उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में गैंगरेप की शिकार 14 वर्षीय किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो गई। किशोरी को बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह पांच दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करती रही। पीड़िता की मौत के बाद बहसूमा गांव में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं और एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
परिजनों के अनुसार, घटना 25 जनवरी की रात की है, जब किशोरी को मोहल्ले के ही एक युवक ने बहाने से बुलाया। आरोप है कि उसे एक कमरे में बंधक बनाकर युवक और उसके साथियों ने दुष्कर्म किया। अगली सुबह किशोरी गंभीर हालत में मिली और किसी तरह उसे घर पहुंचाया गया। होश में आने पर उसने परिजनों को आपबीती बताई। मानसिक आघात की स्थिति में उसने घर में रखा कीटनाशक पी लिया, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
मेरठ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के मुताबिक, किशोरी को 26 जनवरी की सुबह अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था। वह लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रही। बीच में उसकी हालत में हल्का सुधार हुआ, लेकिन 30 जनवरी की शाम उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और देर रात उसने दम तोड़ दिया।
मौत की सूचना मिलते ही परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया। पीड़िता के भाई का आरोप है कि पुलिस ने मामले में शुरू से ही ढिलाई बरती और उनकी शिकायत के अनुसार एफआईआर दर्ज नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने देर रात पोस्टमार्टम कराकर शव का तुरंत अंतिम संस्कार कराने का दबाव बनाया, जिसे परिवार ने अस्वीकार कर दिया।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बहसूमा गांव के सभी प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी है। चार थानों की पुलिस फोर्स गांव में तैनात की गई है। बाहरी लोगों और राजनीतिक दलों के नेताओं को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। परिजनों का आरोप है कि मोबाइल नेटवर्क भी बाधित किया गया है, जिससे वे अपने रिश्तेदारों और समर्थकों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की तलाश जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन ताड़ा ने बताया कि मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है और सभी तथ्यों की निष्पक्षता से पड़ताल होगी।
यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन के लिए चुनौती अब गांव में शांति बनाए रखने के साथ-साथ पीड़ित परिवार का भरोसा बहाल करने की है।
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