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सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
इंदौर (म.प्र.)
8% वार्षिक वेतन वृद्धि अब बढ़े हुए वेतन पर लागू होगी, 2018 से एरियर भी मिलेगा
मध्य प्रदेश के शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को वेतन वृद्धि को लेकर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि 8 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि हर वर्ष बढ़े हुए वेतन पर यानी कंपाउंडिंग आधार पर जोड़ी जाएगी। इस निर्णय के बाद वर्ष 2018 से लंबित एरियर भी ब्याज सहित डॉक्टरों को देना होगा। अदालत के इस आदेश से आने वाले वर्षों में भी डॉक्टरों के वेतन में लगातार बढ़ोतरी होती रहेगी।
यह मामला सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष लाया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रशासन 2018 की अधिसूचना के बावजूद वेतन वृद्धि की गणना प्रारंभिक वेतन के आधार पर तय राशि के रूप में कर रहा है, जिससे वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस व्यवस्था को अनुचित बताते हुए कमिश्नर द्वारा जारी पूर्व स्पष्टीकरण और मार्च 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि वेतन वृद्धि को केवल प्रारंभिक वेतन से जोड़कर निश्चित राशि के रूप में लागू किया जाता है तो पूरी सेवा अवधि में वेतन में ठहराव की स्थिति बन सकती है। इसलिए वार्षिक वृद्धि का लाभ बढ़े हुए वेतन पर जोड़ा जाना ही उचित और न्यायसंगत है।
विवाद की शुरुआत 6 अगस्त 2018 को जारी गजट अधिसूचना से हुई थी, जिसमें सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों को प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसकी गणना अलग तरीके से की जा रही थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब वेतन वृद्धि की गणना कंपाउंडिंग आधार पर होगी।
इस निर्णय का सीधा लाभ इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों को मिलेगा। यहां विभिन्न विभागों में कार्यरत कुल 38 डीएम और एमसीएच विशेषज्ञ डॉक्टरों के वेतन पर इसका तत्काल प्रभाव पड़ेगा। इन विभागों में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी जैसे सुपर स्पेशियलिटी क्षेत्र शामिल हैं।
वर्तमान वेतन संरचना के अनुसार सुपर स्पेशियलिटी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर को लगभग 1.50 लाख रुपये, एसोसिएट प्रोफेसर को करीब 2.50 लाख रुपये और प्रोफेसर को लगभग 3 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। यदि 1.50 लाख रुपये के वेतन पर 8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि कंपाउंडिंग आधार पर लागू की जाती है, तो दूसरे वर्ष यह राशि लगभग 1.75 लाख और तीसरे वर्ष करीब 1.89 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग में वर्तमान में कुल 46 डॉक्टर पदस्थ हैं। इनमें 38 सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों के अलावा 6 एनेस्थीसिया और 2 रेडियोलॉजी के एमडी डॉक्टर भी शामिल हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इन सभी डॉक्टरों को वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा।
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