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दिव्यांग सशक्तिकरण में उल्लेखनीय योगदान, भट्ट को राष्ट्र का शीर्ष पुरस्कार
Ankita Suman
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विज्ञान भवन में किया सम्मानित; शिक्षा, जागरूकता और समावेशन के क्षेत्र में लंबी पहल को राष्ट्रीय पहचान
देश में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और समावेशी शिक्षा की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे विशेषज्ञ राजीव भट्ट को वर्ष 2025 के ‘दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 10 दिसंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किया।
इस सम्मान को शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसे व्यक्तित्व की स्वीकृति माना जा रहा है, जिसने तीन दशकों तक देश भर में सीखने की विविधताओं—डिस्लेक्सिया, ऑटिज़्म, ADHD सहित—के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का कार्य किया।
पूरे देश में सीखने की विविधताओं पर समझ विकसित करने का योगदान
केंद्र सरकार के अनुसार, पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने दिव्यांगजनों के अधिकारों और अवसरों को बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो।
राजीव भट्ट ने 1990 के दशक से ऐसे परिवारों और बच्चों के लिए अभियान चलाया, जो भ्रम, सामाजिक कलंक और गलत धारणाओं के बीच संघर्ष कर रहे थे।
उन्होंने देश में—
-
शिक्षक प्रशिक्षण,
-
माता–पिता परामर्श,
-
सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम,
-
और समावेशी शिक्षा मॉडल
को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाई।
समावेशन पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकें
भट्ट की दो पुस्तकें—ऑटिज़्म को समझना और पठन-दोष को समझना—सामाजिक बदलाव का आधार मानी जाती हैं।
पहली पुस्तक ऑटिज़्म के शुरुआती लक्षण, संवेदनात्मक आवश्यकताओं और सीखने की शैली को सरल भाषा में समझाती है, जबकि दूसरी डिस्लेक्सिया पर केंद्रित है और शिक्षकों को कक्षा में उपयोगी रणनीतियाँ प्रदान करती है। दोनों पुस्तकों ने समाज में फैली कई मिथकों को चुनौती दी है।
‘अध्ययन समावेशी शिक्षण केंद्र’—व्यक्तिगत शिक्षा योजना का राष्ट्रीय मॉडल
राजीव भट्ट द्वारा स्थापित “अध्ययन समावेशी शिक्षण केंद्र” आज देश में समावेशी शिक्षा के सबसे प्रभावी मॉडलों में माना जाता है।
यह केंद्र बच्चों को उनकी क्षमता और गति के अनुरूप—
-
शैक्षणिक,
-
भावनात्मक,
-
और व्यावसायिक प्रशिक्षण
प्रदान करता है।
यहाँ पाक-कला, डिजिटल डिज़ाइन, आतिथ्य सेवा, संगीत, खेल और कला जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार का अवसर दिया जाता है।
परिवारों के लिए सहारा—“राजीव सर”
देश भर के कई परिवार उन्हें कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शक मानते हैं। बच्चों के बीच वे “राजीव सर” के नाम से जाने जाते हैं।
उनका संदेश—
“दिव्यांगता क्षमता को सीमित नहीं करती, अवसरों की कमी करती है।”
नीति निर्माण में विशेषज्ञता की संभावित भूमिका
पुरस्कार के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव भट्ट की समझ और अनुभव को आगामी शिक्षा एवं समावेशन नीतियों में और अधिक स्थान मिल सकता है। मंत्रालय ने भी ऐसे विशेषज्ञों को राष्ट्रीय परामर्श तंत्र में शामिल करने की इच्छा जताई है।
यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश में समावेशी शिक्षा और दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर बदलती सोच का संकेत भी है।
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दिव्यांग सशक्तिकरण में उल्लेखनीय योगदान, भट्ट को राष्ट्र का शीर्ष पुरस्कार
Ankita Suman
देश में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और समावेशी शिक्षा की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे विशेषज्ञ राजीव भट्ट को वर्ष 2025 के ‘दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 10 दिसंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किया।
इस सम्मान को शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसे व्यक्तित्व की स्वीकृति माना जा रहा है, जिसने तीन दशकों तक देश भर में सीखने की विविधताओं—डिस्लेक्सिया, ऑटिज़्म, ADHD सहित—के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का कार्य किया।
पूरे देश में सीखने की विविधताओं पर समझ विकसित करने का योगदान
केंद्र सरकार के अनुसार, पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने दिव्यांगजनों के अधिकारों और अवसरों को बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो।
राजीव भट्ट ने 1990 के दशक से ऐसे परिवारों और बच्चों के लिए अभियान चलाया, जो भ्रम, सामाजिक कलंक और गलत धारणाओं के बीच संघर्ष कर रहे थे।
उन्होंने देश में—
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शिक्षक प्रशिक्षण,
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माता–पिता परामर्श,
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सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम,
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और समावेशी शिक्षा मॉडल
को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाई।
समावेशन पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकें
भट्ट की दो पुस्तकें—ऑटिज़्म को समझना और पठन-दोष को समझना—सामाजिक बदलाव का आधार मानी जाती हैं।
पहली पुस्तक ऑटिज़्म के शुरुआती लक्षण, संवेदनात्मक आवश्यकताओं और सीखने की शैली को सरल भाषा में समझाती है, जबकि दूसरी डिस्लेक्सिया पर केंद्रित है और शिक्षकों को कक्षा में उपयोगी रणनीतियाँ प्रदान करती है। दोनों पुस्तकों ने समाज में फैली कई मिथकों को चुनौती दी है।
‘अध्ययन समावेशी शिक्षण केंद्र’—व्यक्तिगत शिक्षा योजना का राष्ट्रीय मॉडल
राजीव भट्ट द्वारा स्थापित “अध्ययन समावेशी शिक्षण केंद्र” आज देश में समावेशी शिक्षा के सबसे प्रभावी मॉडलों में माना जाता है।
यह केंद्र बच्चों को उनकी क्षमता और गति के अनुरूप—
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शैक्षणिक,
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भावनात्मक,
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और व्यावसायिक प्रशिक्षण
प्रदान करता है।
यहाँ पाक-कला, डिजिटल डिज़ाइन, आतिथ्य सेवा, संगीत, खेल और कला जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार का अवसर दिया जाता है।
परिवारों के लिए सहारा—“राजीव सर”
देश भर के कई परिवार उन्हें कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शक मानते हैं। बच्चों के बीच वे “राजीव सर” के नाम से जाने जाते हैं।
उनका संदेश—
“दिव्यांगता क्षमता को सीमित नहीं करती, अवसरों की कमी करती है।”
नीति निर्माण में विशेषज्ञता की संभावित भूमिका
पुरस्कार के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव भट्ट की समझ और अनुभव को आगामी शिक्षा एवं समावेशन नीतियों में और अधिक स्थान मिल सकता है। मंत्रालय ने भी ऐसे विशेषज्ञों को राष्ट्रीय परामर्श तंत्र में शामिल करने की इच्छा जताई है।
यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश में समावेशी शिक्षा और दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर बदलती सोच का संकेत भी है।
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