- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भोपाल में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
भोपाल में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
भोपाल, (म.प्र.)
खानूगांव समेत तीन इलाकों के पानी में ई-कोलाई मिला, प्रशासन ने ग्राउंड वाटर उपयोग पर लगाई रोक
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पीने के पानी को लेकर गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। शहर के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर क्षेत्रों से लिए गए भूजल के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने इन इलाकों में भूजल के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगा दी है। यह वही बैक्टीरिया है, जिसके कारण हाल ही में इंदौर में गंभीर जलजनित बीमारी फैली और कई लोगों की जान चली गई थी।
बुधवार को नगर निगम की ओर से शहर के अलग-अलग हिस्सों से कुल 250 पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से चार नमूने असुरक्षित पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, दो नमूने आदमपुर छावनी के कचरा निपटान क्षेत्र के पास से, एक वाजपेयी नगर के नलकूप से और एक खानूगांव के कुएं से लिया गया था। सभी नमूनों में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन पाया गया।
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में ई-कोलाई मिला है, वहां नगर निगम की पाइपलाइन से जलापूर्ति नहीं हो रही है। लोगों द्वारा निजी कुओं और नलकूपों से निकाले जा रहे भूजल के दूषित होने की बात सामने आई है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों को चेतावनी दी है कि वे फिलहाल ग्राउंड वाटर का उपयोग न करें और वैकल्पिक जल स्रोत अपनाएं।
खानूगांव क्षेत्र में स्थिति को लेकर स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि ने पहले ही शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि इलाके के कुएं में लंबे समय से सीवेज का पानी मिल रहा था, जिससे आसपास के करीब दो हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने से यह स्थिति बनी।
आदमपुर छावनी क्षेत्र पहले से ही पर्यावरणीय जोखिम के दायरे में है। कचरा खंती के आसपास बसे गांवों में हवा और भूजल प्रदूषण की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे से निकलने वाला लीचेट भूजल में मिलकर उसे जहरीला बना रहा है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नगर निगम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं जहां पुरानी जल पाइपलाइनें सीवेज लाइनों के समानांतर बिछी हुई हैं। जर्जर हो चुकी लोहे की पाइपों में लीकेज की आशंका अधिक रहती है। इन्हें बदलने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजने, मेडिकल स्क्रीनिंग और लगातार सैंपलिंग के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अमृत-2 योजना के तहत नई पाइपलाइन बिछाने का काम तेज करने की बात कही गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि उल्टी-दस्त या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराएं।
---------------------------------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
