राहुल गांधी का सरकार पर हमला: मनरेगा पर फैसले को बताया ‘वन मैन शो’, देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

नई दिल्ली

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सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद कांग्रेस का आरोप—केंद्र के निर्णयों से राज्यों के अधिकार कमजोर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली में आज शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मनरेगा से जुड़े हालिया फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए कहा कि देश में शासन “वन मैन शो” की तरह चलाया जा रहा है, जिसका लाभ कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों तक सीमित है। उन्होंने घोषणा की कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में कांग्रेस देशभर में आंदोलन शुरू करेगी।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि यह अधिकार आधारित व्यवस्था थी, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम आय और सम्मानजनक रोजगार की गारंटी दी। उनका आरोप था कि इस कानून को कमजोर करना गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है और इससे संघीय ढांचे को भी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि राज्यों से परामर्श किए बिना केंद्र द्वारा लिया गया यह फैसला आर्थिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर असर डालेगा।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मनरेगा में बदलाव का निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे लिया गया है, जिसमें न तो कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी दिखती है और न ही राज्यों की भागीदारी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत को कमजोर कर संसाधनों का लाभ चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि रोजगार और आजीविका से जुड़े मुद्दे हाशिये पर चले गए हैं।

इसी बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा को खत्म या कमजोर करने का प्रयास लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा करेगा। उन्होंने इसे यूपीए सरकार की ऐतिहासिक पहल बताया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई थी। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम को हटाना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि उस विचारधारा पर प्रहार है, जो गरीबों को अधिकार देने की बात करती है।

खड़गे ने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा फंडिंग पैटर्न में बदलाव—जहां पहले 90 फीसदी योगदान केंद्र का था—अब राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। इससे कई राज्य योजनाओं के क्रियान्वयन में पीछे रह सकते हैं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाते हुए इसे कमजोर वर्गों के मताधिकार को प्रभावित करने की आशंका बताया।

कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में पार्टी गांव-गांव तक इस मुद्दे को ले जाएगी और शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध दर्ज कराया जाएगा। बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक रणनीति पर भी चर्चा हुई, हालांकि नेतृत्व परिवर्तन जैसे मुद्दों पर कोई विचार नहीं किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आक्रामक रुख ग्रामीण वोट बैंक को साधने और केंद्र सरकार की नीतियों को जनहित के खिलाफ बताने की रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना अहम होगा कि यह आंदोलन जमीन पर कितना प्रभाव डाल पाता है और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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27 Dec 2025 By Nitin Trivedi

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नई दिल्ली में आज शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मनरेगा से जुड़े हालिया फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए कहा कि देश में शासन “वन मैन शो” की तरह चलाया जा रहा है, जिसका लाभ कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों तक सीमित है। उन्होंने घोषणा की कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में कांग्रेस देशभर में आंदोलन शुरू करेगी।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि यह अधिकार आधारित व्यवस्था थी, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम आय और सम्मानजनक रोजगार की गारंटी दी। उनका आरोप था कि इस कानून को कमजोर करना गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है और इससे संघीय ढांचे को भी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि राज्यों से परामर्श किए बिना केंद्र द्वारा लिया गया यह फैसला आर्थिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर असर डालेगा।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मनरेगा में बदलाव का निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे लिया गया है, जिसमें न तो कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी दिखती है और न ही राज्यों की भागीदारी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत को कमजोर कर संसाधनों का लाभ चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि रोजगार और आजीविका से जुड़े मुद्दे हाशिये पर चले गए हैं।

इसी बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा को खत्म या कमजोर करने का प्रयास लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा करेगा। उन्होंने इसे यूपीए सरकार की ऐतिहासिक पहल बताया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई थी। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम को हटाना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि उस विचारधारा पर प्रहार है, जो गरीबों को अधिकार देने की बात करती है।

खड़गे ने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा फंडिंग पैटर्न में बदलाव—जहां पहले 90 फीसदी योगदान केंद्र का था—अब राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। इससे कई राज्य योजनाओं के क्रियान्वयन में पीछे रह सकते हैं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाते हुए इसे कमजोर वर्गों के मताधिकार को प्रभावित करने की आशंका बताया।

कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में पार्टी गांव-गांव तक इस मुद्दे को ले जाएगी और शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध दर्ज कराया जाएगा। बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक रणनीति पर भी चर्चा हुई, हालांकि नेतृत्व परिवर्तन जैसे मुद्दों पर कोई विचार नहीं किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आक्रामक रुख ग्रामीण वोट बैंक को साधने और केंद्र सरकार की नीतियों को जनहित के खिलाफ बताने की रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना अहम होगा कि यह आंदोलन जमीन पर कितना प्रभाव डाल पाता है और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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