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बिलासपुर पुलिस व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, कमिश्नरेट सिस्टम पर सरकार का फोकस
बिलासपुर,(छ.ग.)
गृहमंत्री विजय शर्मा ने दिए संकेत, शहर और ग्रामीण पुलिसिंग होगी अलग, निर्णय प्रक्रिया होगी अधिक तेज और प्रभावी
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस व्यवस्था को लेकर जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि जिले के पुलिस फॉर्मेशन में व्यापक परिवर्तन करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इसी अनुभव के आधार पर आने वाले समय में बिलासपुर सहित अन्य बड़े शहरों में भी इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है तो शहर की पुलिसिंग का पूरा ढांचा बदल जाएगा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई फैसले पहले की तुलना में अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे। रविवार को बिलासपुर में आयोजित सराफा एसोसिएशन के महासम्मेलन में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। बिलासपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में बढ़ती आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस फॉर्मेशन में बदलाव का उद्देश्य केवल प्रशासनिक ढांचा बदलना नहीं, बल्कि आम लोगों को बेहतर और तेज पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना है।
गृहमंत्री के इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय स्तर पर बिलासपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने को लेकर प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि भविष्य में बिलासपुर की पुलिसिंग मौजूदा व्यवस्था से अलग तरीके से संचालित हो सकती है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर पड़ेगा, जहां कई मामलों में पुलिस को प्रशासनिक अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर को कई ऐसे अधिकार मिल सकते हैं, जो वर्तमान में जिला प्रशासन के पास होते हैं। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करना, विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करना और कुछ प्रशासनिक निर्णय लेना शामिल हो सकता है। इससे अपराध नियंत्रण और आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने सराफा व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317 के तहत चोरी का सामान मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। व्यापारियों ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और स्पष्ट बनाने की मांग सरकार के सामने रखी है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विचार करेगी और आवश्यक होने पर संबंधित विभागों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा ताकि व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर पूछे गए सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि सरकार हर आपराधिक घटना की लगातार समीक्षा कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अपराध की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन पुलिस भी तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से पुलिस तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हर गंभीर मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है और अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जा रहा है।
यदि बिलासपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होती है तो शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पुलिसिंग को अलग-अलग संचालित किया जाएगा। वर्तमान में पूरे जिले की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास होती है, लेकिन नई व्यवस्था में शहरी क्षेत्र को अलग-अलग जोन में विभाजित किया जा सकता है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी। इससे थानों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और वरिष्ठ अधिकारी सीधे फील्ड में मौजूद रहकर कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ेगी। बिलासपुर को पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के लिए उपयुक्त शहर माना जा रहा है क्योंकि यह केवल जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र भी है। यहां हाईकोर्ट, रेलवे जोन, विश्वविद्यालय, बड़े अस्पताल और कोचिंग संस्थानों के कारण हर दिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। इसके अलावा शहर की लगातार बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते पुलिस के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सिविल लाइन, सरकंडा, कोनी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अपराध, साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा और नशे से जुड़े मामलों ने भी पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस कराई है।
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बिलासपुर पुलिस व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, कमिश्नरेट सिस्टम पर सरकार का फोकस
बिलासपुर,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस व्यवस्था को लेकर जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि जिले के पुलिस फॉर्मेशन में व्यापक परिवर्तन करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इसी अनुभव के आधार पर आने वाले समय में बिलासपुर सहित अन्य बड़े शहरों में भी इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है तो शहर की पुलिसिंग का पूरा ढांचा बदल जाएगा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई फैसले पहले की तुलना में अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे। रविवार को बिलासपुर में आयोजित सराफा एसोसिएशन के महासम्मेलन में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। बिलासपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में बढ़ती आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस फॉर्मेशन में बदलाव का उद्देश्य केवल प्रशासनिक ढांचा बदलना नहीं, बल्कि आम लोगों को बेहतर और तेज पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना है।
गृहमंत्री के इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय स्तर पर बिलासपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने को लेकर प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि भविष्य में बिलासपुर की पुलिसिंग मौजूदा व्यवस्था से अलग तरीके से संचालित हो सकती है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर पड़ेगा, जहां कई मामलों में पुलिस को प्रशासनिक अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर को कई ऐसे अधिकार मिल सकते हैं, जो वर्तमान में जिला प्रशासन के पास होते हैं। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करना, विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करना और कुछ प्रशासनिक निर्णय लेना शामिल हो सकता है। इससे अपराध नियंत्रण और आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने सराफा व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317 के तहत चोरी का सामान मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। व्यापारियों ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और स्पष्ट बनाने की मांग सरकार के सामने रखी है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विचार करेगी और आवश्यक होने पर संबंधित विभागों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा ताकि व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर पूछे गए सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि सरकार हर आपराधिक घटना की लगातार समीक्षा कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अपराध की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन पुलिस भी तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से पुलिस तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हर गंभीर मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है और अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जा रहा है।
यदि बिलासपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होती है तो शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पुलिसिंग को अलग-अलग संचालित किया जाएगा। वर्तमान में पूरे जिले की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास होती है, लेकिन नई व्यवस्था में शहरी क्षेत्र को अलग-अलग जोन में विभाजित किया जा सकता है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी। इससे थानों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और वरिष्ठ अधिकारी सीधे फील्ड में मौजूद रहकर कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ेगी। बिलासपुर को पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के लिए उपयुक्त शहर माना जा रहा है क्योंकि यह केवल जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र भी है। यहां हाईकोर्ट, रेलवे जोन, विश्वविद्यालय, बड़े अस्पताल और कोचिंग संस्थानों के कारण हर दिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। इसके अलावा शहर की लगातार बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते पुलिस के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सिविल लाइन, सरकंडा, कोनी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अपराध, साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा और नशे से जुड़े मामलों ने भी पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस कराई है।
