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लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पास, राहुल के ‘इडियट’ शब्द पर भारी हंगामा
Digital Desk
करीब 50 मिनट बोले नेता प्रतिपक्ष; छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरा, किरेन रिजिजू ने माफी की मांग की
पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए लाया गया ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ बुधवार को लोकसभा से ध्वनि मत से पारित हो गया। लेकिन बिल पर हुई चर्चा इसके प्रावधानों से ज्यादा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उस दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर गर्म रही। राहुल करीब 50 मिनट तक बोले और पेपर लीक, छात्र आंदोलन तथा दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाते रहे। इसी दौरान उनके ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बार-बार अपनी सीट से खड़े हुए और राहुल से संसदीय मर्यादा का पालन करने को कहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई मौकों पर उन्हें टोका और कहा कि सदन में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। मामला उस समय और गरमा गया जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग के निर्देश गृह मंत्री की ओर से दिए गए थे। सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया और आरोप के आधार पर सवाल उठाए। हाल के छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष पिछले कुछ दिनों से लगातार संसद में उठा रहा है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल गृह मंत्री से जवाब की मांग भी कर रहे हैं।
राहुल गांधी के भाषण के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और आपत्तिजनक भाषा के लिए माफी मांगनी चाहिए। राहुल ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि सरकार चाहती है कि देश में केवल भाजपा के लोग बोलें तो वह चुप होकर बैठ सकते हैं। उनके जवाब के बाद सत्ता पक्ष की तरफ से फिर शोर शुरू हो गया। स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और राहुल को अपनी बात बिल तथा उससे जुड़े विषयों तक रखने के लिए कहा। ‘अंधभक्त’ और ‘इडियट’ शब्द को लेकर विवाद काफी देर तक चलता रहा।
पेपर लीक का मुद्दा पिछले दिनों हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद संसद के मानसून सत्र में लगातार छाया हुआ है। विपक्ष ने मंगलवार को भी सरकार को घेरते हुए दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग पर गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग की थी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी सवाल उठाया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किसने दिया। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करना और संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करना है।
नया संशोधन मौजूदा पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में बदलाव करता है। प्रस्तावित व्यवस्था में पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर सजा को ज्यादा सख्त करने के साथ जांच और मुकदमे की प्रक्रिया तेज करने पर जोर है। बिल में दोषियों के लिए गंभीर मामलों में 10 साल तक की जेल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में ₹10 करोड़ तक जुर्माने जैसे प्रावधान शामिल हैं। दोषी अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित प्रावधानों का हिस्सा है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रावधान रखा गया है। जांच एजेंसियों के लिए भी समय सीमा तय करने की कोशिश की गई है।
पुलिस स्टेशन में सूचना दर्ज होने के बाद अपराध की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है, ताकि पेपर लीक के मामले वर्षों तक जांच और अदालतों में लंबित न रहें। सरकार का तर्क है कि केवल किसी परीक्षा को रद्द करना या दोबारा परीक्षा कराना पर्याप्त नहीं है। पेपर लीक के पीछे काम करने वाले संगठित गिरोह, परीक्षा सेवा प्रदाता और दूसरे लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जरूरी है जिससे भविष्य में इस तरह के अपराध को रोकने के लिए डर पैदा हो। विपक्ष ने हालांकि कानून के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत जवाबदेही तय करने की मांग की है। चर्चा के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों को शुरुआती स्तर पर रोकने के लिए सरकार क्या व्यवस्था करेगी।
इस बिल को लेकर लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से लगातार गतिरोध बना हुआ था। 27 जुलाई को विपक्ष के हंगामे की वजह से इसे चर्चा के लिए नहीं लिया जा सका था और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई। विपक्ष उस समय भी छात्र आंदोलन के बाद हुई गिरफ्तारियों और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहा था। मंगलवार को बिल पर चर्चा आगे बढ़ी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू के बीच भी बहस हुई थी, जबकि कांग्रेस ने सरकार की मंशा और मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। सरकार ने कहा कि वह बिल पर लंबी चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाएगा। बुधवार को राहुल गांधी के भाषण के साथ बहस का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
उनके भाषण के दौरान एक तरफ विपक्षी सांसद छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते रहे, दूसरी तरफ सत्ता पक्ष राहुल के शब्दों और आरोपों का विरोध करता रहा। स्पीकर की ओर से बार-बार सदन की भाषा और मर्यादा का ध्यान रखने को कहा गया। राहुल के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटाने की मांग भी उठी। बहस और हंगामे के बीच आखिरकार संशोधन विधेयक को मतदान के लिए रखा गया और लोकसभा ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया। अब कानून बनने की आगे की संसदीय प्रक्रिया में इसे राज्यसभा की मंजूरी भी चाहिए होगी।
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पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए लाया गया ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ बुधवार को लोकसभा से ध्वनि मत से पारित हो गया। लेकिन बिल पर हुई चर्चा इसके प्रावधानों से ज्यादा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उस दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर गर्म रही। राहुल करीब 50 मिनट तक बोले और पेपर लीक, छात्र आंदोलन तथा दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाते रहे। इसी दौरान उनके ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बार-बार अपनी सीट से खड़े हुए और राहुल से संसदीय मर्यादा का पालन करने को कहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई मौकों पर उन्हें टोका और कहा कि सदन में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। मामला उस समय और गरमा गया जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग के निर्देश गृह मंत्री की ओर से दिए गए थे। सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया और आरोप के आधार पर सवाल उठाए। हाल के छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष पिछले कुछ दिनों से लगातार संसद में उठा रहा है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल गृह मंत्री से जवाब की मांग भी कर रहे हैं।
राहुल गांधी के भाषण के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और आपत्तिजनक भाषा के लिए माफी मांगनी चाहिए। राहुल ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि सरकार चाहती है कि देश में केवल भाजपा के लोग बोलें तो वह चुप होकर बैठ सकते हैं। उनके जवाब के बाद सत्ता पक्ष की तरफ से फिर शोर शुरू हो गया। स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और राहुल को अपनी बात बिल तथा उससे जुड़े विषयों तक रखने के लिए कहा। ‘अंधभक्त’ और ‘इडियट’ शब्द को लेकर विवाद काफी देर तक चलता रहा।
पेपर लीक का मुद्दा पिछले दिनों हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद संसद के मानसून सत्र में लगातार छाया हुआ है। विपक्ष ने मंगलवार को भी सरकार को घेरते हुए दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग पर गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग की थी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी सवाल उठाया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किसने दिया। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करना और संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करना है।
नया संशोधन मौजूदा पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में बदलाव करता है। प्रस्तावित व्यवस्था में पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर सजा को ज्यादा सख्त करने के साथ जांच और मुकदमे की प्रक्रिया तेज करने पर जोर है। बिल में दोषियों के लिए गंभीर मामलों में 10 साल तक की जेल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में ₹10 करोड़ तक जुर्माने जैसे प्रावधान शामिल हैं। दोषी अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित प्रावधानों का हिस्सा है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रावधान रखा गया है। जांच एजेंसियों के लिए भी समय सीमा तय करने की कोशिश की गई है।
पुलिस स्टेशन में सूचना दर्ज होने के बाद अपराध की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है, ताकि पेपर लीक के मामले वर्षों तक जांच और अदालतों में लंबित न रहें। सरकार का तर्क है कि केवल किसी परीक्षा को रद्द करना या दोबारा परीक्षा कराना पर्याप्त नहीं है। पेपर लीक के पीछे काम करने वाले संगठित गिरोह, परीक्षा सेवा प्रदाता और दूसरे लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जरूरी है जिससे भविष्य में इस तरह के अपराध को रोकने के लिए डर पैदा हो। विपक्ष ने हालांकि कानून के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत जवाबदेही तय करने की मांग की है। चर्चा के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों को शुरुआती स्तर पर रोकने के लिए सरकार क्या व्यवस्था करेगी।
इस बिल को लेकर लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से लगातार गतिरोध बना हुआ था। 27 जुलाई को विपक्ष के हंगामे की वजह से इसे चर्चा के लिए नहीं लिया जा सका था और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई। विपक्ष उस समय भी छात्र आंदोलन के बाद हुई गिरफ्तारियों और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहा था। मंगलवार को बिल पर चर्चा आगे बढ़ी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू के बीच भी बहस हुई थी, जबकि कांग्रेस ने सरकार की मंशा और मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। सरकार ने कहा कि वह बिल पर लंबी चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाएगा। बुधवार को राहुल गांधी के भाषण के साथ बहस का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
उनके भाषण के दौरान एक तरफ विपक्षी सांसद छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते रहे, दूसरी तरफ सत्ता पक्ष राहुल के शब्दों और आरोपों का विरोध करता रहा। स्पीकर की ओर से बार-बार सदन की भाषा और मर्यादा का ध्यान रखने को कहा गया। राहुल के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटाने की मांग भी उठी। बहस और हंगामे के बीच आखिरकार संशोधन विधेयक को मतदान के लिए रखा गया और लोकसभा ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया। अब कानून बनने की आगे की संसदीय प्रक्रिया में इसे राज्यसभा की मंजूरी भी चाहिए होगी।
