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ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत
ग्वालियर (म.प्र.)
नशे के खिलाफ अनोखी पहल, इंदरगंज चौराहे पर 2 क्विंटल केसरिया दूध वितरित; यातायात पुलिस और यूथ सोसाइटी साथ आए
नए साल 2026 की सुबह ग्वालियर में जश्न का अंदाज़ कुछ अलग और संदेशपूर्ण नजर आया। जहां आमतौर पर नववर्ष का स्वागत शराब और पार्टियों से किया जाता है, वहीं शहर के इंदरगंज चौराहे पर शराब के खिलाफ जागरूकता का अनोखा दृश्य देखने को मिला। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से एक अभियान चलाकर लोगों को शराब की जगह दूध पीकर नववर्ष की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।
1 जनवरी की सुबह होते ही इंदरगंज चौराहे पर एक बड़ा पंडाल लगाया गया। यहां लगभग 2 क्विंटल केसर मिला गर्म दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। सुबह-सुबह राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया।
इस अभियान में यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, स्वयंसेवी संगठन के सदस्य और स्थानीय युवा सक्रिय रूप से शामिल रहे। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद आगे बढ़कर लोगों को दूध वितरित किया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश दिया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनर लगाए गए थे, जिन पर लिखा था—
“दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।”
साउंड सिस्टम के जरिए भी यही संदेश लगातार प्रसारित किया जा रहा था।
आयोजकों के अनुसार, नए साल पर शराब पीकर जश्न मनाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। खासकर युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में यह अभियान शुरू किया गया, ताकि समाज को एक स्वस्थ और सकारात्मक विकल्प दिया जा सके।
अभियान की जानकारी फैलते ही दूध पीने वालों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। कुछ युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियानों से नशे को लेकर सोच बदलने में मदद मिलती है। राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने भी आयोजन की सराहना की और इसे आगे भी जारी रखने की मांग की।
यातायात पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में सामने आई है। नए साल की सुबह दूध के जरिए दिया गया यह संदेश बताता है कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने यह साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।
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