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12 बार Google से रिजेक्ट, 13वीं कोशिश में मिली नौकरी; टेक प्रोफेशनल की कहानी हुई वायरल
Digital Desk
सौम्यदीप पॉल का दावा- Google ने 12 और Microsoft ने 16 बार किया रिजेक्ट, Amazon से भी तीन बार मिली निराशा; लगातार तैयारी और सही जॉब स्ट्रैटेजी से आखिरकार हासिल किया बड़ा मौका
नौकरी के लिए बार-बार रिजेक्शन मिलने के बाद अक्सर उम्मीदवार अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते हैं, लेकिन दिल्ली के टेक प्रोफेशनल सौम्यदीप पॉल की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। उनका दावा है कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में जगह बनाने से पहले उन्हें एक-दो नहीं, बल्कि 12 बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी और आखिरकार 13वीं कोशिश में Google में नौकरी हासिल करने में सफल रहे।
सौम्यदीप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने जॉब सर्च के अनुभव साझा किए। उनकी पोस्ट के मुताबिक, केवल Google ही नहीं बल्कि दूसरी बड़ी टेक कंपनियों में भी उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि Microsoft से उन्हें 16 बार रिजेक्शन मिला, जबकि Amazon ने तीन बार उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया। Apple और Oracle जैसी कंपनियों से तो इंटरव्यू का मौका तक नहीं मिला।
इतनी बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने आवेदन करना बंद नहीं किया। इसके बजाय हर रिजेक्शन के बाद अपनी प्रोफाइल और तैयारी में मौजूद कमियों को समझने की कोशिश की। उन्होंने रिज्यूमे में बदलाव किए, तकनीकी कौशल पर काम किया और इंटरव्यू की तैयारी को पहले से ज्यादा व्यवस्थित किया।
उनकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आने की एक बड़ी वजह रिजेक्शन की संख्या है। आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी से लगातार कुछ बार जवाब नहीं मिलने के बाद उम्मीदवार दूसरी कंपनियों की ओर रुख कर लेते हैं। सौम्यदीप ने भी दूसरे विकल्प तलाशे, लेकिन जिन कंपनियों में काम करने का लक्ष्य बनाया था, वहां दोबारा आवेदन करने से पीछे नहीं हटे।
सिर्फ ज्यादा आवेदन करना सफलता की गारंटी नहीं
अपने अनुभव के आधार पर सौम्यदीप ने नौकरी तलाश रहे उम्मीदवारों को केवल बड़ी संख्या में आवेदन भेजने की रणनीति से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी भी पद के लिए अप्लाई करने से पहले उसकी जॉब डिस्क्रिप्शन को ध्यान से समझना जरूरी है।
उम्मीदवार को देखना चाहिए कि कंपनी जिस अनुभव, टेक्निकल स्किल और योग्यता की मांग कर रही है, उसका अपना प्रोफाइल उससे कितना मेल खाता है। बिना भूमिका समझे अलग-अलग पदों पर लगातार आवेदन भेजने से बेहतर है कि उन नौकरियों को प्राथमिकता दी जाए, जिनके लिए उम्मीदवार की प्रोफाइल वास्तव में उपयुक्त हो।
उनके मुताबिक, टारगेटेड तरीके से आवेदन करने पर उम्मीदवार अपने रिज्यूमे को संबंधित भूमिका के अनुसार बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया के शुरुआती चरण में प्रोफाइल के नजर आने की संभावना भी बेहतर हो सकती है।
HR या रिक्रूटर तक पहुंचने की कोशिश
सौम्यदीप ने दूसरी सलाह नेटवर्किंग को लेकर दी। उनका सुझाव है कि अगर किसी उम्मीदवार का परिचित उस कंपनी में पहले से काम करता है, जहां उसने आवेदन किया है, तो उससे संबंधित HR या रिक्रूटर की प्रोफेशनल कॉन्टैक्ट डिटेल मांगी जा सकती है।
आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवार संबंधित जॉब आईडी के साथ अपना रिज्यूमे रिक्रूटर तक भेज सकता है। हालांकि ऐसा करते समय संदेश छोटा, स्पष्ट और पूरी तरह प्रोफेशनल होना चाहिए। इसका उद्देश्य बार-बार संपर्क करके दबाव बनाना नहीं, बल्कि संबंधित भर्ती टीम तक अपनी उम्मीदवारी की जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।
LinkedIn पर नेटवर्किंग भी बन सकती है रास्ता
तीसरी सलाह प्रोफेशनल नेटवर्किंग से जुड़ी है। सौम्यदीप ने बताया कि उन्होंने खुद इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन कई उम्मीदवार LinkedIn के जरिए रिक्रूटर्स और हायरिंग मैनेजर्स से संपर्क करके अवसर तलाशते हैं।
उनके मुताबिक, किसी कंपनी में उपयुक्त वैकेंसी मिलने पर संबंधित टीम के रिक्रूटर या हायरिंग मैनेजर को एक संक्षिप्त और प्रोफेशनल मैसेज भेजा जा सकता है। इसमें अपनी योग्यता, संबंधित अनुभव और उस खास भूमिका में रुचि की जानकारी दी जा सकती है।
रिजेक्शन के बाद बदली तैयारी
सौम्यदीप के अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि उन्होंने रिजेक्शन को केवल असफल आवेदन की तरह नहीं देखा। हर प्रयास के बाद उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि उनकी तैयारी में क्या बदलाव किया जा सकता है।
टेक कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया में आमतौर पर तकनीकी ज्ञान के अलावा प्रॉब्लम सॉल्विंग, कोडिंग, सिस्टम से जुड़ी समझ, कम्युनिकेशन और अलग-अलग इंटरव्यू राउंड में प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो सकता है। भूमिका और अनुभव के स्तर के आधार पर भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग होती है। ऐसे में एक ही तैयारी के साथ लगातार आवेदन करने के बजाय पिछले अनुभव के आधार पर रणनीति बदलना जरूरी हो सकता है।
सोशल मीडिया पर कहानी ने खींचा ध्यान
उनकी पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने लगातार रिजेक्शन के बावजूद प्रयास जारी रखने को प्रेरणादायक बताया। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ आवेदन की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि हर असफल कोशिश के बाद उम्मीदवार ने अपनी तैयारी में कितना सुधार किया, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
वहीं कुछ प्रोफेशनल्स ने टेक इंडस्ट्री की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे पहलुओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई, बड़ी कंपनियों में पहले का अनुभव, मजबूत नेटवर्क और रेफरल जैसे कारक भी किसी उम्मीदवार की प्रोफाइल को फायदा पहुंचा सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति का भर्ती अनुभव एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
सौम्यदीप की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, Google से 12 बार रिजेक्शन मिलने के बाद उनका अगला प्रयास सफल रहा। Microsoft से भी कई बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी। उनके अनुभव से सामने आए सुझावों में सबसे ज्यादा जोर सही भूमिका चुनने, अपनी प्रोफाइल को नौकरी की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने और रिक्रूटर्स तक प्रोफेशनल तरीके से पहुंच बनाने पर रहा।
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12 बार Google से रिजेक्ट, 13वीं कोशिश में मिली नौकरी; टेक प्रोफेशनल की कहानी हुई वायरल
Digital Desk
नौकरी के लिए बार-बार रिजेक्शन मिलने के बाद अक्सर उम्मीदवार अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते हैं, लेकिन दिल्ली के टेक प्रोफेशनल सौम्यदीप पॉल की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। उनका दावा है कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में जगह बनाने से पहले उन्हें एक-दो नहीं, बल्कि 12 बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी और आखिरकार 13वीं कोशिश में Google में नौकरी हासिल करने में सफल रहे।
सौम्यदीप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने जॉब सर्च के अनुभव साझा किए। उनकी पोस्ट के मुताबिक, केवल Google ही नहीं बल्कि दूसरी बड़ी टेक कंपनियों में भी उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि Microsoft से उन्हें 16 बार रिजेक्शन मिला, जबकि Amazon ने तीन बार उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया। Apple और Oracle जैसी कंपनियों से तो इंटरव्यू का मौका तक नहीं मिला।
इतनी बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने आवेदन करना बंद नहीं किया। इसके बजाय हर रिजेक्शन के बाद अपनी प्रोफाइल और तैयारी में मौजूद कमियों को समझने की कोशिश की। उन्होंने रिज्यूमे में बदलाव किए, तकनीकी कौशल पर काम किया और इंटरव्यू की तैयारी को पहले से ज्यादा व्यवस्थित किया।
उनकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आने की एक बड़ी वजह रिजेक्शन की संख्या है। आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी से लगातार कुछ बार जवाब नहीं मिलने के बाद उम्मीदवार दूसरी कंपनियों की ओर रुख कर लेते हैं। सौम्यदीप ने भी दूसरे विकल्प तलाशे, लेकिन जिन कंपनियों में काम करने का लक्ष्य बनाया था, वहां दोबारा आवेदन करने से पीछे नहीं हटे।
सिर्फ ज्यादा आवेदन करना सफलता की गारंटी नहीं
अपने अनुभव के आधार पर सौम्यदीप ने नौकरी तलाश रहे उम्मीदवारों को केवल बड़ी संख्या में आवेदन भेजने की रणनीति से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी भी पद के लिए अप्लाई करने से पहले उसकी जॉब डिस्क्रिप्शन को ध्यान से समझना जरूरी है।
उम्मीदवार को देखना चाहिए कि कंपनी जिस अनुभव, टेक्निकल स्किल और योग्यता की मांग कर रही है, उसका अपना प्रोफाइल उससे कितना मेल खाता है। बिना भूमिका समझे अलग-अलग पदों पर लगातार आवेदन भेजने से बेहतर है कि उन नौकरियों को प्राथमिकता दी जाए, जिनके लिए उम्मीदवार की प्रोफाइल वास्तव में उपयुक्त हो।
उनके मुताबिक, टारगेटेड तरीके से आवेदन करने पर उम्मीदवार अपने रिज्यूमे को संबंधित भूमिका के अनुसार बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया के शुरुआती चरण में प्रोफाइल के नजर आने की संभावना भी बेहतर हो सकती है।
HR या रिक्रूटर तक पहुंचने की कोशिश
सौम्यदीप ने दूसरी सलाह नेटवर्किंग को लेकर दी। उनका सुझाव है कि अगर किसी उम्मीदवार का परिचित उस कंपनी में पहले से काम करता है, जहां उसने आवेदन किया है, तो उससे संबंधित HR या रिक्रूटर की प्रोफेशनल कॉन्टैक्ट डिटेल मांगी जा सकती है।
आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवार संबंधित जॉब आईडी के साथ अपना रिज्यूमे रिक्रूटर तक भेज सकता है। हालांकि ऐसा करते समय संदेश छोटा, स्पष्ट और पूरी तरह प्रोफेशनल होना चाहिए। इसका उद्देश्य बार-बार संपर्क करके दबाव बनाना नहीं, बल्कि संबंधित भर्ती टीम तक अपनी उम्मीदवारी की जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।
LinkedIn पर नेटवर्किंग भी बन सकती है रास्ता
तीसरी सलाह प्रोफेशनल नेटवर्किंग से जुड़ी है। सौम्यदीप ने बताया कि उन्होंने खुद इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन कई उम्मीदवार LinkedIn के जरिए रिक्रूटर्स और हायरिंग मैनेजर्स से संपर्क करके अवसर तलाशते हैं।
उनके मुताबिक, किसी कंपनी में उपयुक्त वैकेंसी मिलने पर संबंधित टीम के रिक्रूटर या हायरिंग मैनेजर को एक संक्षिप्त और प्रोफेशनल मैसेज भेजा जा सकता है। इसमें अपनी योग्यता, संबंधित अनुभव और उस खास भूमिका में रुचि की जानकारी दी जा सकती है।
रिजेक्शन के बाद बदली तैयारी
सौम्यदीप के अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि उन्होंने रिजेक्शन को केवल असफल आवेदन की तरह नहीं देखा। हर प्रयास के बाद उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि उनकी तैयारी में क्या बदलाव किया जा सकता है।
टेक कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया में आमतौर पर तकनीकी ज्ञान के अलावा प्रॉब्लम सॉल्विंग, कोडिंग, सिस्टम से जुड़ी समझ, कम्युनिकेशन और अलग-अलग इंटरव्यू राउंड में प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो सकता है। भूमिका और अनुभव के स्तर के आधार पर भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग होती है। ऐसे में एक ही तैयारी के साथ लगातार आवेदन करने के बजाय पिछले अनुभव के आधार पर रणनीति बदलना जरूरी हो सकता है।
सोशल मीडिया पर कहानी ने खींचा ध्यान
उनकी पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने लगातार रिजेक्शन के बावजूद प्रयास जारी रखने को प्रेरणादायक बताया। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ आवेदन की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि हर असफल कोशिश के बाद उम्मीदवार ने अपनी तैयारी में कितना सुधार किया, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
वहीं कुछ प्रोफेशनल्स ने टेक इंडस्ट्री की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे पहलुओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई, बड़ी कंपनियों में पहले का अनुभव, मजबूत नेटवर्क और रेफरल जैसे कारक भी किसी उम्मीदवार की प्रोफाइल को फायदा पहुंचा सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति का भर्ती अनुभव एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
सौम्यदीप की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, Google से 12 बार रिजेक्शन मिलने के बाद उनका अगला प्रयास सफल रहा। Microsoft से भी कई बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी। उनके अनुभव से सामने आए सुझावों में सबसे ज्यादा जोर सही भूमिका चुनने, अपनी प्रोफाइल को नौकरी की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने और रिक्रूटर्स तक प्रोफेशनल तरीके से पहुंच बनाने पर रहा।
