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इंदौर दूषित पानी कांड: गाढ़ा दूध पचाने के लिए मिला नल का पानी, 5 महीने के ‘अव्यान’ की मौत; जल प्रदूषण से शोक फैल गया
इंदौर (म.प्र.)
भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी से फैल रही दस्त-उल्टी की बीमारी ने 1,100 से अधिक लोगों को प्रभावित किया, 7 से 10 मौतें हुईं
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से फैल रही गंभीर बीमारी की त्रासदी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं, जब 5 महीने के मासूम ‘अव्यान साहू’ की मौत दस्त और उल्टी से हुई। यह दर्दनाक घटना तब सामने आई जब बच्चा घर में गाढ़े दूध में निगम के नल का पानी मिला कर पिलाया गया था, जिस पानी में कथित तौर पर गंदा नालों का पानी मिल चुका था। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी ने पूरे इलाके में व्यापक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है।
मासूम अव्यान का परिवार पिछले 10 सालों से मन्नतों के बाद उसका स्वागत कर रहा था, लेकिन यह खुशी कुछ ही महीनों में मातम में बदल गई। पिता सुनील साहू ने मीडिया से बताया कि कुछ दिनों पहले अव्यान को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। चिकित्सक से परामर्श के बाद घर पर दवाएं दी जा रही थीं, लेकिन बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने बताया कि बाजार से लाया गया दूध गाढ़ा था, इसलिए वे उसे नगर निगम के नल के पानी में मिलाकर पिला रहे थे, लेकिन वही पानी उनके बच्चे के लिए ‘जहर’ साबित हुआ।
सरकारी आंकड़ों और स्थानीय निवासियों के बयानों के अनुसार अब तक भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी से कम-से-कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से अधिक लोग दस्त, उल्टी और पेट से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। इनमें कई गंभीर मरीज शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल गया था, जो इस स्वास्थ्य आपदा का मुख्य कारण माना जा रहा है। नगर निगम के कर्मचारियों ने भागीरथपुरा के एक स्थल पर यह लीकेज मंगलवार देर शाम को ही पाई थी, जिससे घरों तक जहरीला पानी पहुंचा। फिलहाल यहां आवश्यक एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह दावा भी कर रहे हैं कि 9 लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से हो चुकी है। अधिकारियों ने पीड़ितों के परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि इलाके में गंदा पानी नल से बहते देखा गया है और लोग पहले भी अस्वस्थ जल की आपूर्ति पर शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन यह समस्या पिछले एक सप्ताह में तेज़ी से जानलेवा रूप ले चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जाँच अभियान शुरू कर दिया है, और प्राथमिक उपचार एवं अस्पतालों में भर्ती की सुविधा प्रदान की जा रही है।
यह मामला इंदौर जैसे शहर के “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जल स्रोत की सुरक्षा और जलापूर्ति अवसंरचना की निगरानी की खामियों ने स्थानीय निवासियों को भारी कीमत चुकाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के फैलाव को रोकने, नियमित जांच करने और सार्वजनिक जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना अब आवश्यक है।
अदालत और उच्च प्रशासन ने भी स्थिति पर संज्ञान लिया है, और व्यापक जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों के उचित दायित्वों की पुष्टि के लिए रिपोर्ट मांगी है। पीड़ित परिवारों को मुआवजे और चिकित्सा सहायता देने की प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं।
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