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- आकलन वर्ष 2025-26: ITR-1 और ITR-4 फाइलिंग के लिए इनकम टैक्स विभाग ने शुरू की एक्सेल सुविधा, डेडलाइन
आकलन वर्ष 2025-26: ITR-1 और ITR-4 फाइलिंग के लिए इनकम टैक्स विभाग ने शुरू की एक्सेल सुविधा, डेडलाइन बढ़ाकर 15 सितंबर की गई
Business News
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-4 दाखिल करने के लिए टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत दी है।
विभाग ने अब इन दोनों फॉर्म्स के लिए एक्सेल यूटिलिटी सुविधा उपलब्ध करा दी है, जिससे टैक्स रिटर्न भरना पहले से अधिक सहज और सुविधाजनक हो गया है।
विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस संबंध में जानकारी साझा की है और बताया है कि 30 मई 2025 से आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही, सीबीडीटी (CBDT) ने रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी है।
किसके लिए हैं ITR-1 और ITR-4 फॉर्म?
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ये फॉर्म मुख्य रूप से व्यक्तिगत करदाताओं, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और छोटी संस्थाओं के लिए हैं, जिनकी सालाना आय ₹50 लाख तक होती है।
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जिन टैक्सपेयर्स को ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती, वे इन फॉर्म्स का उपयोग कर सकते हैं।
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साथ ही, ऐसे टैक्सपेयर्स जिन्हें लिस्टेड शेयरों से ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, वे भी इसे ITR-1 और ITR-4 में दिखा सकते हैं — पहले इसके लिए ITR-2 भरना जरूरी होता था।
ITR-U फॉर्म: अपडेटेड रिटर्न के लिए बढ़ी समयसीमा
वित्त अधिनियम 2025 के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-U फॉर्म को भी नोटिफाई कर दिया है। यह फॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जो किसी कारणवश निर्धारित समयसीमा में रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए या उसमें कोई त्रुटि रह गई हो।
अब इस फॉर्म को आकलन वर्ष के अंत से 48 महीने (4 साल) तक फाइल किया जा सकता है — पहले यह सीमा 24 महीने थी।
ITR-U पर देना होगा अतिरिक्त टैक्स
आईटी विभाग के अनुसार, ITR-U फाइल करने पर टैक्सपेयर्स को संबंधित अवधि के अनुसार अतिरिक्त टैक्स देना होगा:
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12 से 24 महीनों के भीतर फाइलिंग: 25% और 50% एक्स्ट्रा टैक्स
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36 से 48 महीनों के भीतर फाइलिंग: 60% और 70% एक्स्ट्रा टैक्स
पिछले तीन वर्षों में करीब 90 लाख अपडेटेड रिटर्न फाइल किए गए हैं, जिससे सरकार को लगभग ₹8,500 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
टैक्सपेयर्स के लिए सलाह:
जिन्होंने अब तक वित्त वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) का ITR दाखिल नहीं किया है, वे अब एक्सेल यूटिलिटी के माध्यम से आसानी से प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। साथ ही समयसीमा को ध्यान में रखते हुए जल्द फाइलिंग करने से अतिरिक्त चार्ज से बचा जा सकता है।
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आकलन वर्ष 2025-26: ITR-1 और ITR-4 फाइलिंग के लिए इनकम टैक्स विभाग ने शुरू की एक्सेल सुविधा, डेडलाइन बढ़ाकर 15 सितंबर की गई
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विभाग ने अब इन दोनों फॉर्म्स के लिए एक्सेल यूटिलिटी सुविधा उपलब्ध करा दी है, जिससे टैक्स रिटर्न भरना पहले से अधिक सहज और सुविधाजनक हो गया है।
विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस संबंध में जानकारी साझा की है और बताया है कि 30 मई 2025 से आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही, सीबीडीटी (CBDT) ने रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी है।
किसके लिए हैं ITR-1 और ITR-4 फॉर्म?
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ये फॉर्म मुख्य रूप से व्यक्तिगत करदाताओं, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और छोटी संस्थाओं के लिए हैं, जिनकी सालाना आय ₹50 लाख तक होती है।
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जिन टैक्सपेयर्स को ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती, वे इन फॉर्म्स का उपयोग कर सकते हैं।
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साथ ही, ऐसे टैक्सपेयर्स जिन्हें लिस्टेड शेयरों से ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, वे भी इसे ITR-1 और ITR-4 में दिखा सकते हैं — पहले इसके लिए ITR-2 भरना जरूरी होता था।
ITR-U फॉर्म: अपडेटेड रिटर्न के लिए बढ़ी समयसीमा
वित्त अधिनियम 2025 के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-U फॉर्म को भी नोटिफाई कर दिया है। यह फॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जो किसी कारणवश निर्धारित समयसीमा में रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए या उसमें कोई त्रुटि रह गई हो।
अब इस फॉर्म को आकलन वर्ष के अंत से 48 महीने (4 साल) तक फाइल किया जा सकता है — पहले यह सीमा 24 महीने थी।
ITR-U पर देना होगा अतिरिक्त टैक्स
आईटी विभाग के अनुसार, ITR-U फाइल करने पर टैक्सपेयर्स को संबंधित अवधि के अनुसार अतिरिक्त टैक्स देना होगा:
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12 से 24 महीनों के भीतर फाइलिंग: 25% और 50% एक्स्ट्रा टैक्स
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36 से 48 महीनों के भीतर फाइलिंग: 60% और 70% एक्स्ट्रा टैक्स
पिछले तीन वर्षों में करीब 90 लाख अपडेटेड रिटर्न फाइल किए गए हैं, जिससे सरकार को लगभग ₹8,500 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
टैक्सपेयर्स के लिए सलाह:
जिन्होंने अब तक वित्त वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) का ITR दाखिल नहीं किया है, वे अब एक्सेल यूटिलिटी के माध्यम से आसानी से प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। साथ ही समयसीमा को ध्यान में रखते हुए जल्द फाइलिंग करने से अतिरिक्त चार्ज से बचा जा सकता है।
