’ घोषित किया जाए, ताकि देश के वैज्ञानिक समुदाय को सम्मान मिले और आने वाली पीढ़ियां शोध को करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हों।

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