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त्रिवेणी नदी में कावड़ भरने गए दो बच्चों की डूबकर मौत: गहराई बनी काल, ग्रामीण बोले- सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
Ashoknagar, MP
श्रावण मास के दूसरे सोमवार को कावड़ भरने त्रिवेणी संगम पहुंचे दो मासूम बच्चों की नदी में डूबने से मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान 16 वर्षीय सौरभ लोधी और 9 वर्षीय आरुषी साहू के रूप में हुई है, जो दियाधरी गांव से अपने परिवार के साथ जल भरने आए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे दोनों बच्चे पानी में उतरते ही गहराई में चले गए और डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन गहराई ज्यादा होने के कारण समय पर निकालना संभव नहीं हो सका। दोनों को जब तक बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सूचना मिलते ही कचनार थाना प्रभारी पूनम सेलर मौके पर पहुंचीं। दोनों बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मौके पर शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिखी। उनका कहना है कि श्रावण सोमवार को त्रिवेणी में भारी भीड़ रहती है, फिर भी यहां एसडीईआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की कोई तैनाती नहीं थी। अगर गोताखोर और राहत टीम मौके पर तैनात होती, तो शायद बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
घटना की सूचना मिलने के बाद एसडीएम बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव, तहसीलदार शंभू मीणा और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रावण जैसे संवेदनशील अवसरों पर नदी किनारे एसडीईआरएफ की स्थायी या अस्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।
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त्रिवेणी नदी में कावड़ भरने गए दो बच्चों की डूबकर मौत: गहराई बनी काल, ग्रामीण बोले- सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
Ashoknagar, MP
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे दोनों बच्चे पानी में उतरते ही गहराई में चले गए और डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन गहराई ज्यादा होने के कारण समय पर निकालना संभव नहीं हो सका। दोनों को जब तक बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सूचना मिलते ही कचनार थाना प्रभारी पूनम सेलर मौके पर पहुंचीं। दोनों बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मौके पर शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिखी। उनका कहना है कि श्रावण सोमवार को त्रिवेणी में भारी भीड़ रहती है, फिर भी यहां एसडीईआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की कोई तैनाती नहीं थी। अगर गोताखोर और राहत टीम मौके पर तैनात होती, तो शायद बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
घटना की सूचना मिलने के बाद एसडीएम बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव, तहसीलदार शंभू मीणा और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रावण जैसे संवेदनशील अवसरों पर नदी किनारे एसडीईआरएफ की स्थायी या अस्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।
