आधार में फोटो बदलकर किसान की जमीन हड़पी गई: रिश्तेदारों-दलालों की साजिश से फर्जी रजिस्ट्री, 8 पर FIR

ग्वालियर (म.प्र.)

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ग्वालियर में करोड़ों की कृषि भूमि घोटाले का खुलासा, प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में जमीन फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक किसान की कृषि भूमि उसके ही रिश्तेदारों और प्रॉपर्टी दलालों ने मिलकर बेच दी। आरोपियों ने किसान के आधार कार्ड में फोटो बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जमीन की रजिस्ट्री करा दी। पीड़ित किसान को इस धोखाधड़ी की जानकारी तब लगी, जब वह अपनी जमीन पर बैंक लोन लेने पहुंचा।

मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के गिरगांव गांव से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि करीब 11 बीघा जमीन को योजनाबद्ध तरीके से पहले कागजों में अपने कब्जे में लिया गया और फिर खरीद-फरोख्त पूरी की गई। जमीन की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।

लोन आवेदन से खुला फर्जीवाड़ा

पीड़ित किसान जब बैंक पहुंचा, तो रिकॉर्ड में जमीन पहले से किसी और के नाम दर्ज मिली। इसके बाद उसने रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज निकलवाए, जहां फर्जी रजिस्ट्री की पुष्टि हुई। किसान ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।

आधार कार्ड से बदली पहचान

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने किसान के आधार कार्ड पर अपने साथियों की तस्वीर चस्पा कर दी थी। इसी फर्जी पहचान के आधार पर मुख्तारनामा तैयार कराया गया और रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की गई। यह पूरा खेल बिना किसान की जानकारी के किया गया।

8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

महाराजपुरा थाना पुलिस ने जमीन बेचने और खरीदने से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में रिश्तेदार, स्थानीय दलाल और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोग शामिल हैं। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर सवाल

एफआईआर में तत्कालीन उप पंजीयक का नाम भी दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत हुई। जिन कार्यों में सामान्यतः महीनों लगते हैं, वे इस मामले में कुछ ही दिनों में पूरे कर लिए गए।

पुलिस जांच का दायरा बढ़ा

सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार के अनुसार, यह स्पष्ट हो चुका है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन का नामांतरण कराया गया। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आधार कार्ड में बदलाव किस स्तर पर और किसकी मदद से किया गया।

यह मामला न सिर्फ किसानों की संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि जमीन रजिस्ट्री और पहचान सत्यापन प्रणाली की खामियों को भी उजागर करता है।

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