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रायगढ़ में जमीन विवाद के दौरान कुल्हाड़ी से हत्या, दोषी को उम्रकैद; पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की सिफारिश
रायगढ़
नवापाली गांव में जमीन समतलीकरण के दौरान हुए विवाद ने लिया था हिंसक रूप; सिर और गर्दन पर कुल्हाड़ी से किए गए थे कई वार, कोर्ट ने गवाहों और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर सुनाई सजा
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जमीन से जुड़े विवाद के दौरान एक युवक की कुल्हाड़ी से हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। छठे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले में पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर हरिलाल खड़िया को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उम्रकैद के साथ उस पर ₹100 का जुर्माना भी लगाया है।
मामला 28 जनवरी 2024 का है। रायगढ़ के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के नवापाली गांव में मुख्य सड़क के पास एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मृतक की पहचान विशाल सिंह ठाकुर के रूप में हुई। उसके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटों के निशान थे। शुरुआती जांच में ही यह सामने आया कि युवक पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया था।
सूचना मिलते ही चक्रधर नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की। पुलिस ने मौके का निरीक्षण करने के साथ वहां मौजूद भौतिक साक्ष्यों को कब्जे में लिया। आसपास मौजूद लोगों और घटना से संबंधित जानकारी रखने वालों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच आगे बढ़ने पर जमीन से जुड़ा विवाद हत्या की मुख्य वजह के रूप में सामने आया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय विशाल सिंह ठाकुर एक विवादित जमीन पर समतलीकरण और झाड़ियों की सफाई के काम की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान जमीन पर मिट्टी डालने को लेकर उसका हरिलाल खड़िया से विवाद हो गया। शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही समय में विवाद हिंसक हो गया।
आरोप था कि हरिलाल ने गुस्से में कुल्हाड़ी से विशाल पर हमला कर दिया। उसके सिर और गर्दन के हिस्से पर एक के बाद एक कई वार किए गए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण विशाल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया, जबकि पुलिस को बाद में युवक की हत्या की जानकारी मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त कीं। इनमें मृतक की मोटरसाइकिल, खून के निशान वाली टोपी, चश्मा, जूते-चप्पल और घटनास्थल से लिए गए मिट्टी के नमूने शामिल थे। पुलिस ने इन वस्तुओं को सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा, ताकि हत्या की परिस्थितियों और आरोपी से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि की जा सके।
घटना के अगले दिन यानी 29 जनवरी 2024 को पुलिस ने हरिलाल खड़िया को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद की। इसके अलावा आरोपी से जुड़े खून के धब्बों वाले कपड़े भी जब्त किए गए। इन सभी वस्तुओं को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया।
फोरेंसिक जांच से प्राप्त रिपोर्ट को बाद में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच, घटनास्थल से बरामद सामग्री, हथियार की बरामदगी और गवाहों के बयानों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम स्थापित करने की कोशिश की गई।
इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रशांत राव अहेर के नेतृत्व में की गई, जबकि अदालत में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 20 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें घटना और जांच से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल थे।
अभियोजन ने मौखिक गवाही के साथ दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी कोर्ट के सामने रखे। घटनास्थल से जब्त वस्तुओं, मेडिकल और फोरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों तथा हथियार की बरामदगी को मामले की परिस्थितियों से जोड़कर पेश किया गया। बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों का परीक्षण किया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। इसके बाद हरिलाल खड़िया को हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषी की उम्र करीब 30 वर्ष बताई गई है। अदालत ने उस पर ₹100 का अर्थदंड भी लगाया।
सजा सुनाने के साथ अदालत ने मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और हत्या से पड़े प्रभाव को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत विशाल सिंह ठाकुर के आश्रित परिवार को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की सिफारिश की है। यह सहायता आपराधिक घटना से प्रभावित परिवार को राहत उपलब्ध कराने वाली राज्य की व्यवस्था के तहत प्रस्तावित की गई है।
जनवरी 2024 में हुई हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी, कथित हथियार की बरामदगी और फोरेंसिक परीक्षण तक अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाए थे। करीब दो साल से अधिक चली न्यायिक प्रक्रिया में इन्हीं साक्ष्यों के साथ 20 गवाहों की गवाही अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद हरिलाल खड़िया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जमीन से जुड़े विवाद के दौरान एक युवक की कुल्हाड़ी से हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। छठे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले में पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर हरिलाल खड़िया को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उम्रकैद के साथ उस पर ₹100 का जुर्माना भी लगाया है।
मामला 28 जनवरी 2024 का है। रायगढ़ के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के नवापाली गांव में मुख्य सड़क के पास एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मृतक की पहचान विशाल सिंह ठाकुर के रूप में हुई। उसके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटों के निशान थे। शुरुआती जांच में ही यह सामने आया कि युवक पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया था।
सूचना मिलते ही चक्रधर नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की। पुलिस ने मौके का निरीक्षण करने के साथ वहां मौजूद भौतिक साक्ष्यों को कब्जे में लिया। आसपास मौजूद लोगों और घटना से संबंधित जानकारी रखने वालों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच आगे बढ़ने पर जमीन से जुड़ा विवाद हत्या की मुख्य वजह के रूप में सामने आया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय विशाल सिंह ठाकुर एक विवादित जमीन पर समतलीकरण और झाड़ियों की सफाई के काम की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान जमीन पर मिट्टी डालने को लेकर उसका हरिलाल खड़िया से विवाद हो गया। शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही समय में विवाद हिंसक हो गया।
आरोप था कि हरिलाल ने गुस्से में कुल्हाड़ी से विशाल पर हमला कर दिया। उसके सिर और गर्दन के हिस्से पर एक के बाद एक कई वार किए गए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण विशाल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया, जबकि पुलिस को बाद में युवक की हत्या की जानकारी मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त कीं। इनमें मृतक की मोटरसाइकिल, खून के निशान वाली टोपी, चश्मा, जूते-चप्पल और घटनास्थल से लिए गए मिट्टी के नमूने शामिल थे। पुलिस ने इन वस्तुओं को सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा, ताकि हत्या की परिस्थितियों और आरोपी से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि की जा सके।
घटना के अगले दिन यानी 29 जनवरी 2024 को पुलिस ने हरिलाल खड़िया को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद की। इसके अलावा आरोपी से जुड़े खून के धब्बों वाले कपड़े भी जब्त किए गए। इन सभी वस्तुओं को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया।
फोरेंसिक जांच से प्राप्त रिपोर्ट को बाद में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच, घटनास्थल से बरामद सामग्री, हथियार की बरामदगी और गवाहों के बयानों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम स्थापित करने की कोशिश की गई।
इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रशांत राव अहेर के नेतृत्व में की गई, जबकि अदालत में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 20 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें घटना और जांच से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल थे।
अभियोजन ने मौखिक गवाही के साथ दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी कोर्ट के सामने रखे। घटनास्थल से जब्त वस्तुओं, मेडिकल और फोरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों तथा हथियार की बरामदगी को मामले की परिस्थितियों से जोड़कर पेश किया गया। बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों का परीक्षण किया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। इसके बाद हरिलाल खड़िया को हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषी की उम्र करीब 30 वर्ष बताई गई है। अदालत ने उस पर ₹100 का अर्थदंड भी लगाया।
सजा सुनाने के साथ अदालत ने मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और हत्या से पड़े प्रभाव को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत विशाल सिंह ठाकुर के आश्रित परिवार को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की सिफारिश की है। यह सहायता आपराधिक घटना से प्रभावित परिवार को राहत उपलब्ध कराने वाली राज्य की व्यवस्था के तहत प्रस्तावित की गई है।
जनवरी 2024 में हुई हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी, कथित हथियार की बरामदगी और फोरेंसिक परीक्षण तक अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाए थे। करीब दो साल से अधिक चली न्यायिक प्रक्रिया में इन्हीं साक्ष्यों के साथ 20 गवाहों की गवाही अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद हरिलाल खड़िया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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मामला 28 जनवरी 2024 का है। रायगढ़ के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के नवापाली गांव में मुख्य सड़क के पास एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मृतक की पहचान विशाल सिंह ठाकुर के रूप में हुई। उसके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटों के निशान थे। शुरुआती जांच में ही यह सामने आया कि युवक पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया था।
सूचना मिलते ही चक्रधर नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की। पुलिस ने मौके का निरीक्षण करने के साथ वहां मौजूद भौतिक साक्ष्यों को कब्जे में लिया। आसपास मौजूद लोगों और घटना से संबंधित जानकारी रखने वालों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच आगे बढ़ने पर जमीन से जुड़ा विवाद हत्या की मुख्य वजह के रूप में सामने आया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय विशाल सिंह ठाकुर एक विवादित जमीन पर समतलीकरण और झाड़ियों की सफाई के काम की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान जमीन पर मिट्टी डालने को लेकर उसका हरिलाल खड़िया से विवाद हो गया। शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही समय में विवाद हिंसक हो गया।
आरोप था कि हरिलाल ने गुस्से में कुल्हाड़ी से विशाल पर हमला कर दिया। उसके सिर और गर्दन के हिस्से पर एक के बाद एक कई वार किए गए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण विशाल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया, जबकि पुलिस को बाद में युवक की हत्या की जानकारी मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त कीं। इनमें मृतक की मोटरसाइकिल, खून के निशान वाली टोपी, चश्मा, जूते-चप्पल और घटनास्थल से लिए गए मिट्टी के नमूने शामिल थे। पुलिस ने इन वस्तुओं को सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा, ताकि हत्या की परिस्थितियों और आरोपी से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि की जा सके।
घटना के अगले दिन यानी 29 जनवरी 2024 को पुलिस ने हरिलाल खड़िया को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद की। इसके अलावा आरोपी से जुड़े खून के धब्बों वाले कपड़े भी जब्त किए गए। इन सभी वस्तुओं को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया।
फोरेंसिक जांच से प्राप्त रिपोर्ट को बाद में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच, घटनास्थल से बरामद सामग्री, हथियार की बरामदगी और गवाहों के बयानों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम स्थापित करने की कोशिश की गई।
इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रशांत राव अहेर के नेतृत्व में की गई, जबकि अदालत में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 20 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें घटना और जांच से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल थे।
अभियोजन ने मौखिक गवाही के साथ दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी कोर्ट के सामने रखे। घटनास्थल से जब्त वस्तुओं, मेडिकल और फोरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों तथा हथियार की बरामदगी को मामले की परिस्थितियों से जोड़कर पेश किया गया। बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों का परीक्षण किया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। इसके बाद हरिलाल खड़िया को हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषी की उम्र करीब 30 वर्ष बताई गई है। अदालत ने उस पर ₹100 का अर्थदंड भी लगाया।
सजा सुनाने के साथ अदालत ने मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और हत्या से पड़े प्रभाव को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत विशाल सिंह ठाकुर के आश्रित परिवार को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की सिफारिश की है। यह सहायता आपराधिक घटना से प्रभावित परिवार को राहत उपलब्ध कराने वाली राज्य की व्यवस्था के तहत प्रस्तावित की गई है।
जनवरी 2024 में हुई हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी, कथित हथियार की बरामदगी और फोरेंसिक परीक्षण तक अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाए थे। करीब दो साल से अधिक चली न्यायिक प्रक्रिया में इन्हीं साक्ष्यों के साथ 20 गवाहों की गवाही अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद हरिलाल खड़िया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जमीन से जुड़े विवाद के दौरान एक युवक की कुल्हाड़ी से हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। छठे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले में पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर हरिलाल खड़िया को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उम्रकैद के साथ उस पर ₹100 का जुर्माना भी लगाया है।
मामला 28 जनवरी 2024 का है। रायगढ़ के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के नवापाली गांव में मुख्य सड़क के पास एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मृतक की पहचान विशाल सिंह ठाकुर के रूप में हुई। उसके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटों के निशान थे। शुरुआती जांच में ही यह सामने आया कि युवक पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया था।
सूचना मिलते ही चक्रधर नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की। पुलिस ने मौके का निरीक्षण करने के साथ वहां मौजूद भौतिक साक्ष्यों को कब्जे में लिया। आसपास मौजूद लोगों और घटना से संबंधित जानकारी रखने वालों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच आगे बढ़ने पर जमीन से जुड़ा विवाद हत्या की मुख्य वजह के रूप में सामने आया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय विशाल सिंह ठाकुर एक विवादित जमीन पर समतलीकरण और झाड़ियों की सफाई के काम की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान जमीन पर मिट्टी डालने को लेकर उसका हरिलाल खड़िया से विवाद हो गया। शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही समय में विवाद हिंसक हो गया।
आरोप था कि हरिलाल ने गुस्से में कुल्हाड़ी से विशाल पर हमला कर दिया। उसके सिर और गर्दन के हिस्से पर एक के बाद एक कई वार किए गए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण विशाल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया, जबकि पुलिस को बाद में युवक की हत्या की जानकारी मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त कीं। इनमें मृतक की मोटरसाइकिल, खून के निशान वाली टोपी, चश्मा, जूते-चप्पल और घटनास्थल से लिए गए मिट्टी के नमूने शामिल थे। पुलिस ने इन वस्तुओं को सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा, ताकि हत्या की परिस्थितियों और आरोपी से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि की जा सके।
घटना के अगले दिन यानी 29 जनवरी 2024 को पुलिस ने हरिलाल खड़िया को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद की। इसके अलावा आरोपी से जुड़े खून के धब्बों वाले कपड़े भी जब्त किए गए। इन सभी वस्तुओं को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया।
फोरेंसिक जांच से प्राप्त रिपोर्ट को बाद में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच, घटनास्थल से बरामद सामग्री, हथियार की बरामदगी और गवाहों के बयानों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम स्थापित करने की कोशिश की गई।
इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रशांत राव अहेर के नेतृत्व में की गई, जबकि अदालत में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 20 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें घटना और जांच से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल थे।
अभियोजन ने मौखिक गवाही के साथ दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी कोर्ट के सामने रखे। घटनास्थल से जब्त वस्तुओं, मेडिकल और फोरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों तथा हथियार की बरामदगी को मामले की परिस्थितियों से जोड़कर पेश किया गया। बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों का परीक्षण किया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। इसके बाद हरिलाल खड़िया को हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषी की उम्र करीब 30 वर्ष बताई गई है। अदालत ने उस पर ₹100 का अर्थदंड भी लगाया।
सजा सुनाने के साथ अदालत ने मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और हत्या से पड़े प्रभाव को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत विशाल सिंह ठाकुर के आश्रित परिवार को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की सिफारिश की है। यह सहायता आपराधिक घटना से प्रभावित परिवार को राहत उपलब्ध कराने वाली राज्य की व्यवस्था के तहत प्रस्तावित की गई है।
जनवरी 2024 में हुई हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी, कथित हथियार की बरामदगी और फोरेंसिक परीक्षण तक अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाए थे। करीब दो साल से अधिक चली न्यायिक प्रक्रिया में इन्हीं साक्ष्यों के साथ 20 गवाहों की गवाही अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद हरिलाल खड़िया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
