दुर्ग में बाहरी मजदूरों के शोषण का आरोप

दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)

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राजस्थान से आए श्रमिकों ने ठेकेदार पर बंधक बनाकर मारपीट और मजदूरी रोकने का लगाया आरोप

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव से मजदूर शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां राजस्थान से कपास तोड़ने आए श्रमिकों ने ठेकेदारों पर बंधक बनाकर रखने, मारपीट करने और पूरी मजदूरी नहीं देने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित मजदूरों का दावा है कि उन्हें गोली मारने की धमकी दी गई और काम का पूरा हिसाब रखने वाली डायरी भी जला दी गई। यह मामला कुम्हारी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

पीड़ितों के अनुसार, राजस्थान के अलवर जिले से करीब 15 मजदूर—जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं—लगभग दो महीने पहले दुर्ग लाए गए थे। उन्हें कपास तोड़ने का काम दिलाने का भरोसा एक व्यक्ति द्वारा दिया गया था। बाद में इन्हें चेटवा गांव में दो भाइयों के खेत में काम पर लगाया गया। मजदूरी 10 रुपए प्रति किलो की दर से तय हुई थी।

मजदूरों का कहना है कि लगातार तीन महीने काम कराने के बाद भी उन्हें पूरी मजदूरी नहीं दी गई। पीड़ित मजदूर राजकुमार के अनुसार, कुल मेहनताना करीब 4.35 लाख रुपए बनता है, जिसमें से सिर्फ 50 हजार रुपए ही दिए गए। शेष 3.85 लाख रुपए की मांग करने पर ठेकेदारों ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी।

श्रमिकों का आरोप है कि 22 जनवरी को जब उन्होंने मजदूरी का हिसाब मांगा, तो ठेकेदारों ने वह डायरी जला दी जिसमें पूरे काम का लेखा-जोखा दर्ज था। इसी दौरान कुछ मजदूरों के साथ मारपीट की गई और करीब 10 मजदूरों तथा 2 बच्चों को खेत में जबरन रोके रखा गया। बाहर जाने से मना किया गया, जिससे सभी दहशत में आ गए।

डर के कारण कुछ मजदूर किसी तरह भागकर कुम्हारी थाने पहुंचे। हालांकि, मजदूरों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उल्टे ठेकेदारों का पक्ष लिया गया। मजदूरों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में भी उन्हें धमकियां दी गईं।

जान का खतरा महसूस होने पर सभी मजदूर देर रात खेत से निकलकर चरोदा क्षेत्र के एक मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने रात गुजारी। मजदूरों ने घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी बनाए हैं, जिनमें कथित धमकी और बातचीत की रिकॉर्डिंग है, हालांकि वीडियो में चेहरा स्पष्ट नहीं दिखता।

इसके बाद 24 जनवरी को सभी मजदूर भिलाई-3 एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने सुरक्षा, बकाया मजदूरी दिलाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

वहीं, ठेकेदार पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मजदूरों से कोई विवाद नहीं है और पूरा मामला पुलिस देख रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदार के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों को दोबारा बुलाकर मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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