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कोरबा में पुलिस महकमे पर गिरी गाज: महिला से छेड़छाड़ के आरोप में SI निलंबित, गैंगरेप केस में लापरवाही पर दो आरक्षक सस्पेंड
कोरबा (छ.ग.)
अलग-अलग मामलों में SP का सख्त रुख; प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई, महिला अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामलों को लेकर एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है। दो अलग-अलग मामलों में एक सब-इंस्पेक्टर और दो आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई महिला से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप और गैंगरेप मामले में शिकायत दर्ज करने में लापरवाही को लेकर की गई है।
पहला मामला कटघोरा थाना क्षेत्र का है, जहां एक महिला ने थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर पर अशोभनीय व्यवहार और छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दी थी। शिकायत मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने प्राथमिक जांच कराई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद एसपी ने सब-इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
एडिशनल एसपी नीतिश ठाकुर ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर आगे विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरा मामला बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक युवती के साथ हुए गैंगरेप प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। आरोप है कि जब पीड़िता थाने पहुंची, तब ड्यूटी पर तैनात दो आरक्षकों ने शिकायत दर्ज करने में गंभीर लापरवाही बरती। इस कारण युवती को सीधे कोरबा एसपी कार्यालय जाना पड़ा।
एसपी के निर्देश पर बाद में सिविल लाइन थाना में प्रकरण दर्ज किया गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि थाने स्तर पर संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का अभाव रहा। इसके बाद बांकी मोंगरा थाने में पदस्थ आरक्षक राकेश मेहता और राजेंद्र राय को निलंबित कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गैंगरेप मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पीड़िता को सुरक्षा और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया गया है।
एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने स्पष्ट किया कि महिला अपराधों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय और सुरक्षित वातावरण देना भी है।
यह कार्रवाई पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही तय करने और आम नागरिकों में विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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