ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण को नई दिशा, दिल्ली घोषणा से बना राष्ट्रीय रोडमैप

digital desk

On

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नागार्जुनकोंडा में राष्ट्रीय अकादमी की घोषणा, उपेक्षित स्थलों और ग्रामीण समुदायों पर केंद्रित नीति

भारत ने ग्रामीण बौद्ध विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ठोस और दीर्घकालिक पहल करते हुए दिल्ली घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा में ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण एवं विकास के लिए राष्ट्रीय अकादमी की स्थापना की घोषणा की गई। यह फैसला नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर लिया गया, जिसे इस क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे समन्वित प्रयास माना जा रहा है।

यह सम्मेलन भारतीय ग्रामीण विरासत एवं विकास ट्रस्ट (ITRHD) के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें एशिया, यूरोप और अमेरिका से विद्वान, बौद्ध भिक्षु, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य देशभर में फैले सैकड़ों कम-ज्ञात और उपेक्षित ग्रामीण बौद्ध स्थलों के संरक्षण, प्रलेखन और सतत विकास के लिए साझा रणनीति तैयार करना था।

सम्मेलन में घोषणा की गई कि आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित राष्ट्रीय अकादमी के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित की है। यह अकादमी ग्रामीण बौद्ध विरासत से जुड़े अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रलेखन और समुदाय-आधारित संरक्षण की देश की पहली विशेषीकृत संस्था होगी। इसका लक्ष्य संरक्षण को स्थानीय आजीविका, शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुद्धार से जोड़ना है।

उद्घाटन सत्र में ITRHD के अध्यक्ष एस. के. मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण बौद्ध स्थलों का संरक्षण बिखरे प्रयासों से संभव नहीं है और इसके लिए संस्थागत ढांचे तथा दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है। पद्म विभूषण डॉ. करण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की बौद्ध विरासत केवल अतीत नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी रक्षा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं।

WhatsApp Image 2025-12-17 at 7.44.34 PM

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में हिमाचल प्रदेश के ताबो मठ का उदाहरण विशेष रूप से सामने आया। ताबो मठ के आध्यात्मिक प्रमुख क्याबजे सर्कोंग त्सेनशप रिनपोछे ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही असामान्य वर्षा और बादल फटने की घटनाओं से हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मठ की संरचना और भित्ति चित्रों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक होने के कारण कानूनी सीमाएं समय पर मरम्मत में बाधा बन रही हैं।

दूसरे दिन नीति आयोग के पूर्व सीईओ डॉ. अमिताभ कांत ने बौद्ध विरासत संरक्षण को राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे पर्यटन मॉडल विकसित करने की वकालत की, जो पर्यावरण-संवेदनशील हों और ग्रामीण समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएं।

सम्मेलन का समापन आठ बिंदुओं वाली दिल्ली घोषणा के साथ हुआ, जिसमें ग्रामीण बौद्ध विरासत को जीवंत संस्कृति के रूप में मान्यता, समुदाय सहभागिता, डिजिटल प्रलेखन, क्षेत्रीय सहयोग और नागार्जुनकोंडा अकादमी को संस्थागत समर्थन देने की सिफारिश की गई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इसे भारत समाचार अपडेट और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में ऐतिहासिक कदम बताया।भूमि आवंटन, साझा नीति दृष्टि और स्पष्ट रोडमैप के साथ यह सम्मेलन ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण को राष्ट्रीय एजेंडे में लाने की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

.................................................................

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
17 Dec 2025 By ANKITA

ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण को नई दिशा, दिल्ली घोषणा से बना राष्ट्रीय रोडमैप

digital desk

भारत ने ग्रामीण बौद्ध विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ठोस और दीर्घकालिक पहल करते हुए दिल्ली घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा में ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण एवं विकास के लिए राष्ट्रीय अकादमी की स्थापना की घोषणा की गई। यह फैसला नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर लिया गया, जिसे इस क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे समन्वित प्रयास माना जा रहा है।

यह सम्मेलन भारतीय ग्रामीण विरासत एवं विकास ट्रस्ट (ITRHD) के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें एशिया, यूरोप और अमेरिका से विद्वान, बौद्ध भिक्षु, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य देशभर में फैले सैकड़ों कम-ज्ञात और उपेक्षित ग्रामीण बौद्ध स्थलों के संरक्षण, प्रलेखन और सतत विकास के लिए साझा रणनीति तैयार करना था।

सम्मेलन में घोषणा की गई कि आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित राष्ट्रीय अकादमी के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित की है। यह अकादमी ग्रामीण बौद्ध विरासत से जुड़े अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रलेखन और समुदाय-आधारित संरक्षण की देश की पहली विशेषीकृत संस्था होगी। इसका लक्ष्य संरक्षण को स्थानीय आजीविका, शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुद्धार से जोड़ना है।

उद्घाटन सत्र में ITRHD के अध्यक्ष एस. के. मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण बौद्ध स्थलों का संरक्षण बिखरे प्रयासों से संभव नहीं है और इसके लिए संस्थागत ढांचे तथा दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है। पद्म विभूषण डॉ. करण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की बौद्ध विरासत केवल अतीत नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी रक्षा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं।

WhatsApp Image 2025-12-17 at 7.44.34 PM

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में हिमाचल प्रदेश के ताबो मठ का उदाहरण विशेष रूप से सामने आया। ताबो मठ के आध्यात्मिक प्रमुख क्याबजे सर्कोंग त्सेनशप रिनपोछे ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही असामान्य वर्षा और बादल फटने की घटनाओं से हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मठ की संरचना और भित्ति चित्रों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक होने के कारण कानूनी सीमाएं समय पर मरम्मत में बाधा बन रही हैं।

दूसरे दिन नीति आयोग के पूर्व सीईओ डॉ. अमिताभ कांत ने बौद्ध विरासत संरक्षण को राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे पर्यटन मॉडल विकसित करने की वकालत की, जो पर्यावरण-संवेदनशील हों और ग्रामीण समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएं।

सम्मेलन का समापन आठ बिंदुओं वाली दिल्ली घोषणा के साथ हुआ, जिसमें ग्रामीण बौद्ध विरासत को जीवंत संस्कृति के रूप में मान्यता, समुदाय सहभागिता, डिजिटल प्रलेखन, क्षेत्रीय सहयोग और नागार्जुनकोंडा अकादमी को संस्थागत समर्थन देने की सिफारिश की गई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इसे भारत समाचार अपडेट और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में ऐतिहासिक कदम बताया।भूमि आवंटन, साझा नीति दृष्टि और स्पष्ट रोडमैप के साथ यह सम्मेलन ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण को राष्ट्रीय एजेंडे में लाने की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

.................................................................

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-direction-for-rural-buddhist-heritage-conservation-national-roadmap-created/article-40233

खबरें और भी हैं

सिर्फ़ मोहब्बत नहीं, लालच और अंधे प्यार ने रचा खौफनाक मर्डर

टाप न्यूज

सिर्फ़ मोहब्बत नहीं, लालच और अंधे प्यार ने रचा खौफनाक मर्डर

एक शिक्षक की मौत, पत्नी और उसके प्रेमी की साजिश ने शहर में मचाई सनसनी
सत्यकथा 
सिर्फ़ मोहब्बत नहीं, लालच और अंधे प्यार ने रचा खौफनाक मर्डर

परिणीति चोपड़ा से शादी पड़ी भारी? राघव चड्ढा की छुट्टी पर कुमार विश्वास की भविष्यवाणी हुई वायरल

आम आदमी पार्टी में उठे घमासान के बीच वायरल हो रहा डेढ़ साल पुराना वीडियो, कुमार विश्वास ने पहले ही...
बालीवुड 
परिणीति चोपड़ा से शादी पड़ी भारी? राघव चड्ढा की छुट्टी पर कुमार विश्वास की भविष्यवाणी हुई वायरल

रणबीर कपूर रामायण में भगवान परशुराम का रोल भी निभाएंगे

भगवान राम और परशुराम दोनों किरदारों को निभाना रणबीर के लिए खास अनुभव, बोले- एक्टिंग की गहराई यही से शुरू...
बालीवुड 
रणबीर कपूर रामायण में भगवान परशुराम का रोल भी निभाएंगे

लाइव कॉन्सर्ट में फैन की हरकत से घबराईं सुनंदा शर्मा, बीच में रोकी परफॉर्मेंस

गाजियाबाद में स्टेज पर कूदा युवक, सिंगर ने सुरक्षा कारणों से शो रद्द किया; पुलिस ने आरोपी को हिरासत में...
बालीवुड 
लाइव कॉन्सर्ट में फैन की हरकत से घबराईं सुनंदा शर्मा, बीच में रोकी परफॉर्मेंस

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.