Shreya Eye Centre: मोतियाबिंद की नवीनतम तकनीक - अब बिना ब्लेड, बिना टाँके और बिना इंजेक्शन

डॉ. राकेश गुप्ता से विशेष बातचीत

भारत में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और समय पर सही उपचार न मिलने पर ये गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में अनुभवी चिकित्सक, आधुनिक तकनीक और भरोसेमंद संस्थान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। आज हम मोतीबिंद जैसी आम लेकिन गंभीर आंख की बीमारी पर चर्चा कर रहे हैं, जो विशेष रूप से उम्र बढ़ने के साथ लोगों को प्रभावित करती है। इस विषय पर हमारी विशेष बातचीत हुई डॉ. राकेश गुप्ता से, जिन्हें कई मरीज Best eye doctor और Best ophthalmologist के रूप में जानते हैं। उनका अनुभव, तकनीकी समझ और मरीजों के प्रति समर्पण उन्हें एक विश्वसनीय नाम बनाता है।

प्रश्न: डॉ. गुप्ता, सबसे पहले बताइए कि मोतीबिंद क्या है और यह क्यों होता है?
उत्तर (डॉ. राकेश गुप्ता):
मोतीबिंद आंख के प्राकृतिक लेंस का धुंधला हो जाना है, जिससे दृष्टि धीरे-धीरे कम होने लगती है और रोजमर्रा के कामों में परेशानी आने लगती है। शुरुआत में मरीज को हल्की धुंध, रोशनी के चारों ओर घेरा दिखना या रंग फीके लगना जैसी शिकायत होती है, लेकिन समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है। यह आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होता है, क्योंकि लेंस की संरचना में बदलाव आने लगता है। इसके अलावा मधुमेह, आंख में पुरानी चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड जैसी दवाओं का सेवन या आनुवंशिक कारणों से भी मोतीबिंद हो सकता है। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह अंधत्व का कारण बन सकता है, इसलिए जागरूकता और नियमित जांच बहुत जरूरी है।

प्रश्न: आजकल मोतीबिंद के इलाज में कौन-सी नई तकनीक उपलब्ध है?
उत्तर:
आज मोतीबिंद का इलाज फेम्टोसेकंड लेज़र आधारित रोबोटिक तकनीक Z8 FLACS से किया जा रहा है, जो आधुनिक नेत्र चिकित्सा में एक बड़ा बदलाव है। यह एक ब्लेडलेस यानी बिना चाकू की सर्जरी है, जिसमें अत्यंत सटीक लेज़र तकनीक का उपयोग होता है। इस प्रक्रिया में आंख पर बहुत कम दबाव पड़ता है और सर्जरी के महत्वपूर्ण चरण जैसे चीरा बनाना, लेंस को तोड़ना और कैप्सूल को खोलना लेज़र की मदद से किए जाते हैं। इससे सर्जरी अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और परिणामों के लिहाज से बेहतर हो जाती है, जो मरीजों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से राहत देने वाली होती है।

प्रश्न: यह नई तकनीक पारंपरिक सर्जरी से कैसे बेहतर है?
उत्तर:
पारंपरिक मोतीबिंद सर्जरी में कई चरण सर्जन के हाथों से किए जाते हैं, जिसमें अनुभव के बावजूद सूक्ष्म स्तर पर अंतर संभव होता है। वहीं Z8 FLACS तकनीक में माइक्रोन स्तर की सटीकता मिलती है, जिससे आंख के टिशू को न्यूनतम नुकसान होता है। सर्जरी का समय कम हो जाता है, सूजन और दर्द कम होता है और मरीज को जल्दी स्पष्ट दृष्टि मिलती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी है जो प्रीमियम विज़न क्वालिटी चाहते हैं या जिनकी आंखों की संरचना थोड़ी जटिल होती है।

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प्रश्न: आप 25 वर्षों से सर्जरी कर रहे हैं। आपके अनुभव में तकनीक की क्या भूमिका है?
उत्तर:
 
तकनीक चिकित्सा को बेहतर बनाती है, लेकिन अनुभव उसका मजबूत आधार होता है। मैं पिछले 25 वर्षों से नेत्र सर्जरी कर रहा हूं और एक एम्बिडेक्स्ट्रस आई सर्जन हूं, यानी दोनों हाथों से समान दक्षता से सर्जरी करता हूं। वर्षों का अनुभव मुझे हर प्रकार के केस को समझने और सही निर्णय लेने में मदद करता है। आधुनिक तकनीक और अनुभवी सर्जन जब एक साथ काम करते हैं, तभी सुरक्षित, सटीक और सफल सर्जरी संभव होती है, जो मरीज की उम्मीदों पर खरी उतरती है।

प्रश्न: मोतीबिंद सर्जरी में कौन-कौन से IOLs (लेंस) उपलब्ध हैं?
 
उत्तर:
आज मरीजों के लिए कई प्रकार के इंट्राओक्यूलर लेंस उपलब्ध हैं, जिनमें मोनोफोकल लेंस, मल्टीफोकल लेंस, टॉरिक लेंस जो चश्मे की पावर को ठीक करने में मदद करते हैं, और प्रीमियम IOLs शामिल हैं। हर लेंस की अपनी विशेषता होती है और यह अलग-अलग जरूरतों को पूरा करता है। सही लेंस का चयन सर्जरी के परिणाम को और बेहतर बनाता है।

प्रश्न: क्या सभी मरीजों के लिए एक ही लेंस सही होता है?
 
उत्तर:
 
नहीं, हर मरीज की आंखों की स्थिति, उम्र, काम करने का तरीका और जीवनशैली अलग होती है। इसलिए सर्जरी से पहले पूरी जांच की जाती है, जिसमें आंख की माप, कॉर्निया की स्थिति और रेटिना का मूल्यांकन शामिल होता है। इसी आधार पर सही IOL चुना जाता है, ताकि मरीज को लंबे समय तक संतोषजनक और स्पष्ट दृष्टि मिल सके।

प्रश्न: सर्जरी के बाद मरीज को किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
 
उत्तर:
 
सर्जरी के बाद आंख को रगड़ने से बचना चाहिए, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए, धूल और पानी से आंख की सुरक्षा करनी चाहिए, फॉलो-अप विज़िट समय पर करनी चाहिए और कुछ दिनों तक भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। इन सावधानियों से रिकवरी तेज होती है और किसी भी जटिलता का खतरा कम हो जाता है।

प्रश्न: अंत में मरीजों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
 
उत्तर:
 
यदि आपकी दृष्टि धुंधली हो रही है, रोशनी में परेशानी हो रही है या आंखों से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और आधुनिक तकनीक से मोतीबिंद का इलाज पूरी तरह सुरक्षित और सफल है। सही अस्पताल, अनुभवी सर्जन और उच्च गुणवत्ता मानकों वाली सुविधा का चयन आपकी आंखों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

Website - https://www.rakeshgupta.com/ 

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