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कोरबा में CSEB कॉलोनी मार्ग बंद करने की कोशिश नाकाम, जनविरोध के आगे झुका प्रबंधन
कोरबा (छ.ग.)
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की मौजूदगी में बनी सहमति, स्याहीमुड़ी मार्ग पर आवागमन यथावत रखने का फैसला
कोरबा जिले में सीएसईबी कॉलोनी से स्याहीमुड़ी को जोड़ने वाले मार्ग को बंद करने की कोशिश आखिरकार विफल हो गई। स्थानीय नागरिकों के विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद हसदेव ताप विद्युत परियोजना, दर्री के प्रबंधन को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा। प्रशासन और प्रबंधन के बीच हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया कि मार्ग को बंद नहीं किया जाएगा और आम जनता के लिए आवागमन पहले की तरह जारी रहेगा।
यह विवाद उस समय सामने आया, जब सीएसईबी प्रबंधन ने कॉलोनी से स्याहीमुड़ी जाने वाले रास्ते पर गेट लगाकर उसे बंद करने की तैयारी शुरू कर दी। प्रबंधन का तर्क था कि इस मार्ग के खुले रहने से सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और कॉलोनी प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों ने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया।
स्थानीय लोगों की आपत्ति, जनजीवन पर असर का हवाला
क्षेत्रवासियों का कहना था कि यह मार्ग वर्षों से उपयोग में है और इसके बंद होने से स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, बुजुर्गों और आपातकालीन सेवाओं को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। विरोध कर रहे नागरिकों ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग न केवल अधिक दूरी वाला है, बल्कि सुरक्षा और समय दोनों की दृष्टि से भी अनुपयुक्त है। विरोध बढ़ने के साथ ही मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पहुंचे मौके पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और उनकी आपत्तियों को सुना। इसके बाद उन्होंने सीएसईबी प्रबंधन के अधिकारियों से सीधे संवाद किया। बैठक में जनहित को प्राथमिकता देते हुए समाधान निकालने पर सहमति बनी।
बैठक के बाद तय किया गया कि मार्ग पर सुरक्षा के लिए करीब छह फीट ऊंचा गेट लगाया जाएगा, लेकिन उसे बंद नहीं किया जाएगा। यह गेट केवल निगरानी और नियंत्रण के उद्देश्य से रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मार्ग खुला रहे और आम लोगों की आवाजाही बाधित न हो।
पूर्व मंत्री का बयान, प्रशासनिक फैसलों पर सवाल
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय स्थानीय जरूरतों और जनसुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे सार्वजनिक उपयोग वाले मार्गों को अचानक बंद करना जन असंतोष को जन्म देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान संभव है।
जनता में राहत, आगे की निगरानी पर जोर
निर्णय के बाद स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली। लोगों ने कहा कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो क्षेत्र में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती थी। फिलहाल मार्ग पर आवागमन सामान्य है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में किसी भी बदलाव से पहले स्थानीय स्तर पर चर्चा की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में लिए जाने वाले फैसलों में जनभागीदारी और संवाद कितना जरूरी है।
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