- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- 24 जुलाई महाकाल भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में भक्तों को दिए भगवान महाकालेश्वर ने दर्शन
24 जुलाई महाकाल भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में भक्तों को दिए भगवान महाकालेश्वर ने दर्शन
धर्म डेस्क
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी पर तड़के विशेष भस्म आरती संपन्न, पंचामृत अभिषेक, भांग-चंदन से श्रृंगार और जयकारों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार, 24 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर तड़के चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। सुबह की पहली बेला में मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के वातावरण से भर उठा। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने परंपरा के अनुसार गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक आरंभ हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक किया गया। पूरे समय वैदिक मंत्रों की गूंज और मंदिर में बजते घंटे वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना रहे थे। बताया जा रहा है कि सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए थे, जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कतारों में धैर्यपूर्वक इंतजार किया। अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से ज्योतिर्लिंग का अलंकरण किया गया। इसके साथ ही आकर्षक आभूषणों और पुष्पों से बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप सजाया गया। भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर भगवान का ध्यान किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार कपूर आरती संपन्न होने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भस्म आरती का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पूरी प्रक्रिया निर्धारित धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार की सुगंधित पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला तो गर्भगृह और मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार की भस्म आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कई लोग देर रात से ही मंदिर के बाहर पहुंच गए थे ताकि उन्हें आरती के दौरान दर्शन का अवसर मिल सके। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का प्रवेश निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कराया गया, जिससे दर्शन प्रक्रिया लगातार चलती रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।

भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए। परंपरा के अनुसार अनेक भक्त नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। ऐसी मान्यता है कि नंदी महाराज भगवान शिव तक भक्तों की प्रार्थना पहुंचाते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कोई परिवार के सुख-समृद्धि की कामना कर रहा था तो कोई स्वास्थ्य और सफलता के लिए बाबा महाकाल का आशीर्वाद मांग रहा था। सुबह का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना हुआ था। हर ओर "जय श्री महाकाल" और "हर हर महादेव" के जयकारे सुनाई दे रहे थे। मंदिर में बजते शंख, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
श्रावण मास के निकट आने के साथ महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दर्शनार्थियों की भीड़ और अधिक बढ़ सकती है। महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती भगवान शिव की सबसे प्राचीन और अनूठी परंपराओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु इस दिव्य आरती के साक्षी बनने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार की भस्म आरती भी श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जहां विशेष श्रृंगार में विराजमान भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया और बाबा से सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
24 जुलाई महाकाल भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में भक्तों को दिए भगवान महाकालेश्वर ने दर्शन
धर्म डेस्क
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार, 24 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर तड़के चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। सुबह की पहली बेला में मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के वातावरण से भर उठा। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने परंपरा के अनुसार गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक आरंभ हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक किया गया। पूरे समय वैदिक मंत्रों की गूंज और मंदिर में बजते घंटे वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना रहे थे। बताया जा रहा है कि सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए थे, जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कतारों में धैर्यपूर्वक इंतजार किया। अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से ज्योतिर्लिंग का अलंकरण किया गया। इसके साथ ही आकर्षक आभूषणों और पुष्पों से बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप सजाया गया। भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर भगवान का ध्यान किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार कपूर आरती संपन्न होने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भस्म आरती का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पूरी प्रक्रिया निर्धारित धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार की सुगंधित पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला तो गर्भगृह और मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार की भस्म आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कई लोग देर रात से ही मंदिर के बाहर पहुंच गए थे ताकि उन्हें आरती के दौरान दर्शन का अवसर मिल सके। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का प्रवेश निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कराया गया, जिससे दर्शन प्रक्रिया लगातार चलती रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।

भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए। परंपरा के अनुसार अनेक भक्त नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। ऐसी मान्यता है कि नंदी महाराज भगवान शिव तक भक्तों की प्रार्थना पहुंचाते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कोई परिवार के सुख-समृद्धि की कामना कर रहा था तो कोई स्वास्थ्य और सफलता के लिए बाबा महाकाल का आशीर्वाद मांग रहा था। सुबह का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना हुआ था। हर ओर "जय श्री महाकाल" और "हर हर महादेव" के जयकारे सुनाई दे रहे थे। मंदिर में बजते शंख, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
श्रावण मास के निकट आने के साथ महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दर्शनार्थियों की भीड़ और अधिक बढ़ सकती है। महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती भगवान शिव की सबसे प्राचीन और अनूठी परंपराओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु इस दिव्य आरती के साक्षी बनने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार की भस्म आरती भी श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जहां विशेष श्रृंगार में विराजमान भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया और बाबा से सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
