बॉलीवुड से दूरी पर बोले एआर रहमान, काम न मिलने को लेकर बयान ने छेड़ी बहस

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सांप्रदायिक सोच और बदलते म्यूजिक सिस्टम की ओर इशारा, जावेद अख्तर ने दावे को नकारा

ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के हालिया बयान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रहमान ने दावा किया है कि उन्हें बीते कई वर्षों से बॉलीवुड में काम के प्रस्ताव नहीं मिल रहे हैं और इसके पीछे उन्होंने बदलते पावर स्ट्रक्चर और कथित सांप्रदायिक सोच की ओर इशारा किया है।

एक इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग में अब संगीत के फैसले रचनात्मक सहयोग से नहीं, बल्कि म्यूजिक लेबल्स और कॉर्पोरेट कंपनियों के नियंत्रण में लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि पहले निर्देशक और संगीतकार मिलकर फिल्म का म्यूजिक गढ़ते थे, लेकिन अब एक ही प्रोजेक्ट में कई कंपोज़र्स को साथ रख दिया जाता है, जिससे व्यक्तिगत पहचान और रचनात्मक स्वतंत्रता कमजोर हुई है।

रहमान के इस बयान पर इंडस्ट्री से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। वरिष्ठ गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने उनके दावे को सिरे से खारिज किया। समाचार एजेंसी से बातचीत में अख्तर ने कहा कि उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि एआर रहमान को किसी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, रहमान को इंडस्ट्री में बेहद सम्मान प्राप्त है।

जावेद अख्तर का मानना है कि काम न मिलने की वजह किसी भी तरह की सांप्रदायिक सोच नहीं, बल्कि रहमान की वैश्विक व्यस्तता हो सकती है। उन्होंने कहा कि रहमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहते हैं, बड़े लाइव शो करते हैं और विदेशी प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में छोटे या मध्यम बजट के निर्माता उनसे संपर्क करने में झिझक महसूस करते होंगे।

हालांकि, रहमान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे काम की तलाश नहीं करते। उनका कहना है कि वे वही प्रोजेक्ट करते हैं, जो स्वाभाविक रूप से उनके पास आते हैं और जिनमें रचनात्मक ईमानदारी हो। उन्होंने यह भी कहा कि काम की कमी से उनके आत्मसम्मान या संगीत के प्रति उनके दृष्टिकोण पर कोई असर नहीं पड़ा है।

सांप्रदायिक एंगल पर बोलते हुए रहमान ने यह भी जोड़ा कि उनके सामने किसी ने प्रत्यक्ष रूप से ऐसी बात नहीं कही, लेकिन इंडस्ट्री में कुछ बातें ‘कानाफूसी’ के तौर पर सुनाई देती हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

एआर रहमान ने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और ‘रंगीला’, ‘दिल से’, ‘ताल’, ‘लगान’, ‘स्वदेश’, ‘रंग दे बसंती’, ‘रॉकस्टार’ और ‘रांझणा’ जैसी फिल्मों से संगीत की परिभाषा बदल दी। फिलहाल वे निर्देशक नीतीश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के संगीत पर काम कर रहे हैं।

रहमान के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बॉलीवुड में रचनात्मक प्रतिभा से ज्यादा अब सिस्टम और नेटवर्क मायने रखने लगे हैं।

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17 Jan 2026 By Nitin Trivedi

बॉलीवुड से दूरी पर बोले एआर रहमान, काम न मिलने को लेकर बयान ने छेड़ी बहस

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ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के हालिया बयान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रहमान ने दावा किया है कि उन्हें बीते कई वर्षों से बॉलीवुड में काम के प्रस्ताव नहीं मिल रहे हैं और इसके पीछे उन्होंने बदलते पावर स्ट्रक्चर और कथित सांप्रदायिक सोच की ओर इशारा किया है।

एक इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग में अब संगीत के फैसले रचनात्मक सहयोग से नहीं, बल्कि म्यूजिक लेबल्स और कॉर्पोरेट कंपनियों के नियंत्रण में लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि पहले निर्देशक और संगीतकार मिलकर फिल्म का म्यूजिक गढ़ते थे, लेकिन अब एक ही प्रोजेक्ट में कई कंपोज़र्स को साथ रख दिया जाता है, जिससे व्यक्तिगत पहचान और रचनात्मक स्वतंत्रता कमजोर हुई है।

रहमान के इस बयान पर इंडस्ट्री से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। वरिष्ठ गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने उनके दावे को सिरे से खारिज किया। समाचार एजेंसी से बातचीत में अख्तर ने कहा कि उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि एआर रहमान को किसी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, रहमान को इंडस्ट्री में बेहद सम्मान प्राप्त है।

जावेद अख्तर का मानना है कि काम न मिलने की वजह किसी भी तरह की सांप्रदायिक सोच नहीं, बल्कि रहमान की वैश्विक व्यस्तता हो सकती है। उन्होंने कहा कि रहमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहते हैं, बड़े लाइव शो करते हैं और विदेशी प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में छोटे या मध्यम बजट के निर्माता उनसे संपर्क करने में झिझक महसूस करते होंगे।

हालांकि, रहमान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे काम की तलाश नहीं करते। उनका कहना है कि वे वही प्रोजेक्ट करते हैं, जो स्वाभाविक रूप से उनके पास आते हैं और जिनमें रचनात्मक ईमानदारी हो। उन्होंने यह भी कहा कि काम की कमी से उनके आत्मसम्मान या संगीत के प्रति उनके दृष्टिकोण पर कोई असर नहीं पड़ा है।

सांप्रदायिक एंगल पर बोलते हुए रहमान ने यह भी जोड़ा कि उनके सामने किसी ने प्रत्यक्ष रूप से ऐसी बात नहीं कही, लेकिन इंडस्ट्री में कुछ बातें ‘कानाफूसी’ के तौर पर सुनाई देती हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

एआर रहमान ने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और ‘रंगीला’, ‘दिल से’, ‘ताल’, ‘लगान’, ‘स्वदेश’, ‘रंग दे बसंती’, ‘रॉकस्टार’ और ‘रांझणा’ जैसी फिल्मों से संगीत की परिभाषा बदल दी। फिलहाल वे निर्देशक नीतीश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के संगीत पर काम कर रहे हैं।

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