वस्त्र उद्योग को मिला नई दिशा का संकेत, रोजगारपरक विकास पर केंद्रित रहा राष्ट्रीय सम्मेलन

भोपाल (म.प्र.)

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गुवाहाटी में आयोजित वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यों के बीच सहयोग, निवेश और रोजगार सृजन पर जोर

देश के वस्त्र उद्योग को रोजगारपरक औद्योगिक विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में गुरुवार को एक अहम संकेत मिला। गुवाहाटी में आयोजित वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में इस बात पर सहमति दिखी कि कृषि के बाद वस्त्र क्षेत्र देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला सेक्टर बन चुका है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और व्यापक होगी। सम्मेलन का फोकस पारंपरिक विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक टेक्सटाइल, तकनीकी वस्त्र और निर्यात बढ़ाने पर रहा।

सम्मेलन में बताया गया कि कई राज्य वस्त्र उद्योग को अपनी औद्योगिक नीति का प्रमुख आधार बना रहे हैं। रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को प्राथमिकता देते हुए टेक्सटाइल वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है। विशेष रूप से हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, सिल्क, ऑर्गेनिक कॉटन और मैनमेड फाइबर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।

पीएम मित्र पार्क और निवेश की रफ्तार
सम्मेलन के दौरान देश में विकसित किए जा रहे पीएम मित्र पार्कों को टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेमचेंजर बताया गया। धार में बन रहा पीएम मित्र पार्क तेजी से आकार ले रहा है, जिसे उद्योग और रोजगार दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन पार्कों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

राज्यों की भूमिका और पहल
विभिन्न राज्यों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, जिला स्तर पर निवेश संवाद और स्थानीय कारीगरों को उद्योग से जोड़ने की पहल से सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। कई राज्यों में जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में टेक्सटाइल गतिविधियों के विस्तार से आजीविका के नए अवसर बने हैं। महिला श्रमिकों की भागीदारी बढ़ाने को भी इस विकास मॉडल का अहम हिस्सा बताया गया।

तकनीकी वस्त्र और नए फाइबर पर फोकस
सम्मेलन में यह बात भी उभरकर सामने आई कि भविष्य में टेक्निकल टेक्सटाइल और न्यू-एज फाइबर की भूमिका निर्णायक होगी। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे मशीन मेड फाइबर के साथ-साथ तकनीकी और वैकल्पिक फाइबर को भी समान महत्व दें। इससे न केवल उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

रोजगार और निर्यात की तस्वीर
आंकड़ों के अनुसार, टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में अपेक्षाकृत कम निवेश में अधिक रोजगार सृजन की क्षमता है। हाल के वर्षों में टेक्सटाइल निर्यात में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे आगे और तेज करने के लिए नीति समर्थन, कौशल विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक फॉर इंडिया’ जैसी पहलों को वस्त्र उद्योग के माध्यम से जमीनी स्तर तक ले जाना प्राथमिकता होगी। राज्यों के बीच सहयोग, साझा रोडमैप और निवेश अनुकूल वातावरण से भारत का वस्त्र उद्योग वैश्विक मंच पर और मजबूत स्थिति में आ सकता है।

यह सम्मेलन न केवल नीति संवाद का मंच बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि रोजगार, नवाचार और विरासत को साथ लेकर चलना ही टेक्सटाइल सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत है।

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