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नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा
रायपुर,(छ.ग.)
सुबह से तैनात रही भारी पुलिस फोर्स, महिलाओं की पुलिस से धक्का-मुक्की, प्रशासन बोला- प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में मिलेगा आवास
रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।
कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।
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नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा
रायपुर,(छ.ग.)
रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।
कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।
