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“मन की बात”: बंदियों के लिए आशा, विश्वास और आत्मबल जगाने वाला राष्ट्रीय अभियान – राज्यपाल श्री पटेल
भोपाल (म.प्र.)
राज्यपाल ने बंदियों से किया आत्म-परिवर्तन और नव-निर्माण का आह्वान, केन्द्रीय जेल भोपाल में कार्यक्रम का आयोजन
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने रविवार को केन्द्रीय जेल भोपाल में बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ केवल एक प्रसारण नहीं, बल्कि देश में आशा, विश्वास और आत्मबल पैदा करने वाला राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से ही होती है।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके अतीत से नहीं, बल्कि वर्तमान संकल्प और भविष्य की दिशा से तय होती है। यही दृष्टिकोण कारागार सुधार और बंदी पुनर्वास से जुड़े सभी सरकारी प्रयासों की आधारशिला है।
इस अवसर पर सचिव जेल श्री मनीष सिंह, राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव और अतिरिक्त महानिदेशक जेल श्री अखितो सेमा भी मौजूद रहे।
बंदी जीवन में आत्म-सुधार का अवसर
राज्यपाल ने बंदियों से आह्वान किया कि वे ‘मन की बात’ के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि कारावास का समय निराशा में नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन और नव-निर्माण में लगाना चाहिए। आत्म-सुधार का संकल्प ही व्यक्ति को समाज में सम्मान और स्वाभिमान के साथ पुनः स्थापित करता है।
उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को कौशल विकास, औद्योगिक प्रशिक्षण, रोजगारोन्मुख गतिविधियों, स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण, और विधिक सहायता की सुविधा देने की भी जानकारी दी।
राज्यपाल ने मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक–2024 और भारत सरकार के मॉडल प्रीजन एंड करेक्शनल सर्विस एक्ट–2023 के क्रियान्वयन को अत्यंत मानवीय और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो वर्ष में पांच बार बंदियों की रिहाई की अभिनव पहल करता है।
जेल प्रशासन की पहल और सुधार
महानिदेशक जेल श्री वरूण कपूर ने बताया कि प्रदेश के सभी जेलों में अब ‘मन की बात’ नियमित रूप से सुनने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ओवर क्रॉउडिंग दर 54 प्रतिशत से घटकर 38 प्रतिशत हो गई है। 88 प्रतिशत पेशियाँ वी.सी. के माध्यम से की जा रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सभी 125 जेलों में त्रिस्तरीय सुरक्षा ऑडिट कराया गया है, जेलों में नशीली सामग्री के स्थान पर वैकल्पिक खाद्य पदार्थ प्रदान किए जा रहे हैं और बंदियों के आध्यात्मिक एवं मानसिक विकास के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस कार्यक्रम में बंदियों ने राज्यपाल को निर्मित स्मृति चिन्ह भेंट किया। राज्यपाल का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
आने वाले विशेष कार्यक्रम
6 फरवरी को केन्द्रीय जेल, इंदौर में आयोजित होने वाले “गीता मनीषी” कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रदेश की सभी केन्द्रीय और सर्किल जेलों में किया जाएगा।
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