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वाराणसी में चमकेगा MP का ODOP मॉडल, सम्मेलन में पेश करेंगे CM मोहन यादव, बनेगा देश की प्रेरणा
भोपाल (म.प्र.)
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में राज्य के ODOP मॉडल को प्रस्तुत करेंगे।
वाराणसी में होने वाले ‘सहयोग सम्मेलन’ में मध्यप्रदेश का आर्थिक मॉडल चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है। 31 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मंच पर राज्य के ‘एक जिला-एक उत्पाद’ यानी ODOP मॉडल को विस्तार से प्रस्तुत करेंगे। यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में आयोजित हो रहा है, जहां देशभर के नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में ODOP योजना को केवल एक सरकारी पहल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक मजबूत आर्थिक ढांचे के रूप में विकसित किया है। इसी कारण अब यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।
लोकल टू ग्लोबल की दिशा में मजबूत पहल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को जमीन पर उतारने का काम किया है। इस पहल के तहत हर जिले के विशिष्ट उत्पादों को चिन्हित कर उन्हें बाजार से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है।
मध्यप्रदेश ने उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ जोड़ा है। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि उनकी पहचान भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।
वाराणसी सम्मेलन में क्या रहेगा खास
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री यह साझा करेंगे कि कैसे ODOP योजना ने छोटे किसानों, कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि किस तरह राज्य ने अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है।
यह मंच मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। दोनों राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
छोटे कारीगरों और किसानों को मिला सीधा लाभ
ODOP योजना का सबसे बड़ा प्रभाव छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों पर देखने को मिला है। स्थानीय कारीगरों और किसानों को अब सीधे बाजार उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी आय में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इससे इन उत्पादों को एक अलग पहचान मिली है और उनकी मांग भी बढ़ी है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
मध्यप्रदेश के इस समग्र मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिली है। वर्ष 2024 में इसे ‘सिल्वर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, जो इसकी प्रभावशीलता का प्रमाण है।
इस उपलब्धि के साथ अब राज्य अपने अनुभवों को अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, ताकि देशभर में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।
50 से अधिक जिलों के उत्पादों को मिली पहचान
राज्य के 50 से ज्यादा जिलों के उत्पाद इस योजना के तहत नई पहचान बना चुके हैं। इनमें बालाघाट का चिन्नौर चावल, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन और मंदसौर का लहसुन प्रमुख हैं।
इसके अलावा चंदेरी साड़ियां, सीधी के कालीन, ग्वालियर का सैंडस्टोन, छिंदवाड़ा का संतरा और झाबुआ का कड़कनाथ चिकन जैसे उत्पाद भी राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।
एमपी-यूपी सहयोग से बढ़ेंगी संभावनाएं
वाराणसी में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक प्रस्तुति का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग का नया अध्याय भी साबित हो सकता है। यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार, निर्यात और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर चर्चा होगी।
इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को और मजबूती मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता साफ होगा।
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य का उद्देश्य केवल उत्पादों को प्रदर्शनियों तक सीमित रखना नहीं है। उनका लक्ष्य है कि ये उत्पाद हर घर तक पहुंचें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएं।
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वाराणसी में चमकेगा MP का ODOP मॉडल, सम्मेलन में पेश करेंगे CM मोहन यादव, बनेगा देश की प्रेरणा
भोपाल (म.प्र.)
वाराणसी में होने वाले ‘सहयोग सम्मेलन’ में मध्यप्रदेश का आर्थिक मॉडल चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है। 31 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मंच पर राज्य के ‘एक जिला-एक उत्पाद’ यानी ODOP मॉडल को विस्तार से प्रस्तुत करेंगे। यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में आयोजित हो रहा है, जहां देशभर के नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में ODOP योजना को केवल एक सरकारी पहल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक मजबूत आर्थिक ढांचे के रूप में विकसित किया है। इसी कारण अब यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।
लोकल टू ग्लोबल की दिशा में मजबूत पहल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को जमीन पर उतारने का काम किया है। इस पहल के तहत हर जिले के विशिष्ट उत्पादों को चिन्हित कर उन्हें बाजार से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है।
मध्यप्रदेश ने उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ जोड़ा है। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि उनकी पहचान भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।
वाराणसी सम्मेलन में क्या रहेगा खास
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री यह साझा करेंगे कि कैसे ODOP योजना ने छोटे किसानों, कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि किस तरह राज्य ने अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है।
यह मंच मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। दोनों राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
छोटे कारीगरों और किसानों को मिला सीधा लाभ
ODOP योजना का सबसे बड़ा प्रभाव छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों पर देखने को मिला है। स्थानीय कारीगरों और किसानों को अब सीधे बाजार उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी आय में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इससे इन उत्पादों को एक अलग पहचान मिली है और उनकी मांग भी बढ़ी है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
मध्यप्रदेश के इस समग्र मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिली है। वर्ष 2024 में इसे ‘सिल्वर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, जो इसकी प्रभावशीलता का प्रमाण है।
इस उपलब्धि के साथ अब राज्य अपने अनुभवों को अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, ताकि देशभर में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।
50 से अधिक जिलों के उत्पादों को मिली पहचान
राज्य के 50 से ज्यादा जिलों के उत्पाद इस योजना के तहत नई पहचान बना चुके हैं। इनमें बालाघाट का चिन्नौर चावल, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन और मंदसौर का लहसुन प्रमुख हैं।
इसके अलावा चंदेरी साड़ियां, सीधी के कालीन, ग्वालियर का सैंडस्टोन, छिंदवाड़ा का संतरा और झाबुआ का कड़कनाथ चिकन जैसे उत्पाद भी राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।
एमपी-यूपी सहयोग से बढ़ेंगी संभावनाएं
वाराणसी में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक प्रस्तुति का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग का नया अध्याय भी साबित हो सकता है। यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार, निर्यात और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर चर्चा होगी।
इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को और मजबूती मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता साफ होगा।
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य का उद्देश्य केवल उत्पादों को प्रदर्शनियों तक सीमित रखना नहीं है। उनका लक्ष्य है कि ये उत्पाद हर घर तक पहुंचें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएं।
