सात दिन से लापता नाबालिग ग्वालियर में बरामद, वन स्टॉप सेंटर भेजी गई

ग्वालियर,(म.प्र.)

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महाराजपुरा से 14 वर्षीय छात्रा हुई थी लापता, CCTV और रूट मैपिंग से पुलिस ने ट्रेस किया, पहले भी चित्रकूट से हो चुकी है बरामदगी

ग्वालियर में सात दिन से लापता 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के शताब्दीपुरम इलाके का है, जहां से 21 जून को छात्रा अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मामला नाबालिग बच्ची से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार सात दिन तक चली तलाश के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और रूट मैपिंग की मदद से छात्रा को बरामद कर लिया। हालांकि बरामदगी के बाद छात्रा ने अपने घर लौटने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उसे फिलहाल वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस के मुताबिक छात्रा मूल रूप से भिंड जिले की रहने वाली है, लेकिन पढ़ाई के सिलसिले में अपने परिवार के साथ ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र में रह रही थी। 21 जून को वह अचानक घर से बिना किसी को बताए निकल गई। जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। कई घंटों तक खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने महाराजपुरा थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी।

सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक यशवंत गोयल ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले छात्रा के घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्रा किस दिशा में गई थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं था। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी। रूट मैपिंग के जरिए छात्रा की संभावित लोकेशन का अनुमान लगाया गया और उसी आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें सक्रिय कर दी गईं।जांच के दौरान पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया। कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और संभावित स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और लगातार फील्ड वर्क का ही परिणाम था कि रविवार शाम छात्रा का पता चल गया। पुलिस टीम ने उसे शहर के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया और थाने लेकर पहुंची। यहां उसकी प्रारंभिक पूछताछ की गई, लेकिन उसने घर वापस जाने से साफ इनकार कर दिया।

छात्रा के इनकार के बाद पुलिस ने बाल संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। अधिकारियों के मुताबिक वहां विशेषज्ञ उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि आखिर वह बार-बार घर क्यों छोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी नाबालिग के मामले में केवल बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और सामाजिक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी होता है। इसी वजह से काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब यह छात्रा घर से लापता हुई हो। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी वह बिना बताए घर से चली गई थी। उस समय भी महाराजपुरा थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सुरक्षित बरामद किया था। तब काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। लेकिन करीब दो महीने बाद फिर उसी तरह घर से चले जाने की घटना ने पुलिस और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बार-बार घर छोड़ने के पीछे की वजह जानना बेहद जरूरी है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवार के सदस्यों से भी विस्तृत बातचीत की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि कहीं किसी तरह का घरेलू तनाव, मानसिक दबाव या अन्य कारण तो नहीं है, जिसकी वजह से बच्ची बार-बार घर छोड़ने का फैसला कर रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किशोरों और बच्चों की मानसिक स्थिति पर समय रहते ध्यान देना कितना जरूरी है।

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29 Jun 2026 By Vaishnavi.J

सात दिन से लापता नाबालिग ग्वालियर में बरामद, वन स्टॉप सेंटर भेजी गई

ग्वालियर,(म.प्र.)

ग्वालियर में सात दिन से लापता 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के शताब्दीपुरम इलाके का है, जहां से 21 जून को छात्रा अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मामला नाबालिग बच्ची से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार सात दिन तक चली तलाश के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और रूट मैपिंग की मदद से छात्रा को बरामद कर लिया। हालांकि बरामदगी के बाद छात्रा ने अपने घर लौटने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उसे फिलहाल वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस के मुताबिक छात्रा मूल रूप से भिंड जिले की रहने वाली है, लेकिन पढ़ाई के सिलसिले में अपने परिवार के साथ ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र में रह रही थी। 21 जून को वह अचानक घर से बिना किसी को बताए निकल गई। जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। कई घंटों तक खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने महाराजपुरा थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी।

सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक यशवंत गोयल ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले छात्रा के घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्रा किस दिशा में गई थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं था। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी। रूट मैपिंग के जरिए छात्रा की संभावित लोकेशन का अनुमान लगाया गया और उसी आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें सक्रिय कर दी गईं।जांच के दौरान पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया। कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और संभावित स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और लगातार फील्ड वर्क का ही परिणाम था कि रविवार शाम छात्रा का पता चल गया। पुलिस टीम ने उसे शहर के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया और थाने लेकर पहुंची। यहां उसकी प्रारंभिक पूछताछ की गई, लेकिन उसने घर वापस जाने से साफ इनकार कर दिया।

छात्रा के इनकार के बाद पुलिस ने बाल संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। अधिकारियों के मुताबिक वहां विशेषज्ञ उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि आखिर वह बार-बार घर क्यों छोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी नाबालिग के मामले में केवल बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और सामाजिक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी होता है। इसी वजह से काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब यह छात्रा घर से लापता हुई हो। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी वह बिना बताए घर से चली गई थी। उस समय भी महाराजपुरा थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सुरक्षित बरामद किया था। तब काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। लेकिन करीब दो महीने बाद फिर उसी तरह घर से चले जाने की घटना ने पुलिस और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बार-बार घर छोड़ने के पीछे की वजह जानना बेहद जरूरी है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवार के सदस्यों से भी विस्तृत बातचीत की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि कहीं किसी तरह का घरेलू तनाव, मानसिक दबाव या अन्य कारण तो नहीं है, जिसकी वजह से बच्ची बार-बार घर छोड़ने का फैसला कर रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किशोरों और बच्चों की मानसिक स्थिति पर समय रहते ध्यान देना कितना जरूरी है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/minor-missing-for-seven-days-recovered-in-gwalior-sent-to/article-57286

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