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शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 300 अंक टूटा; ऑटो-बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, निफ्टी भी फिसला
बिजनेस डेस्क
कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर के करीब पहुंचीं, एशियाई बाजारों में भी दबाव; आज से SBI फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के IPO खुले
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में कारोबार करता नजर आया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 300 अंक की गिरावट के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक फिसलकर 24,100 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे अधिक दबाव ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने मुनाफावसूली के चलते बिकवाली की।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू बाजार पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
मंगलवार के कारोबार में ऑटो और बैंकिंग कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बड़े निजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं कई प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इन सेक्टरों में पिछले कुछ समय से आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी सकारात्मक संकेत नहीं मिले। एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 4.90 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते रहे। वैश्विक बाजारों की यह कमजोरी भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी असर डालती दिखाई दी।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में आई कमजोरी ने नैस्डैक पर अधिक दबाव डाला। अमेरिकी बाजारों की इस गिरावट का असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।
बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ हुए समझौते को समाप्त मानने संबंधी बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। इससे आयात बिल बढ़ने के साथ-साथ महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। यदि तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो परिवहन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कंपनियों की आय और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
इस बीच प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए नए अवसर भी खुले हैं। मंगलवार से दो कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेश के लिए खुल गए हैं। इनमें एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड शामिल हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट इस आईपीओ के माध्यम से करीब 9,813 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जबकि अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड लगभग 126.25 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लेकर आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत कंपनियों के आईपीओ में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।
संस्थागत निवेशकों के आंकड़े भी बाजार की दिशा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले सात दिनों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 7,039 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। वहीं पिछले 30 दिनों में डीआईआई की कुल शुद्ध खरीद 41,290 करोड़ रुपये रही है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की गतिविधियां सीमित रही हैं। हालांकि पिछले सात दिनों में उन्होंने हल्की खरीदारी की, लेकिन पिछले एक महीने के आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली है।
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शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 300 अंक टूटा; ऑटो-बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, निफ्टी भी फिसला
बिजनेस डेस्क
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में कारोबार करता नजर आया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 300 अंक की गिरावट के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक फिसलकर 24,100 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे अधिक दबाव ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने मुनाफावसूली के चलते बिकवाली की।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू बाजार पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
मंगलवार के कारोबार में ऑटो और बैंकिंग कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बड़े निजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं कई प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इन सेक्टरों में पिछले कुछ समय से आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी सकारात्मक संकेत नहीं मिले। एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 4.90 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते रहे। वैश्विक बाजारों की यह कमजोरी भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी असर डालती दिखाई दी।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में आई कमजोरी ने नैस्डैक पर अधिक दबाव डाला। अमेरिकी बाजारों की इस गिरावट का असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।
बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ हुए समझौते को समाप्त मानने संबंधी बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। इससे आयात बिल बढ़ने के साथ-साथ महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। यदि तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो परिवहन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कंपनियों की आय और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
इस बीच प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए नए अवसर भी खुले हैं। मंगलवार से दो कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेश के लिए खुल गए हैं। इनमें एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड शामिल हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट इस आईपीओ के माध्यम से करीब 9,813 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जबकि अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड लगभग 126.25 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लेकर आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत कंपनियों के आईपीओ में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।
संस्थागत निवेशकों के आंकड़े भी बाजार की दिशा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले सात दिनों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 7,039 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। वहीं पिछले 30 दिनों में डीआईआई की कुल शुद्ध खरीद 41,290 करोड़ रुपये रही है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की गतिविधियां सीमित रही हैं। हालांकि पिछले सात दिनों में उन्होंने हल्की खरीदारी की, लेकिन पिछले एक महीने के आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली है।
