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सुधा चंद्रन का आध्यात्मिक अनुभव: माता की चौकी में 10 मिनट में 4.5 लीटर पानी पिया, पिता की मृत्यु से पहले भगवान मुरगन के दर्शन का दावा
बॉलीवुड न्यूज
वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए एक्ट्रेस ने पॉडकास्ट में साझा किए निजी अनुभव, बोलीं— ‘माता का आशीर्वाद मिलता है, मैं उस पर दावा नहीं करती’
अनुभवी अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने हाल ही में अपने एक वायरल वीडियो और उससे जुड़े आध्यात्मिक अनुभवों पर खुलकर बात की है। यह वीडियो उनके घर पर आयोजित माता की चौकी का था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आई थीं। कुछ लोगों ने इसे आस्था से जोड़ा, तो कुछ ने ओवरएक्टिंग करार दिया। अब सुधा चंद्रन ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में पहली बार विस्तार से उस दिन की घटनाओं और अपने निजी विश्वासों पर अपनी बात रखी है।
सुधा चंद्रन ने बताया कि माता की चौकी के दौरान उनकी स्थिति असामान्य थी। उनके अनुसार, केवल 10 मिनट के भीतर उन्होंने करीब 4.5 लीटर पानी पी लिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद इस बात का अहसास नहीं था कि वह इतना पानी पी चुकी हैं। बाद में उनके पति ने उन्हें यह जानकारी दी। एक्ट्रेस के मुताबिक, इसके बाद उन्हें करीब डेढ़ दिन तक अत्यधिक थकावट महसूस हुई।
पॉडकास्ट में उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन पर माता आती हैं। इस पर सुधा चंद्रन ने संतुलित जवाब देते हुए कहा कि वह इस तरह का कोई दावा नहीं करतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह सकतीं कि माता उनमें प्रवेश करती हैं, लेकिन यह जरूर मानती हैं कि माता उन्हें आशीर्वाद देती हैं। उन्होंने इसे एक निजी आध्यात्मिक अनुभव बताया, जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं है।
सुधा चंद्रन ने बताया कि उनके घर में माता की चौकी की परंपरा कोई नई नहीं है। शादी के बाद उनके पिता के आग्रह पर परिवार ने कुल देवी-देवताओं की पूजा शुरू की थी। इसी क्रम में वैष्णो देवी की यात्रा और फिर मुंबई में माता की चौकी की शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि पिछले 22-23 वर्षों से हर साल के पहले शनिवार को उनके घर चौकी आयोजित की जाती है।
इसी बातचीत में सुधा चंद्रन ने अपने जीवन के सबसे संवेदनशील अनुभवों में से एक— अपने पिता की मृत्यु से पहले भगवान मुरगन के दर्शन— का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता अक्सर कहा करते थे कि जब वह इस दुनिया से जाएंगे, तो भगवान मुरगन उन्हें लेने आएंगे। सुधा के अनुसार, पिता के ICU में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने अचानक एक मोर देखा, जिसे वह मुरगन का प्रतीक मानती हैं। कुछ ही मिनटों बाद डॉक्टरों ने उनके पिता के निधन की सूचना दी।
सुधा चंद्रन ने यह भी साफ किया कि उनके अनुभव व्यक्तिगत आस्था से जुड़े हैं और वह किसी पर इन्हें मानने का दबाव नहीं डालतीं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता हर व्यक्ति के लिए अलग होती है और उसे उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब सार्वजनिक हस्तियों की निजी आस्था और अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन जाते हैं। सुधा चंद्रन का यह स्पष्ट और संतुलित पक्ष इस बहस को एक मानवीय दृष्टिकोण देने की कोशिश करता है।
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